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मृत्यु पर मास्ता हो जाएगी विभागीय कार्रवाई
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:45 AM IST
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कर्मचारी की मृत्यु पर समाप्त हो जाएगी विभागीय कार्यवाही
0 रेलवे गैंगमैन के मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का आदेश
इलाहाबाद। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने कहा है कि किसी रेलवे कर्मचारी के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही उसकी मृत्यु होने की दशा में स्वत: समाप्त हो जाएगी। इस स्थिति में कर्मचारी पर की गई दंडात्मक कार्रवाई, अपीलीय आदेश आदि भी समाप्त माने जाएंगे। उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद के गैंगमैन शिवधारी के विधिक उत्तराधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकरण के प्रशासनिक सदस्य मुर्तजा अली ने दिवंगत कर्मचारी की सेवा समाप्त करने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया है।
रेलवे को निर्देश दिया है कि वह मृत कर्मचारी के सभी बकाया देयों और पेंशन आदि का भुगतान उसके विधिक उत्तराधिकारियों को करें। शिवधारी को अनाधिकृत रूप से सेवा से अनुपस्थित रहने के कारण आरोपपत्र दिया गया था, जिसका उसने लिखित जवाब दाखिल किया। इसके बाद उसे 29 जनवरी 1997 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ उसने अपील दाखिल की और अपील में आदेश को संशोधित करते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदल दिया गया। इस दौरान 30 जुलाई 1997 को उसकी मृत्यु हो गई। कई निर्णयों की नजीर और रेलवे बोर्ड के सर्कुलर का हवाला देते हुए कैट ने कहा कि यदि कर्मचारी की अपील या निगरानी लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसके विरुद्ध चल रही समस्त प्रकार की कार्यवाही स्वत: समाप्त मानी जाएगी।
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0 रेलवे गैंगमैन के मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण का आदेश
इलाहाबाद। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने कहा है कि किसी रेलवे कर्मचारी के खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही उसकी मृत्यु होने की दशा में स्वत: समाप्त हो जाएगी। इस स्थिति में कर्मचारी पर की गई दंडात्मक कार्रवाई, अपीलीय आदेश आदि भी समाप्त माने जाएंगे। उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद के गैंगमैन शिवधारी के विधिक उत्तराधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकरण के प्रशासनिक सदस्य मुर्तजा अली ने दिवंगत कर्मचारी की सेवा समाप्त करने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया है।
रेलवे को निर्देश दिया है कि वह मृत कर्मचारी के सभी बकाया देयों और पेंशन आदि का भुगतान उसके विधिक उत्तराधिकारियों को करें। शिवधारी को अनाधिकृत रूप से सेवा से अनुपस्थित रहने के कारण आरोपपत्र दिया गया था, जिसका उसने लिखित जवाब दाखिल किया। इसके बाद उसे 29 जनवरी 1997 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ उसने अपील दाखिल की और अपील में आदेश को संशोधित करते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति में बदल दिया गया। इस दौरान 30 जुलाई 1997 को उसकी मृत्यु हो गई। कई निर्णयों की नजीर और रेलवे बोर्ड के सर्कुलर का हवाला देते हुए कैट ने कहा कि यदि कर्मचारी की अपील या निगरानी लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसके विरुद्ध चल रही समस्त प्रकार की कार्यवाही स्वत: समाप्त मानी जाएगी।
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