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लोक सेवा आयोग के सचिव अदालत में तलब
Updated Tue, 28 Aug 2018 02:00 AM IST
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लोक सेवा आयोग के सचिव हाईकोर्ट में तलब
0 निचली अदालतों में जजों की कमी के मामले में मांगी भर्ती प्रक्रिया संबंधी जानकारी
0 दो वर्षों से लंबित 600 अदालतों के निर्माण का प्रस्ताव, मुख्य सचिव से जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। निचली अदालतों में जजों की कमी को गंभीरता से लेते हाईकोर्ट के तीन जजों की पूर्णपीठ ने लोक सेवा आयोग के सचिव को तलब किया है। उनसे कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी करने संबंधी जानकारी के साथ 12 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों और हलफनामा दाखिल करें। हाईकोर्ट ने जजों की नियुक्ति के लिए मई 2018 में ही आयोग और प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था, मगर अभी तक भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति का जिम्मा मांगा था, मगर सरकार ने हाईकोर्ट को यह जिम्मेदारी सौंपने से इंकार कर दिया है। पीसीएस-जे की परीक्षा फिलहाल लोक सेवा आयोग को ही करानी है। पूर्वपीठ का कहना था कि वर्तमान में अदालतों में सैकड़ों पद रिक्त हैं, जिससे न्याय व्यवस्था के संचालन में परेशानी हो रही है। राज्य सरकार ने दो वर्ष पूर्व 600 नई अदालतें स्वीकृति की थीं। इनके लिए जमीन उपलब्ध कराने, भवन बनाने आदि का काम अभी कागजों पर ही है। पूर्णपीठ ने इस पर भी मुख्य सचिव से पूरी योजना की जानकारी मांगी है। पूछा है कि कोर्ट फीस के रूप में सरकार को कितनी रकम मिल रही है और उसका कितना फीसदी अदालतों के विकास पर खर्च किया जा रहा है।
मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पूर्णपीठ मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ कहना था कि सरकार के साथ कई बार बैठकें हुईं और अनुरोध भी किया गया, मगर अभी तक अदालतों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। जजों के बैठने और आवास की दिक्कत है। 104 स्वीकृत ग्राम न्यायालयों में से सिर्फ चार ही जज कार्यरत हैं। अमेठी जिले में जिला जज के लिए कोर्ट और आवास अब तक नहीं बन सका है। संभल जिले में भी अदालत के लिए सिर्फ 50 एकड़ भूमि मिली है। हाईकोर्ट में नई बन रही 30 अदालतों का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। पूर्णपीठ कहना था कि जब तक न्यायपालिका मजबूत नहीं होगी, कानून- व्यवस्था के बेहतर होने का दावा नहीं किया जा सकता है। अगली सुनवाई पर वित्त विभाग और लोक निर्माण विभाग के सचिव को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
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0 निचली अदालतों में जजों की कमी के मामले में मांगी भर्ती प्रक्रिया संबंधी जानकारी
0 दो वर्षों से लंबित 600 अदालतों के निर्माण का प्रस्ताव, मुख्य सचिव से जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। निचली अदालतों में जजों की कमी को गंभीरता से लेते हाईकोर्ट के तीन जजों की पूर्णपीठ ने लोक सेवा आयोग के सचिव को तलब किया है। उनसे कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी करने संबंधी जानकारी के साथ 12 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों और हलफनामा दाखिल करें। हाईकोर्ट ने जजों की नियुक्ति के लिए मई 2018 में ही आयोग और प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था, मगर अभी तक भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया गया है।
हाईकोर्ट ने अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति का जिम्मा मांगा था, मगर सरकार ने हाईकोर्ट को यह जिम्मेदारी सौंपने से इंकार कर दिया है। पीसीएस-जे की परीक्षा फिलहाल लोक सेवा आयोग को ही करानी है। पूर्वपीठ का कहना था कि वर्तमान में अदालतों में सैकड़ों पद रिक्त हैं, जिससे न्याय व्यवस्था के संचालन में परेशानी हो रही है। राज्य सरकार ने दो वर्ष पूर्व 600 नई अदालतें स्वीकृति की थीं। इनके लिए जमीन उपलब्ध कराने, भवन बनाने आदि का काम अभी कागजों पर ही है। पूर्णपीठ ने इस पर भी मुख्य सचिव से पूरी योजना की जानकारी मांगी है। पूछा है कि कोर्ट फीस के रूप में सरकार को कितनी रकम मिल रही है और उसका कितना फीसदी अदालतों के विकास पर खर्च किया जा रहा है।
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मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले की अध्यक्षता में न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पूर्णपीठ मामले की सुनवाई कर रही है। पीठ कहना था कि सरकार के साथ कई बार बैठकें हुईं और अनुरोध भी किया गया, मगर अभी तक अदालतों के लिए जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। जजों के बैठने और आवास की दिक्कत है। 104 स्वीकृत ग्राम न्यायालयों में से सिर्फ चार ही जज कार्यरत हैं। अमेठी जिले में जिला जज के लिए कोर्ट और आवास अब तक नहीं बन सका है। संभल जिले में भी अदालत के लिए सिर्फ 50 एकड़ भूमि मिली है। हाईकोर्ट में नई बन रही 30 अदालतों का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ है। पूर्णपीठ कहना था कि जब तक न्यायपालिका मजबूत नहीं होगी, कानून- व्यवस्था के बेहतर होने का दावा नहीं किया जा सकता है। अगली सुनवाई पर वित्त विभाग और लोक निर्माण विभाग के सचिव को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
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