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आयोग को नहीं है अर्हता तय करने का अधिकार
Updated Tue, 04 Dec 2018 08:19 PM IST
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आयोग को नहीं है अर्हता
तय करने का अधिकार
0 डिग्री कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर भर्ती मामला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति हेतु अर्हता तय करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राज्य सरकार या यूजीसी को है। जीव विज्ञान के 106 प्रोफेसरों की चयन सूची को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया है।
याचिका में कहा गया कि आयोग ने 106 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती में विशेषज्ञों की राय से पर्यावरण विज्ञान में डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को भी चयनित कर लिया, जबकि जीव विज्ञान के लिए निर्धारित योग्यता लाइफ साइंस में नेट उत्तीर्ण होना तय किया गया है। आयोग ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर काम किया है। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि पर्यावरण विज्ञान की डिग्री रखने वाले चयनित अभ्यर्थियों की सूची को लंबित रखा जाए तथा 25 अगस्त 2018 की चयन सूची, जिसमें लाइफ साइंस से नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थी शामिल हैं, को नियुक्ति हेतु तत्काल भेजा जाए।
कोर्ट ने कहा है कि आयोग पर्यावरण विज्ञान की डिग्री को अर्हता में शामिल करने के लिए अपनी संस्तुति राज्य सरकार को भेजे और राज्य सरकार छह सप्ताह मेें नियमानुसार निर्णय ले। याची का कहना था कि वह पद हेतु निर्धारित योग्यता रखते हैं, लेकिन उनको प्रतीक्षा सूची में रखा गया है जबकि अर्हता न रखने वाले अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल कर लिया गया है। यदि उनका नाम निकाल दिया जाए तो याचीगण को नियुक्ति मिल सकती है। आयोग को पद की अर्हता तय करने का अधिकार नहीं है।
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तय करने का अधिकार
0 डिग्री कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर भर्ती मामला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति हेतु अर्हता तय करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राज्य सरकार या यूजीसी को है। जीव विज्ञान के 106 प्रोफेसरों की चयन सूची को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया है।
याचिका में कहा गया कि आयोग ने 106 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती में विशेषज्ञों की राय से पर्यावरण विज्ञान में डिग्री रखने वाले अभ्यर्थियों को भी चयनित कर लिया, जबकि जीव विज्ञान के लिए निर्धारित योग्यता लाइफ साइंस में नेट उत्तीर्ण होना तय किया गया है। आयोग ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर काम किया है। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि पर्यावरण विज्ञान की डिग्री रखने वाले चयनित अभ्यर्थियों की सूची को लंबित रखा जाए तथा 25 अगस्त 2018 की चयन सूची, जिसमें लाइफ साइंस से नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थी शामिल हैं, को नियुक्ति हेतु तत्काल भेजा जाए।
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कोर्ट ने कहा है कि आयोग पर्यावरण विज्ञान की डिग्री को अर्हता में शामिल करने के लिए अपनी संस्तुति राज्य सरकार को भेजे और राज्य सरकार छह सप्ताह मेें नियमानुसार निर्णय ले। याची का कहना था कि वह पद हेतु निर्धारित योग्यता रखते हैं, लेकिन उनको प्रतीक्षा सूची में रखा गया है जबकि अर्हता न रखने वाले अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल कर लिया गया है। यदि उनका नाम निकाल दिया जाए तो याचीगण को नियुक्ति मिल सकती है। आयोग को पद की अर्हता तय करने का अधिकार नहीं है।
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