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बंदूक, राइफल की शौकीन संन्यासिन
Allahabad
Updated Sat, 02 Feb 2013 05:30 AM IST
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महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)। फिल्मी सितारों और सियासी लोगों को जुटाकर शान बढ़ाने वाले संतों के खुद के शौक भी निराले हैं। किसी को चार-चार इंच हिल वाली खड़ाऊ पहनना पसंद है तो भारी भरकम कमांडो के साथ चलना पसंद करता है। इन सबके बीच महाकुंभ में एक ऐसी नागा संन्यासिनी भी हैं, जिन्हें शास्त्रों के साथ हथियारों से भी बेहद लगाव है। इस संन्यासिनी को जिस तरह शास्त्रों के श्लोक रटे हुए हैं, उसी तरह दो नाली बंदूक से अचूक निशाना लगाने में भी महारत हासिल है।
जूना अखाड़ा की महंत दया भारती को बचपन से ही हथियारों का शौक है। नौ वर्ष की उम्र में ही संन्यास ग्रहण कर लिया था और दीक्षा के दौरान ही हथियार चलाने लगीं। तब से लेकर अब तक उन्होंने कई तरह की दोनाली बंदूक, पिस्टल, राइफल चलाई है। कई बार निशाने की प्रतियोगिता में भी वह अव्वल रहीं। उन्हें जब भी मौका मिलता है निशानेबाजी में हाथ आजमा लेती हैं। संत बनने के बाद हाईस्कूल तक की शिक्षा ग्रहण करने वाली महंत दया भारती का कहना है कि शस्त्रों को चलाने का प्रशिक्षण उन्हें उनके अखाड़े के गुरु महंत दिगंबर राम भारती ने दिया। उनके पास एक डबल बैरेल बंदूक का लाइसेंस भी है। हालांकि उन्होंने इसका कभी भी दुरुपयोग नहीं किया। गुरु ही उन्हें निशाने की प्रतियोगिताओं में हिस्सा दिलाते थे। हथियारों के बारे में उन्हें ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करने का जुनून सा है। वह अक्सर भक्तों से इसके बारे में जानकारी हासिल करती हैं। महाकुंभ में आए एटा के भक्त शिवकिशोर ने बताया कि उन्होंने महंत जी को कई बार कई हथियारों के बारे में जानकारी दी है। वह अपनी लाइसेंसी बंदूक मेले में साथ तो लाई हैं, लेकिन महंत जी ने उन्हें बंदूक संदूक से निकालने और साथ लेकर चलने के लिए मना कर दिया है। इसलिए वह कुंभ में शौक को दबाए साधना में लीन हैं।
राजस्थान के धौलपुर जिला स्थित राजाखेड़ा हनुमान धाम आश्रम में रहने वाली महंत दया भारती को हथियारों के साथ ही तरह-तरह की लग्जरी गाड़ियां चलाने का भी शौक है। उनके पास दो लग्जरी गाड़ियां भी हैं, जिसे वह स्वयं ड्राइव करती हैं। बताया कि वह खुद ड्राइव कर संगमनगरी पहुंची हैं। इसके पहले हरिद्वार, नासिक, उज्जैन में लगने वाले कुंभ में भी शामिल हो चुकी हैं और सभी जगह राजस्थान स्थित आश्रम से स्वयं ही गाड़ी चलाकर पहुंची। चारों धाम की यात्रा भी उन्होंने की है और लगभग सभी यात्राओं में वह गाड़ी खुद चलाती हैं।
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जूना अखाड़ा की महंत दया भारती को बचपन से ही हथियारों का शौक है। नौ वर्ष की उम्र में ही संन्यास ग्रहण कर लिया था और दीक्षा के दौरान ही हथियार चलाने लगीं। तब से लेकर अब तक उन्होंने कई तरह की दोनाली बंदूक, पिस्टल, राइफल चलाई है। कई बार निशाने की प्रतियोगिता में भी वह अव्वल रहीं। उन्हें जब भी मौका मिलता है निशानेबाजी में हाथ आजमा लेती हैं। संत बनने के बाद हाईस्कूल तक की शिक्षा ग्रहण करने वाली महंत दया भारती का कहना है कि शस्त्रों को चलाने का प्रशिक्षण उन्हें उनके अखाड़े के गुरु महंत दिगंबर राम भारती ने दिया। उनके पास एक डबल बैरेल बंदूक का लाइसेंस भी है। हालांकि उन्होंने इसका कभी भी दुरुपयोग नहीं किया। गुरु ही उन्हें निशाने की प्रतियोगिताओं में हिस्सा दिलाते थे। हथियारों के बारे में उन्हें ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करने का जुनून सा है। वह अक्सर भक्तों से इसके बारे में जानकारी हासिल करती हैं। महाकुंभ में आए एटा के भक्त शिवकिशोर ने बताया कि उन्होंने महंत जी को कई बार कई हथियारों के बारे में जानकारी दी है। वह अपनी लाइसेंसी बंदूक मेले में साथ तो लाई हैं, लेकिन महंत जी ने उन्हें बंदूक संदूक से निकालने और साथ लेकर चलने के लिए मना कर दिया है। इसलिए वह कुंभ में शौक को दबाए साधना में लीन हैं।
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राजस्थान के धौलपुर जिला स्थित राजाखेड़ा हनुमान धाम आश्रम में रहने वाली महंत दया भारती को हथियारों के साथ ही तरह-तरह की लग्जरी गाड़ियां चलाने का भी शौक है। उनके पास दो लग्जरी गाड़ियां भी हैं, जिसे वह स्वयं ड्राइव करती हैं। बताया कि वह खुद ड्राइव कर संगमनगरी पहुंची हैं। इसके पहले हरिद्वार, नासिक, उज्जैन में लगने वाले कुंभ में भी शामिल हो चुकी हैं और सभी जगह राजस्थान स्थित आश्रम से स्वयं ही गाड़ी चलाकर पहुंची। चारों धाम की यात्रा भी उन्होंने की है और लगभग सभी यात्राओं में वह गाड़ी खुद चलाती हैं।
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