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सिविल पुलिस से जीआरपी में तबादले को चुनौती

Tue, 04 Jul 2017 09:35 PM IST
Updated Tue, 04 Jul 2017 09:35 PM IST
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सिविल पुलिस से जीआरपी में तबादले को चुनौती
0 सैकड़ों पुलिस कर्मियों के स्थानंातरण पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। सिविल पुलिस से राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) में स्थानांतरित किए गए सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने स्थानांतरण आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार और पुलिस मुख्यालय से जवाब तलब किया है। आरोप है कि तबादले मनमाने तरीके से और पिक एंड चूज पॉलिसी के आधार पर किए गए हैं। हरिशंकर सहित प्रदेश भर के सैकड़ों पुलिसकर्मियों की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने सात जुलाई तक इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचीगण का पक्ष रख रहे अधिवक्ता विजय गौतम ने कोर्ट को बताया कि 21 जून को पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्मिक और पुलिस महानिदेशक ने अलग-अलग आदेश जारी कर हजारों पुलिसकर्मियों का सिविल पुलिस से जीआरपी में स्थानांतरण कर दिया। इसमें आरक्षी, मुख्य आरक्षी और उपनिरीक्षक शामिल हैं। तबादले परिक्षेत्रीय डीआईजी द्वारा नामित कर्मचारियों के ही किए गए हैं। इन सभी को तीन वर्ष के लिए जीआरपी में भेजा गया है। तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद वह वरिष्ठता क्रम के अनुसार पुन: सिविल पुलिस में आ जाएंगे।
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इलाहाबाद, वाराणसी, झांसी, मेरठ, गोरखपुर, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर आदि जिलों के पुलिस कर्मियों ने याचिका दाखिल कर कहा है कि जीआरपी में स्थानांतरण करते समय उनकी सहमति नहीं ली गई। उनका एक जिले में कार्यकाल भी पूरा नहीं हुआ है। स्थानांतरण पुलिस रेग्युलेशन के विपरीत और मनमाना है।
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अधिवक्ता विजय गौतम ने कोर्ट को अवगत कराया कि पुलिस महानिदेशक ने 14 नवंबर 2014 को सर्कुलर जारी कर निर्देश दिया है कि 47 वर्ष से अधिक आयु के पुलिसकर्मियों को जीआरपी में नहीं भेजा जाएगा। इसके अलावा वही पुलिसकर्मी भेजे जाएंगे जो जीआरपी में जाने के इच्छुक हैं। इस सर्कुलर का पालन नहीं किया गया है। कोर्ट ने सात जुलाई तक इस मामले में पुलिस विभाग को पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
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