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तस्वीरें सुना रही हैं समय की कहानी
Allahabad
Updated Mon, 19 Aug 2013 05:34 AM IST
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इलाहाबाद। आजादी की लड़ाई में इलाहाबाद के योगदान को पूरी दुनिया जानती है और कुंभ की धमक से भी सब वाकिफ हैं लेकिन इन दोनों की खूबियों को सबके सामने पूरी भव्यता से पेश करती हैं, तस्वीरें। समय के साथ जब तमाम यादें धुंधली पड़ने लगती हैं, तो तस्वीरें ही वक्त का आइना दिखाती हैं। अतीत की छवियां देखते हुए, सुनहरे कल की जाने कितनी तस्वीरें ताजा होती हैं। संगम की रेती पर पूरे हुए पूर्ण महाकुंभ की अनगिनत दुर्लभ छवियों को सहेजने केलिए पूरी दुनिया से छायाकार जुटे। महाकुंभ से इतर बीते दिनों एक बार फिर पूरी शिद्दत से इलाहाबाद, अंतरराष्ट्रीय फोटो जगत में तब छाया, जब ऑनलाइन नीलामी के तहत भारतीय कला बाजार में इलाहाबाद की एक तस्वीर सात लाख तीस हजार रुपये में बिकी। यह आनंद भवन के उस कमरे की तस्वीर थी, जहां इलाहाबाद आने पर महात्मा गांधी रुकते थे। ‘गांधीज रूम’ की ब्लैक ऐंट व्हाइट तस्वीर की धमक की तरह ही कई छायाकारों की कई-कई तस्वीरें बतौर दस्तावेज बदलते वक्त और शहर की कहानी कहती हैं। अंग्रेजों से इतर पारसी पटेल ने सिविल लाइंस में स्टूडियो खोलकर फोटोग्राफी की शुरुआत की थी। अमृत बाजार पत्रिका के छायाकार एनएन मुखर्जी ने वर्ष 1954 के कुंभ के दौरान एक ऐसी तस्वीर उतारी जो दिल दहला देने के लिए काफी थी। भगदड़ के दौरान जान बचाने को एक व्यक्ति ने बिजली के तारों के बीच पनाह ली। जाने-माने छायाकार जीपी अर्गल द्वारा उतारी गई निराला जी की दुर्लभ तस्वीर को ही बाद में डाक टिकट पर जगह मिली। इसी तरह जानसेनगंज के एसएन श्रीवास्तव, नखासकोहना के बक्शी, सिविल लाइंस के कोहली, बंगाल, ग्लैमर स्टूडियो आदि के तमाम मशहूर छायाचित्रों ने भी धूम मचाई।
बाट-माप विभाग में वरिष्ठ सहायक अनिल सक्सेना के संग्रह में आजादी और कुंभ से जुड़ी तमाम दुर्लभ तस्वीरों के साथ तमाम पीएन वर्मा, विश्वकर्मा, ब्रजेंद्र आदि छायाकारों की उतारी हुई ऐसी तस्वीरें भी हैं, जो बखूबी बीते कल का इतिहास बनाती हैं। इसमें 15 अगस्त 1947 को आजादी का जश्न मनाने, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू तथा गणेश शंकर विद्यार्थी, कांग्रेसियों के साथ बैठक में अरुणा आसफ अली, अज्ञात सेनानियों की मौत पर जमा भीड़ के अतिरिक्त वर्ष 1954 के कुंभ की तैयारियों का जायजा लेते पंडित नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, अखाड़ों के शाही स्नान, नागा संन्यासियों के जुलूस, पीपे का पुल, पिंडदान आदि की तस्वीरें हैं। वहीं संग्रह में चौक की एक रक्कासा, पुराने चौक, जानसेनगंज, रेलवे स्टेशन, युनिवर्सिटी, ऑल सेंट्स कैथिड़्ल आदि की दुर्लभ तस्वीरें भी हैं।
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बाट-माप विभाग में वरिष्ठ सहायक अनिल सक्सेना के संग्रह में आजादी और कुंभ से जुड़ी तमाम दुर्लभ तस्वीरों के साथ तमाम पीएन वर्मा, विश्वकर्मा, ब्रजेंद्र आदि छायाकारों की उतारी हुई ऐसी तस्वीरें भी हैं, जो बखूबी बीते कल का इतिहास बनाती हैं। इसमें 15 अगस्त 1947 को आजादी का जश्न मनाने, महात्मा गांधी, पंडित नेहरू तथा गणेश शंकर विद्यार्थी, कांग्रेसियों के साथ बैठक में अरुणा आसफ अली, अज्ञात सेनानियों की मौत पर जमा भीड़ के अतिरिक्त वर्ष 1954 के कुंभ की तैयारियों का जायजा लेते पंडित नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, अखाड़ों के शाही स्नान, नागा संन्यासियों के जुलूस, पीपे का पुल, पिंडदान आदि की तस्वीरें हैं। वहीं संग्रह में चौक की एक रक्कासा, पुराने चौक, जानसेनगंज, रेलवे स्टेशन, युनिवर्सिटी, ऑल सेंट्स कैथिड़्ल आदि की दुर्लभ तस्वीरें भी हैं।
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