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प्रयागराज में संगम पर लगेगी महर्षि भृगु की ५१ फीट ऊंची प्रतिमा
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51 feet high statue of Maharishi Bhrigu on Sangam at Prayagraj
रामद्वार से होगा प्रयागराज में प्रवेश, संगम पर महर्षि भृगु के दर्शन
क्रासर
त्रिवेणी तट पर टॉवर के बीच महर्षि भृगु की 51 फीट ऊंची प्रतिमा लगाने की पहल, प्रस्ताव पर गृहमंत्री-सीएम से वार्ता
अनूप ओझा
प्रयागराज। तीर्थनगरी प्रयाग की महिमा अब भगवान राम के साथ ऋषि-मुनियों की तपस्थली के रूप में विश्व पटल पर प्रदर्शित होगी। आने वाले समय में प्रयागराज में प्रवेश रामद्वार से होगा। रामद्वार बनाने के साथ ही संगम तट पर अब 51 फीट ऊंची महर्षि भृगु की प्रतिमा लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर बातचीत शुरू हो गई है। त्रिवेणी संगम की धारा के बीच टॉवर के जरिए महर्षि भृगु की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि संत-भक्त त्रिवेणी की धारा में पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही महर्षि की प्रतिमा का दर्शन कर सकें। कोशिश है कि हरिद्वार कुंभ से पहले इस प्रतिमा की स्थापना संगम पर कर दी जाए। इससे पहले कुंभ के दौरान महर्षि भरद्वाज की प्रतिमा स्थापित की गई थी।
यज्ञभूमि के रूप में विख्यात प्रयाग के संगम तट की छटा आने वाले समय में बदली नजर आएगी। कहा जाता है कि त्रेता में कभी भगवान राम ने इसी संगम तट पर अपने पिता राजा दशरथ की मुक्ति के लिए पिंडदान किया था। यहीं से भगवान राम शृंगवेरपुर होते हुए चित्रकूट पहुंचे थे। इसलिए प्रयागराज में रामद्वार बनाने का सुझाव केंद्र व प्रदेश सरकारों को दिया गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज ने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से वार्ता की है। रामद्वार के साथ महर्षि भृगु की 51 फीट ऊंची प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। महर्षि की प्रतिमा संगम तट पर लगाने के लिए टॉवर का सहारा लिया जाएगा। इसके बाद दुर्वासा और दक्षराज की भी प्रतिमाएं लगाने का सुझाव दिया गया है, ताकि प्रयागराज की आध्यात्मिक संस्कृति को विश्व समुदाय से परिचित कराया जा सके।
कोट
भगवान राम और ऋषियों -महर्षियों से ही प्रयागराज की पहचान जुड़ी हुई है। रामद्वार और महर्षि भृगु की प्रतिमा से इस शहर की आध्यात्मिक संस्कृति को नए रूप में प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा। गृहमंत्री अमित शाह ने इस योजना को साकार कराने का भरोसा दिलाया है। हरि गिरि, महामंत्री-अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद।
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क्रासर
त्रिवेणी तट पर टॉवर के बीच महर्षि भृगु की 51 फीट ऊंची प्रतिमा लगाने की पहल, प्रस्ताव पर गृहमंत्री-सीएम से वार्ता
अनूप ओझा
प्रयागराज। तीर्थनगरी प्रयाग की महिमा अब भगवान राम के साथ ऋषि-मुनियों की तपस्थली के रूप में विश्व पटल पर प्रदर्शित होगी। आने वाले समय में प्रयागराज में प्रवेश रामद्वार से होगा। रामद्वार बनाने के साथ ही संगम तट पर अब 51 फीट ऊंची महर्षि भृगु की प्रतिमा लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर बातचीत शुरू हो गई है। त्रिवेणी संगम की धारा के बीच टॉवर के जरिए महर्षि भृगु की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि संत-भक्त त्रिवेणी की धारा में पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही महर्षि की प्रतिमा का दर्शन कर सकें। कोशिश है कि हरिद्वार कुंभ से पहले इस प्रतिमा की स्थापना संगम पर कर दी जाए। इससे पहले कुंभ के दौरान महर्षि भरद्वाज की प्रतिमा स्थापित की गई थी।
यज्ञभूमि के रूप में विख्यात प्रयाग के संगम तट की छटा आने वाले समय में बदली नजर आएगी। कहा जाता है कि त्रेता में कभी भगवान राम ने इसी संगम तट पर अपने पिता राजा दशरथ की मुक्ति के लिए पिंडदान किया था। यहीं से भगवान राम शृंगवेरपुर होते हुए चित्रकूट पहुंचे थे। इसलिए प्रयागराज में रामद्वार बनाने का सुझाव केंद्र व प्रदेश सरकारों को दिया गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज ने इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से वार्ता की है। रामद्वार के साथ महर्षि भृगु की 51 फीट ऊंची प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। महर्षि की प्रतिमा संगम तट पर लगाने के लिए टॉवर का सहारा लिया जाएगा। इसके बाद दुर्वासा और दक्षराज की भी प्रतिमाएं लगाने का सुझाव दिया गया है, ताकि प्रयागराज की आध्यात्मिक संस्कृति को विश्व समुदाय से परिचित कराया जा सके।
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कोट
भगवान राम और ऋषियों -महर्षियों से ही प्रयागराज की पहचान जुड़ी हुई है। रामद्वार और महर्षि भृगु की प्रतिमा से इस शहर की आध्यात्मिक संस्कृति को नए रूप में प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा। गृहमंत्री अमित शाह ने इस योजना को साकार कराने का भरोसा दिलाया है। हरि गिरि, महामंत्री-अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद।
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