{"_id":"5beae195bdec2269bd06b12b","slug":"91542119829-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इलाहाबाद का नाम बदलने के खिलाफ याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इलाहाबाद का नाम बदलने के खिलाफ याचिका खारिज
Updated Tue, 13 Nov 2018 08:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद का नाम बदलने के खिलाफ याचिका खारिज
0 हाईकोर्ट ने कहा, याची राज्य सरकार के समक्ष प्रत्यावेदन देकर उठाए आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के खिलाफ दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में नाम बदलने के लिए जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने याची से कहा कि वह याचिका में उठाई गई आपत्तियों को राज्य सरकार के समक्ष प्रत्यावेदन देकर उठाए। याची के पास ऐसा करने का विकल्प मौजूद है, इसलिए सरकार से शिकायत किए बिना समादेश जारी करने के लिए सीधे दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने का औचित्य नहीं है।
अधिवक्ता सुनीता शर्मा की जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ ने सुनवाई की। याचिका पर अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव और एससी मिश्र ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने इलाहाबाद के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व पर विचार किए बिना इसका नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया है। इसी प्रकार से 2019 में लगने वाले अर्द्ध कुंभ का नाम बदलकर कुंभ कर दिया गया। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं हैं। जिले का नाम बदलने में सरकार ने राजस्व संहिता की धारा तीन का उल्लंघन किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कहना था कि याची को कोर्ट में याचिका दाखिल करने से पहले राज्य सरकार को प्रत्यावेदन देकर अपनी आपत्ति जतानी चाहिए।
विज्ञापन
0 हाईकोर्ट ने कहा, याची राज्य सरकार के समक्ष प्रत्यावेदन देकर उठाए आपत्ति
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने के खिलाफ दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में नाम बदलने के लिए जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने याची से कहा कि वह याचिका में उठाई गई आपत्तियों को राज्य सरकार के समक्ष प्रत्यावेदन देकर उठाए। याची के पास ऐसा करने का विकल्प मौजूद है, इसलिए सरकार से शिकायत किए बिना समादेश जारी करने के लिए सीधे दाखिल याचिका पर हस्तक्षेप करने का औचित्य नहीं है।
अधिवक्ता सुनीता शर्मा की जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सीडी सिंह की पीठ ने सुनवाई की। याचिका पर अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव और एससी मिश्र ने पक्ष रखा। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने इलाहाबाद के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व पर विचार किए बिना इसका नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया है। इसी प्रकार से 2019 में लगने वाले अर्द्ध कुंभ का नाम बदलकर कुंभ कर दिया गया। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं हैं। जिले का नाम बदलने में सरकार ने राजस्व संहिता की धारा तीन का उल्लंघन किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कहना था कि याची को कोर्ट में याचिका दाखिल करने से पहले राज्य सरकार को प्रत्यावेदन देकर अपनी आपत्ति जतानी चाहिए।
विज्ञापन