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जूना ने बनाए आठ महांडलेश्वर
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कुंभ पर्व के प्रथम शाही स्नान से पहले संगम की रेती पर विभिन्न अखाड़ों की ओर से महामंडलेश्वर बनाने का सिलसिला आरंभ हुआ। इसके तहत जहां पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी की ओर से काशी के एक पीठाधीश्वर को महामंडलेश्वर बनाया गया, वहीं पंचदशनाम जूना अखाड़ा की ओर से एक महिला महामंडलेश्वर सहित कुल आठ संतों का महामंडलेश्वर के पद पर पट्टाभिषेक किया गया।
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कन्हैया, वैष्णवी सहित आठ बने महामंडलेश्वर
0 जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने ओढ़ाई चादर
प्रयागराज। पंचदशनाम जूना अखाड़ा की ओर से गंगा की रेती पर रविवार को देश के विभिन्न भागों से आए आठ पीठाधीश्वरों का महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक किया गया। इसके तहत एक महिला, एक अनूसूचित जाति, दो पिछड़ी जाति से जुड़े संत भी शामिल रहे। अभिषेक आसन पर बिठाने के बाद अखाड़े की ओर से उन्हें छत्र, चंवर, दंड प्रदान किया गया।
वैदिक रीति-नीति के मुताबिक अखाड़े के पुरोहितों की ओर से पंचदेव पूजन, विविध संस्कारों, अनुष्ठानों के बाद जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने मंत्रोच्चार और स्वस्ति वाचन से श्रीशुद्धि के बाद उनका पट्टाभिषेक किया। उनके साथ अखाड़े के रमता पंचों, श्रीमहंतों, सचिवों ने भी पट्टाभिषेक किए जाने वाले संत को चादर ओढ़ाई। इसी क्रम में अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भी चादर ओढ़ाकर महामंडलेश्वरों को मान्यता दी।
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गंगा किनारे हुए पट्टाभिषेक कार्यक्रम में जूना के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि, उपाध्यक्ष श्रीमहंत प्रेमगिरि, राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती, कामाख्या पीठाधीश्वर जगद्गुरु पंचानंद गिरि के अतिरिक्त किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, उत्तर भारत पीठाधीश्वर भवानी मां, पवित्रा जी सहित दोनों अखाड़ों के अन्य, पीठाधीश्वर, संत-महंत मौजूद थे।
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जो बने महामंडलेश्वर
अनुष्ठान के बाद कामाख्या पीठाधीश्वर और जूना अखाड़े के जगद्गुरु पंचानंद गिरि के शिष्य अनुसूचित जाति से जुड़े कन्हैया प्रभुनंद गिरि, अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े कानपुर के प्रज्ञानंद गिरि, पंचकूला से अशोकनाथ गिरि, श्रीमहंत प्रेमगिरि के शिष्य अन्य पिछड़ा वर्ग से ही जुड़े बैजनत्था, वाराणसी स्थित जागेश्वर मठ के स्वामी अविमुक्तानंद गिरि, विवेकानंद गिरि, नंदेश्वरी गिरि, गुजरात के घनश्याम पुरी, फगवाड़ा की वैष्णवी जी सहित आठ को महामंडलेश्वर की पदवी दी गई। इन सभी संतों की दीक्षा और अन्य संस्कार पहले ही हो चुके थे, रविवार को उनका पट्टाभिषेक किया गया।
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जूना ने सभी जातियों के लिए खोले दरवाजे
प्रयागराज। पट्टाभिषेक के बाद जूना अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने ’अमर उजाला’ से बातचीत में स्पष्ट किया कि जूना के दरवाजे सभी जातियों के लिए खुले हैं। वहीं जगद्गुरु पंचानंद गिरि ने कहा कि जूना सिर्फ ढाई जातियों को ही मानता है, एक नर, एक नारी और आधे में किन्नर। ऐसे में जो कोई भी विद्वान है, उसे महामंडलेश्वर बनाया जा सकता है, फिर वह चाहे जिस भी जाति का हो।
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कन्हैया, वैष्णवी सहित आठ बने महामंडलेश्वर
0 जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने ओढ़ाई चादर
प्रयागराज। पंचदशनाम जूना अखाड़ा की ओर से गंगा की रेती पर रविवार को देश के विभिन्न भागों से आए आठ पीठाधीश्वरों का महामंडलेश्वर पद पर पट्टाभिषेक किया गया। इसके तहत एक महिला, एक अनूसूचित जाति, दो पिछड़ी जाति से जुड़े संत भी शामिल रहे। अभिषेक आसन पर बिठाने के बाद अखाड़े की ओर से उन्हें छत्र, चंवर, दंड प्रदान किया गया।
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वैदिक रीति-नीति के मुताबिक अखाड़े के पुरोहितों की ओर से पंचदेव पूजन, विविध संस्कारों, अनुष्ठानों के बाद जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने मंत्रोच्चार और स्वस्ति वाचन से श्रीशुद्धि के बाद उनका पट्टाभिषेक किया। उनके साथ अखाड़े के रमता पंचों, श्रीमहंतों, सचिवों ने भी पट्टाभिषेक किए जाने वाले संत को चादर ओढ़ाई। इसी क्रम में अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भी चादर ओढ़ाकर महामंडलेश्वरों को मान्यता दी।
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गंगा किनारे हुए पट्टाभिषेक कार्यक्रम में जूना के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरिगिरि, उपाध्यक्ष श्रीमहंत प्रेमगिरि, राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती, कामाख्या पीठाधीश्वर जगद्गुरु पंचानंद गिरि के अतिरिक्त किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, उत्तर भारत पीठाधीश्वर भवानी मां, पवित्रा जी सहित दोनों अखाड़ों के अन्य, पीठाधीश्वर, संत-महंत मौजूद थे।
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जो बने महामंडलेश्वर
अनुष्ठान के बाद कामाख्या पीठाधीश्वर और जूना अखाड़े के जगद्गुरु पंचानंद गिरि के शिष्य अनुसूचित जाति से जुड़े कन्हैया प्रभुनंद गिरि, अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े कानपुर के प्रज्ञानंद गिरि, पंचकूला से अशोकनाथ गिरि, श्रीमहंत प्रेमगिरि के शिष्य अन्य पिछड़ा वर्ग से ही जुड़े बैजनत्था, वाराणसी स्थित जागेश्वर मठ के स्वामी अविमुक्तानंद गिरि, विवेकानंद गिरि, नंदेश्वरी गिरि, गुजरात के घनश्याम पुरी, फगवाड़ा की वैष्णवी जी सहित आठ को महामंडलेश्वर की पदवी दी गई। इन सभी संतों की दीक्षा और अन्य संस्कार पहले ही हो चुके थे, रविवार को उनका पट्टाभिषेक किया गया।
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जूना ने सभी जातियों के लिए खोले दरवाजे
प्रयागराज। पट्टाभिषेक के बाद जूना अखाड़े के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत विद्यानंद सरस्वती ने ’अमर उजाला’ से बातचीत में स्पष्ट किया कि जूना के दरवाजे सभी जातियों के लिए खुले हैं। वहीं जगद्गुरु पंचानंद गिरि ने कहा कि जूना सिर्फ ढाई जातियों को ही मानता है, एक नर, एक नारी और आधे में किन्नर। ऐसे में जो कोई भी विद्वान है, उसे महामंडलेश्वर बनाया जा सकता है, फिर वह चाहे जिस भी जाति का हो।