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... 80 फीसदी जी सकते हैं सामान्य जीवन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 10 Aug 2015 01:03 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। त्रिशला फाउंडेशन की ओर से रविवार को संगठन के कर्नलगंज स्थित कार्यालय में आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर में सेरेब्रल पालिसी के शिकार बच्चों के उपचार के लिए विशेषज्ञों ने कई अहम जानकारियां दीं। फाउंडेशन के संयोजक डॉ. जितेंद्र कुमार जैन ने बताया कि सेरेब्रल पालिसी बच्चों में होेने वाली विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। इसकी चपेट में आने से चलने-फिरने, बोलने-सुनने में परेशानी एवं बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं होती हैं।
लगातार हो रहे चिकित्सकीय विकास की बदौलत अब इस बीमारी का काफी हद तक उपचार संभव हो गया है। अब सेरेब्रल पालिसी के शिकार 80 फीसदी बच्चों को उपचारित करके सामान्य जीवन जीने लायक बनाया जा सकता है। डॉ. जैन ने बीमारी के कारणों को भी बताया। कहा कि ऐसे बच्चों के हाथ एवं पैरों की हड्डियों का न बनना या छोटा रह जाना जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। सर्जरी के जरिए ऐसे बच्चों को सामान्य अवस्था में लाया जा सकता है। शिविर में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
बच्चों को मेडिकल कार्ड भी प्रदान किया गया है। उन्हें निरमाया हेल्थ कार्ड के बारे में जानकारी दी गई। कार्ड बनाने के लिए फार्म भरवाए गए। इस योजना के तहत ऐसे बच्चों को एक साल तक एक लाख रुपये का अनुदान भारत सरकार की ओर से प्रदान किया जाता है। शिविर में डॉ. विनय, डॉ. अमित, डॉ. डीसी, डॉ. संजय, डॉ. शशी, योगेश, डॉ. वेद, डॉ. राजकुमार, कमलेश, सत्येंद्र, शिवम, अच्युत, बालकृष्ण, वैभव ने बच्चों की जांच की।
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लगातार हो रहे चिकित्सकीय विकास की बदौलत अब इस बीमारी का काफी हद तक उपचार संभव हो गया है। अब सेरेब्रल पालिसी के शिकार 80 फीसदी बच्चों को उपचारित करके सामान्य जीवन जीने लायक बनाया जा सकता है। डॉ. जैन ने बीमारी के कारणों को भी बताया। कहा कि ऐसे बच्चों के हाथ एवं पैरों की हड्डियों का न बनना या छोटा रह जाना जैसी समस्याएं प्रमुख हैं। सर्जरी के जरिए ऐसे बच्चों को सामान्य अवस्था में लाया जा सकता है। शिविर में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
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बच्चों को मेडिकल कार्ड भी प्रदान किया गया है। उन्हें निरमाया हेल्थ कार्ड के बारे में जानकारी दी गई। कार्ड बनाने के लिए फार्म भरवाए गए। इस योजना के तहत ऐसे बच्चों को एक साल तक एक लाख रुपये का अनुदान भारत सरकार की ओर से प्रदान किया जाता है। शिविर में डॉ. विनय, डॉ. अमित, डॉ. डीसी, डॉ. संजय, डॉ. शशी, योगेश, डॉ. वेद, डॉ. राजकुमार, कमलेश, सत्येंद्र, शिवम, अच्युत, बालकृष्ण, वैभव ने बच्चों की जांच की।
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