Prayagraj : गश्त पर निकले सिपाही की सड़क हादसे में मौत, वाहन के धक्के से बाइक समेत चले गए गड्ढे में
फाफामऊ थाने में तैनात सिपाही वीरेंद्र कुमार यादव शनिवार की रात को बाइक से गश्त पर निकले थे। मलाक हरहर गांव के सामने किसी अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी।
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फाफामऊ थाना क्षेत्र के मलाकहरहर में शनिवार देर-रात बाइक से गश्त कर रहे हेड कांस्टेबल वीरेंद्र कुमार यादव (45) को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। जिससे उनकी माैके पर माैत हो गई। हादसा इतना दर्दनाक था कि, वीरेंद्र रातभर सड़क किनारे एक गड्ढे में पड़े रहे। अगली सुबह जब ग्रामीणों की नजर उनपर पड़ी तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई। वहीं, दूसरी तरफ एनएचएआई की भी लापरवाही सामने आ रही है। दरअसल, लखनऊ से फाफामऊ तक राष्ट्रीय राजमार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसमें मलाकहरहर में पुलिया का चौड़ीकरण भी शामिल है। लेकिन, वाहन चालकों को इससे बचाने के लिए कोई बैरिकेडिंग नहीं की गई है।
मूलरूप से वाराणसी जनपद के थाना चौबेगंज ग्राम सोनाही भर्रा खुर्द के रहने वाले वीरेंद्र पुलिस लाइन में पत्नी व दो बेटे के साथ रहते थे। बड़ा बेटा स्नातक और छोटा बेटा बारहवीं की पढ़ाई कर रहा है। बीते 3 फरवरी को जीआरपी प्रयागराज से उनकी तैनाती फाफामऊ थाने में हुई थी। उनके पास उक्त थाना क्षेत्र का मलाकहरहर इलाका था। रोजाना की तरह वह शनिवार रात भी अपने इलाके में गश्त कर रहे थे। तभी अज्ञात वाहन उनको टक्कर मारकर फरार हो गया।
टक्कर के बाद वह निर्माणाधीन पुलिया के किनारे पानी से भरे गड्डे में चले गए। जबकि उनकी बाइक पुलिया के किनारे पड़ी थी। रात में किसी को घटना की जानकारी नही हो पाई। सुबह शौच करने गए गांव वालों ने शव देखकर इसकी जानकारी थाने में दी। थाना प्रभारी प्रवीण कुमार गौतम ने बताया कि हादसा किस वाहन से हुआ है, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है। आसपास के लोगों का बयान दर्ज करने के बाद अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मुकदमा किया गया है। वहीं दूसरी तरफ, इस घटना के बाद पत्नी और बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है।
माैत के बाद की गई बैरिकेडिंग
बैरिकेडिंग न होने के कारण रात में आवागमन में दिक्कत होमी है। चपेट में हेड कांस्टेबल वीरेंद्र कुमार यादव आ गए। हादसे के बाद वह निर्माणाधीन पुलिया के गड्डे में गिर गए। जिसमें पानी भरा होने के कारण उसकी मौत हो गई। हादसे के बाद वह पानी में नहीं गए होते तो राहगीरों की नजर उस पर पड़ती और इलाज के बाद वह बच सकते थे। लेकिन, विभाग की लापरवाही के कारण ऐसा नहीं हुआ। वहीं, मौत की सूचना के बाद निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार ने वहां बैरिकेडिंग करवाई।