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डा. शिवा को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
Allahabad
Updated Tue, 17 Jun 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। ट्रिपलआईटी की छात्रा का यौन उत्पीड़न करने के मामले में शिक्षक डा. शिवा प्रसाद को हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने शिक्षक की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की उनकी मांग को नामंजूर करते हुए याचिका खारिज कर दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई की।
डा. शिवा प्रसाद के खिलाफ धूमनगंज थाने में पीड़ित छात्रा ने यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले में पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस और विभागीय जांच टीम के सामने उपस्थित होने के बजाय उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। पीड़ित छात्रा आरोपी शिक्षक के निर्देशन में शोध कर रही है। अपने संरक्षण में छात्रा का यौन उत्पीड़न करना बेहद गंभीर मामला है। ऐसे प्रकरण में न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। पीड़ित छात्रा की ओर से अधिवक्ता रवि श्रीवास्तव ने याचिका का विरोध किया।
डा. शिवा के अधिवक्ता ने कहा कि आरोपों की प्रकृति सामान्य है और मात्र याची को फंसाने की नीयत से इस प्रकार के आरोप लगाए गए। अदालत ने कहा कि प्राथमिकी में लगाए आरोप सामान्य नहीं बल्कि विशेष और गंभीर प्रकृति के हैं। उल्लेखनीय है कि डा. शिवा के खिलाफ उन्हीं के निर्देशन में शोध कर रही छात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। शिवा प्रसाद लंबे समय से छात्रा को परेशान करते आ रहे हैं। संस्थान ने भी छात्रा की शिकायत पर मामले की जांच कराई है हालांकि शिवा प्रसाद जांच कमेटी के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
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डा. शिवा प्रसाद के खिलाफ धूमनगंज थाने में पीड़ित छात्रा ने यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले में पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस और विभागीय जांच टीम के सामने उपस्थित होने के बजाय उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की। खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। पीड़ित छात्रा आरोपी शिक्षक के निर्देशन में शोध कर रही है। अपने संरक्षण में छात्रा का यौन उत्पीड़न करना बेहद गंभीर मामला है। ऐसे प्रकरण में न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है। पीड़ित छात्रा की ओर से अधिवक्ता रवि श्रीवास्तव ने याचिका का विरोध किया।
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डा. शिवा के अधिवक्ता ने कहा कि आरोपों की प्रकृति सामान्य है और मात्र याची को फंसाने की नीयत से इस प्रकार के आरोप लगाए गए। अदालत ने कहा कि प्राथमिकी में लगाए आरोप सामान्य नहीं बल्कि विशेष और गंभीर प्रकृति के हैं। उल्लेखनीय है कि डा. शिवा के खिलाफ उन्हीं के निर्देशन में शोध कर रही छात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। शिवा प्रसाद लंबे समय से छात्रा को परेशान करते आ रहे हैं। संस्थान ने भी छात्रा की शिकायत पर मामले की जांच कराई है हालांकि शिवा प्रसाद जांच कमेटी के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित नहीं हुए।
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