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स्वामी अड़गड़ानंद ने दी सच्ची भक्ति की सीख, भक्त के वश में होते हैं भगवान
Allahabad
Updated Sun, 05 May 2013 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। सद्गुरु स्वामी अड़गड़ानंद ने शनिवार को श्रद्धालुओं को यथार्थ गीता का संदेश देते हुए सच्ची भक्ति का मर्म समझाया। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा, ईश्वर सिर्फ उसी की मदद करता है जो उसे अपना सर्वस्व मान बैठते हैं। द्रोपदी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, सभी की शक्ति का संबंल तलाशने के बाद जैसे ही उन्होंने कृष्ण को याद किया, वह उसी क्षण उनकी लाज बचाने को पहुंचे। जब व्यक्ति अपबल, तपबल, बाहुबल के सहारे को छोड़कर ईश्वर की शरण में जाता है, हारे को हरिनाम को चरितार्थ करता है, तब ईश्वर उसकी मदद को उसी पल आते हैं।
इसी उन्होंने श्रद्धा और समर्पण का महत्व बताया। कहा, अपेक्षा करने वाले से श्रद्धा और समर्पण वाले की मदद को कृष्ण पहले पहुंचे। जो व्यक्ति चरित्रवान होता है, ईश्वर उसी के पास होते हैं और वहीं पर सभी तीर्थ होते हैं। सच्ची भक्ति करने वाले के वश में ही भगवान होते हैं। उसे किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। यथार्थ गीता के महत्व के साथ उन्होंने उसे महाप्रसाद की संज्ञा दी।
भजनों के बीच प्रवचन देते हुए उन्होंने श्री राम जयराम के जयकारों के साथ समापन किया। प्रवचन के पूरा होने पर उन्हें प्रणाम करने और भेंट चढ़ाने के लिए लोग मंच की ओर टूट पड़े। इससे पहले संत लखन, संत नारद, संत तुलसी, संत आशीष, संत मौलि ने भी ईश्वर की भक्ति का अर्थ समझाया। मम्फोर्डगंज स्थित भारत स्काउट ऐंड गाइड स्कूल में प्रवचन के बाद स्वामी अड़गड़ानंद शृंग्वेरपुर के लिए रवाना हुए। शक्तेशगढ़ आश्रम से इलाहाबाद आने पर वह शिष्य अवधेश बहादुर सिंह के आवास पर पहुंचे, वहां थोड़ी देर विश्राम के बाद प्रवचन स्थल पर आए। यहां दोपहर से शुरू भंडारा शाम तक चलता रहा जिसमें भोग प्रसाद के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरुष और महिलाएं पहुंची।
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इसी उन्होंने श्रद्धा और समर्पण का महत्व बताया। कहा, अपेक्षा करने वाले से श्रद्धा और समर्पण वाले की मदद को कृष्ण पहले पहुंचे। जो व्यक्ति चरित्रवान होता है, ईश्वर उसी के पास होते हैं और वहीं पर सभी तीर्थ होते हैं। सच्ची भक्ति करने वाले के वश में ही भगवान होते हैं। उसे किसी प्रकार का भय नहीं होना चाहिए। यथार्थ गीता के महत्व के साथ उन्होंने उसे महाप्रसाद की संज्ञा दी।
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भजनों के बीच प्रवचन देते हुए उन्होंने श्री राम जयराम के जयकारों के साथ समापन किया। प्रवचन के पूरा होने पर उन्हें प्रणाम करने और भेंट चढ़ाने के लिए लोग मंच की ओर टूट पड़े। इससे पहले संत लखन, संत नारद, संत तुलसी, संत आशीष, संत मौलि ने भी ईश्वर की भक्ति का अर्थ समझाया। मम्फोर्डगंज स्थित भारत स्काउट ऐंड गाइड स्कूल में प्रवचन के बाद स्वामी अड़गड़ानंद शृंग्वेरपुर के लिए रवाना हुए। शक्तेशगढ़ आश्रम से इलाहाबाद आने पर वह शिष्य अवधेश बहादुर सिंह के आवास पर पहुंचे, वहां थोड़ी देर विश्राम के बाद प्रवचन स्थल पर आए। यहां दोपहर से शुरू भंडारा शाम तक चलता रहा जिसमें भोग प्रसाद के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरुष और महिलाएं पहुंची।
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