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पशुओं की अवैध कटाई पर जवाब तलब
Allahabad
Updated Mon, 02 Jun 2014 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। हाईकोर्ट सख्त निर्देश के बावजूद मेरठ में चोरी छिपे स्लाटर हाउस चलाए जाने और अवैध तरीके से मीट की सप्लाई करने के मामले में हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम मेरठ, राज्य सरकार और चार मीट सप्लायर्स से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका पर जुलाई में सुनवाई होगी। मेरठ के लोकेश खुराना की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति राकेश तिवारी और न्यायमूर्ति एके अग्रवाल की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।
याचिका में कहा गया है कि मेरठ शहर के तमाम इलाकों मेें छोटे-छोटे स्लाटर हाउस बना कर उनमें अवैध तरीके से पशुओें की कटाई जा रही है जिससे प्रदूषण फैल रहा है। काटे गए पशुओं का रक्त खुली नालियों या सीवर के जरिए बहाया जाता है इससे लोक स्वास्थ्य को खतरा पैदा रहा है। पशु काटने में लगे लोग उपयोगी और दुधारू जानवरों की भी कटाई कर रहे हैं। मांस निर्यातकों की जरूरत को पूरा करने के इरादे से उपयोगी जानवरों का भी वध किया जा रहा है। याचिका में मांस निर्यातकों को भी पक्षकार बनाया गया है। स्थानीय प्रशासन, नगर निगम के अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इनकी रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता डा. एचएन त्रिपाठी ने बताया कि अवैध रूप से चल रहे स्लाटर हाउसों, बूचड़ खानों को बंद किया जा चुका है। खंडपीठ ने पक्षकारों को याचिका पर चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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याचिका में कहा गया है कि मेरठ शहर के तमाम इलाकों मेें छोटे-छोटे स्लाटर हाउस बना कर उनमें अवैध तरीके से पशुओें की कटाई जा रही है जिससे प्रदूषण फैल रहा है। काटे गए पशुओं का रक्त खुली नालियों या सीवर के जरिए बहाया जाता है इससे लोक स्वास्थ्य को खतरा पैदा रहा है। पशु काटने में लगे लोग उपयोगी और दुधारू जानवरों की भी कटाई कर रहे हैं। मांस निर्यातकों की जरूरत को पूरा करने के इरादे से उपयोगी जानवरों का भी वध किया जा रहा है। याचिका में मांस निर्यातकों को भी पक्षकार बनाया गया है। स्थानीय प्रशासन, नगर निगम के अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इनकी रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता डा. एचएन त्रिपाठी ने बताया कि अवैध रूप से चल रहे स्लाटर हाउसों, बूचड़ खानों को बंद किया जा चुका है। खंडपीठ ने पक्षकारों को याचिका पर चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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