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सनसनी के बाद दिखा रहे सतर्कता
Allahabad
Updated Wed, 10 Apr 2013 05:30 AM IST
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नैनी। हर बड़ी घटना के बाद प्रशासन अपनी सतर्कता बढ़ा देेता है। इस बार भी सेंट्रल जेल के दस कै दियों के भागने के बाद यही हो रहा है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर घटनाओं के बाद ही अधिकारियों की चेतना क्यों जागती है।
मंगलवार सुबह जेल परिसर में नजारा कुछ बदला सा नजर आ रहा था। कैदियों के भागने के बाद दरोगा एवं सिपाहियों पर हुई कार्रवाई का खौफ जेल सिपाहियों पर भी दिख रहा था। रोज की तरह बंदियों को अदालत ले जाने के लिए पुलिस लाइन से आई गारद में जवानों की संख्या अधिक रही। गारद के सिपाही काफी सतर्क लग रहे थे। अधिकारियों की हनक उनके चेहरे पर झलक रही थी। हर बार घटना के बाद ऐसा होता है। सतर्कता बढ़ जाती है, लेकिन यह कुछ दिनों के लिए ही होता है और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। हर कोई लापरवाह बना रहता है। न तो अधिकारी कभी जांच करते हैं न सबूत मिलने पर कार्रवाई करते हैं। कैदी पेशी के लिए कैसे ले जाए जाते हैं, इस पर भी ध्यान देने वाला कोई नहीं होता। अफसरों को होश तब आता है, जब कोई बड़ी घटना हो जाती है।
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मंगलवार सुबह जेल परिसर में नजारा कुछ बदला सा नजर आ रहा था। कैदियों के भागने के बाद दरोगा एवं सिपाहियों पर हुई कार्रवाई का खौफ जेल सिपाहियों पर भी दिख रहा था। रोज की तरह बंदियों को अदालत ले जाने के लिए पुलिस लाइन से आई गारद में जवानों की संख्या अधिक रही। गारद के सिपाही काफी सतर्क लग रहे थे। अधिकारियों की हनक उनके चेहरे पर झलक रही थी। हर बार घटना के बाद ऐसा होता है। सतर्कता बढ़ जाती है, लेकिन यह कुछ दिनों के लिए ही होता है और फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। हर कोई लापरवाह बना रहता है। न तो अधिकारी कभी जांच करते हैं न सबूत मिलने पर कार्रवाई करते हैं। कैदी पेशी के लिए कैसे ले जाए जाते हैं, इस पर भी ध्यान देने वाला कोई नहीं होता। अफसरों को होश तब आता है, जब कोई बड़ी घटना हो जाती है।
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