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शोल्डर- सावन के साथ सजे शिव मंदिर, पहला सोमवार आज
Allahabad
Updated Mon, 14 Jul 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। शिव की आराधना के माह सावन की शुरुआत के साथ शिवालय सजे। भोले के जलाभिषेक, पूजन, महारुद्राभिषेक, जप, आरती, अनुष्ठान के लिए शिव मंदिरों मे श्रद्धालुओं का तांता लगा। भोर से आरंभ अभिषेक, अनुष्ठान का क्रम रात तक जारी रहा। शिव मंदिरों के करीब सड़क की पटरियों पर माला-फूल सहित पूजन सामग्री बेचने वालों की दुकानों की कतारें लगीं। भोले के भक्तों के जयकारों से शिव मंदिरों के इर्द-गिर्द का क्षेत्र शिवमय हुआ। शिव मंदिरों को बिजली की झालरों से सजाया भी गया।
यमुना किनारे के मनकामेश्वर मंदिर सहित नागवासुकि, तक्षकतीर्थ बड़ा शिवाला, दशाश्वमेध, आदिशंकर विमान मंडपम, हाटकेश्वर, कोटेश्वर महादेव, पंचमुखी महादेव, शिव कचहरी आदि शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक सहित अनेक अनुष्ठान हुए। अभिषेक के लिए शिवभक्तों में होड़ रही। सावन की शुरुआत के साथ घरों में भी शिव और सावन के गीत हुए। सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की और भीड़ जुटेगी। सावन में चार सोमवार के अतिरिक्त 25 जुलाई को मास शिवरात्रि, पहली अगस्त को नागपंचमी, दस अगस्त को रक्षाबंधन और 24 जुलाई तथा आठ अगस्त को प्रदोष व्रत रखने के साथ मंदिरों में विशेष शृंगार और अनुष्ठान होंगे।
सावन में प्रतिदिन शिव का अभिषेक, अनुष्ठान फलदायी है लेकिन प्रत्येक सोमवार के लिए अभिषेक के लिए अलग-अलग विधान हैं। मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद के मुताबिक शिव के अभिषेक के लिए पहले सोमवार को गंगाजल, दूसरे-चौथे सोमवार को गन्ने के रस तथा दूध जबकि तीसरे सोमवार को गंगाजल तथा दूध से अभिषेक फलदायी होगा। मान्यता है कि रोग और दारिद्रय नाश के लिए सावन के प्रत्येक शनिवार को सरसों के तेल से रुद्राभिषेक भी लाभकारी होगा।
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सावन के पहले दिन रविवार को शिव को जलाभिषेक के लिए भोले के भक्त कांवड़ियों की कतारें लगीं। मनकामेश्वर, दशाश्वमेध, नागवासुकि, तक्षकतीर्थ सहित पड़िला महादेव, पंचमुखी, सुजावन देव मंदिर आदि में जयकारों के बीच कावंड़ियों ने जल चढ़ाया। वहीं सावन के पहले सोमवार पर जलाभिषेक के लिए पहले दिन दशाश्वमेध घाट पर जल भरकर कांवड़िये शिवधाम के लिए रवाना हुए। उन्होंने दारागंज के दशाश्वमेध घाट पर स्नान तथा पूजन के बाद कांवड़ उठाया। गंगा भवन के करीब कांवड़ की दुकानें सजीं और पूरे दिन कांवड़ियों का मेला लगा रहा।
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यमुना किनारे के मनकामेश्वर मंदिर सहित नागवासुकि, तक्षकतीर्थ बड़ा शिवाला, दशाश्वमेध, आदिशंकर विमान मंडपम, हाटकेश्वर, कोटेश्वर महादेव, पंचमुखी महादेव, शिव कचहरी आदि शिव मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक सहित अनेक अनुष्ठान हुए। अभिषेक के लिए शिवभक्तों में होड़ रही। सावन की शुरुआत के साथ घरों में भी शिव और सावन के गीत हुए। सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की और भीड़ जुटेगी। सावन में चार सोमवार के अतिरिक्त 25 जुलाई को मास शिवरात्रि, पहली अगस्त को नागपंचमी, दस अगस्त को रक्षाबंधन और 24 जुलाई तथा आठ अगस्त को प्रदोष व्रत रखने के साथ मंदिरों में विशेष शृंगार और अनुष्ठान होंगे।
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सावन में प्रतिदिन शिव का अभिषेक, अनुष्ठान फलदायी है लेकिन प्रत्येक सोमवार के लिए अभिषेक के लिए अलग-अलग विधान हैं। मनकामेश्वर मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद के मुताबिक शिव के अभिषेक के लिए पहले सोमवार को गंगाजल, दूसरे-चौथे सोमवार को गन्ने के रस तथा दूध जबकि तीसरे सोमवार को गंगाजल तथा दूध से अभिषेक फलदायी होगा। मान्यता है कि रोग और दारिद्रय नाश के लिए सावन के प्रत्येक शनिवार को सरसों के तेल से रुद्राभिषेक भी लाभकारी होगा।
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सावन के पहले दिन रविवार को शिव को जलाभिषेक के लिए भोले के भक्त कांवड़ियों की कतारें लगीं। मनकामेश्वर, दशाश्वमेध, नागवासुकि, तक्षकतीर्थ सहित पड़िला महादेव, पंचमुखी, सुजावन देव मंदिर आदि में जयकारों के बीच कावंड़ियों ने जल चढ़ाया। वहीं सावन के पहले सोमवार पर जलाभिषेक के लिए पहले दिन दशाश्वमेध घाट पर जल भरकर कांवड़िये शिवधाम के लिए रवाना हुए। उन्होंने दारागंज के दशाश्वमेध घाट पर स्नान तथा पूजन के बाद कांवड़ उठाया। गंगा भवन के करीब कांवड़ की दुकानें सजीं और पूरे दिन कांवड़ियों का मेला लगा रहा।