बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

गलत मूल्यांकन पर आगरा विश्पविद्यालय पर एक लाख रुपये हर्जाना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 22 May 2019 08:23 PM IST
विज्ञापन
dr bhimrao ambedkar university agra
dr bhimrao ambedkar university agra
ख़बर सुनें
मेडिकल छात्र की कॉपी बिना जांचे उसे एक विषय में फेल कर देने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने डा. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने कहा है कि हर्जाने की राशि पीड़ित छात्र को अदा की जाए तथा बाद में विश्वविद्यालय चाहे तो संबंधित परीक्षक के खिलाफ जांच कर उससे रकम वसूल सकता है। लापरवाही पूर्वक मूल्यांकन कर होनहार छात्र के भविष्य से खिलवाड़ को कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय पर कड़ी टिप्पणी की है।
विज्ञापन


अदालत ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा को भी फैसले की प्रतियां भेजने का निर्देश दिया है। इनसे अपेक्षा की है कि मूल्यांकन करने वाले परीक्षकों की नियुक्ति करने में सावधानी बरती जाए और योग्य परीक्षकों को ही यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जाए। मेडिकल छात्र देवेश कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए हैरानी जताई कि इतने लापरवाह और अयोग्य परीक्षक की नियुक्ति कैसे कर दी गई जिसने छात्र की कॉपी जांचे बिना ही उसे फेल कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे परीक्षक न तो ईमानदार हैं और न ही उनमें योग्यता है।


अदालत का कहना था कि हमारी शिक्षा प्रणाली में छात्र की योग्यता उसे परीक्षा में प्राप्त अंकों से आंकी जाती है। पूरी पढ़ाई के दौरान उसने जो कुछ भी सीखा है उसे तीन घंटे की परीक्षा में दिखाना होता है। इसलिए छात्र का भविष्य उन परीक्षकों के हाथों में होता है जिनको मूल्यांकन का जिम्मा सौंपा जाता है।

भविष्य में न करें ऐसी गलती
कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय से अपेक्षा है कि भविष्य में इस प्रकार के अयोग्य और गैरजिम्मेदार परीक्षक की नियुक्ति नहीं करे। किसी भी एक छात्र के भविष्य से किसी हालत में समझौता नहीं किया जा सकता है। हमें उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे गैरजिम्मेदार और अज्ञानी परीक्षक नियुक्त नहीं होगा।

तीन वर्षों में परीक्षा देने वालों का करें मूल्यांकन
कोर्ट ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय की परीक्षा में सम्मिलित छात्र यदि पुनर्मूल्यांकन की मांग करते हैं तो उनका मना नहीं किया जाए। विश्वविद्यालय इस आधार पर पुनर्मूल्यांकन से इंकार नहीं कर सकता कि उनके यहां ऐसा नियम नहीं है।

यह था मामला
याची छात्र देवेश गुप्ता के अधिवक्ता जेन अब्बास के मुताबिक याची एसआर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस का छात्र है।  उसे एक एक सेमेस्टर की परीक्षा में फिजियोलॉजी विषय के पेपर में मात्र छह अंक देकर फेल कर दिया गया। उसने पुनर्मूल्यांकन की मांग की जिसे विश्वविद्यालय ने खारिज कर दिया। आरटीआई में कॉपियां मांगने पर पता चला कि उसकी उत्तर पुस्तिका में सिर्फ तीन प्रश्नों को जांचा गया उनमें भी उसे मात्र दो दो अंक दिए गए। शेष प्रश्नों के उत्तर जांचे ही नहीं गए। कोर्ट के आदेश पर उत्तर पुस्तिका की दो प्रतियों की जांच इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसरों और एक प्रति की किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर ने जांच की। उन्होंने देवेश को 20 और 21 अंक दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X