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44 लाख की लूट और हत्या का आरोपी बरी

Wed, 12 Feb 2020 01:00 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 12 Feb 2020 01:00 AM IST
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44 lakh acquitted of robbery and murder
44 lakh acquitted of robbery and murder - फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। आठ साल पहले मम्फोर्डगंज इलाके में एटीएम में डाले जाने वाले 44 लाख रुपये की लूट और दो गार्डों की हत्या का एकमात्र गिरफ्तार आरोपी अदालत से बरी हो गया। कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी कौशलेश तिवारी को लूट और हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। मामले में अभियोजन की ओर से पेश गवाहों की गवाही अदालत में टिकी नहीं और साक्ष्य इतने कमजोर थे कि गुनाह साबित नहीं कर सके।
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मुकदमे की सुनवाई कर रहे अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतीक उददीन ने अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद यह निर्णय सुनाया। अभियोजन की ओर से आरोप साबित करने के लिए 14 गवाह पेश गए। लेकिन किसी भी गवाह ने अभियुक्त की शिनाख्त नहीं की। अभियोजन के मुख्य गवाह पातंजलि दयासी ने कहा कि पुलिस वालों ने मेरा कोई बयान नहीं लिया था। इस घटना के संबंध में मैं कुछ नहीं जानता हूं। मैंने किसी कौशलेश तिवारी की फोटो की पहचान के बाबत कोई साक्ष्य नहीं दिया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अभियोजन के साक्ष्य से अभियुक्त पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ है। अभियुक्त ने अपने बयान में कहा था कि पुलिस ने फर्जी कार्रवाई करके अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए मुझे गलत फंसा दिया। आरोपी के कब्जे से लूटी गई रकम और हत्या में प्रयुक्त असलहे भी बरामद नहीं किए गए थे, जिस पर कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी कौशलेश तिवारी को दोषमुक्त कर दिया।
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दो गार्डों की हत्याकर लूटा गया था कैश
14 अक्तूबर 2011 को एचडीएफसी बैंक की सिविल लाइंस शाखा से शहर में स्थित विभिन्न एटीएम में कैश भरने के लिए रवाना हुई। वैन करेली निवासी रुपेंद्र सिंह चला रहा था, जबकि कस्टोडियन मुकेश यादव, सहायक कस्टोडियन संतोष कुमार मिश्र, सिक्योरिटी गार्ड सत्य प्रकाश द्विवेदी और भागीरथी वैन में बैठ थे। वैन में 74 लाख रुपये थे। सिविल लाइंस और जार्जटाउन के एटीएम में क्रमश: बीस लाख और 10 लाख रुपये कैश भरने के बाद वैन दिन में करीब सवा 12 बजे ममफोर्डगंज स्थित एटीएम पहुंची। कस्टोडियन मुकेश और संतोष 44 लाख रुपये भरा सूटकेस लेकर एटीएम के भीतर चले गए जबकि दोनों गार्ड बाहर ही थे। वैन चालक वैन के भीतर ही था।
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तभी दो बाइक पर सवार चार युवक पहुंचे। एक को छोड़कर सभी के चेहरे रुमाल से ढंके थे। युवकों ने बाइक रुकते ही गार्ड सत्य प्रकाश और भागरथी तिवारी तथा वैन चालक रुपेंद्र सिंह को गोली मार दी। तीनों गिर गए तो सभी एटीएम में घुस गए। एटीएम के भीतर मौजूद मुकेश और संतोष पर भी गोली चलाई तथा कैश से भरा सूटकेस उठाकर चले गए। जाते समय गार्डों की बंदूकें और राइफल भी उठा ले गए। सुरक्षा गार्ड और घायलों को बेली अस्पताल ले जाया गया। जहां डाक्टरों ने दोनो गार्डो सत्य प्रकाश और भागीरथी को मृत घोषित कर दिया और घायल रुपेन्द्र और संतोष मिश्र को उपचार के लिए एसआरएन भेज दिया था।
जांच के नाम पर हुई खानापूर्ति
44 लाख की लूट और दो गार्डों की हत्या में पुलिस ने जांच के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति की। यही वजह थी कि अदालत में अभियोजन की कहानी तार-तार हो गई। अपराध साबित करने लायक ने कोई साक्ष्य था और न ही कोई मजबूत गवाह अभियोजन पेश कर पाया। लिहाजा और लूट और हत्या करने वाले असली चेहरों को बेनकाब कर पाने में पुलिस नाकाम रही।
इन चश्मदीद गवाहों ने नहीं की पहचान
गवाह- मदन लाल, इसके सामने पुलिस ने घटना स्थल से बुलेट, कारतूस आदि बरामद किया था। स्थानीय दुकानदार है।गवाह ने कहा पुलिस ने दुकान से बुलाकर कागज पर दस्तखत करा लिए उसमें क्या लिखा था नहीं पता। अदालत में मौजूद अभियुक्त को पहचानने से इंकार किया। कहा पुलिस ने कोई पहचान नहीं कराई।
गवाह- रुपेंद्र सिंह- घायल गवाह वैन चालक ने कहा कि अचानक मेरी पीठ में गोली लगी थी। कु छ समझ पाता कि दूसरी गोली लग गई। सीट पर गिर गया। गोली मारने वालों को पहचान नहीं पाया।
गवाह-वादी मुकेश कुमार, इस गवाह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अपने बयान में कहा कि दो अभियुक्त एटीएम से बाहर थे और दो भीतर आए थे उनके चेहरे पर रुमाल बंधी थी।

गवाह- बबलू यादव, घटना के इस चश्मदीद गवाह ने कहा कि उसने किसी भी अभियुक्त को नहीं पहचाना है।
गवाह- राकेश कुमार केसरवानी, इस चश्मदीद गवाह ने भी कहा कि मेरी दुकान घटनास्थल के बगल है मगर मैं किसी को पहचान नहीं पाया।
गवाह- पातंजलि दयासी, मध्यप्रदेश शहडोह में सेंट्रल बैंक शाखा के प्रबंधक थे। इनकी बैंक में डकैती हुई थी। पुलिस ने जिन बैंकों में डकैती हुई थी वहां के रिकार्ड एकत्र किए। इस गवाह ने कहा कि उनकी बैंक में छह मई 2011 को 15 लाख की डकैती हुई थी। उस घटना में मैं किसी अभियुक्त को पहचान नहीं पाया था। यहां के मामले में पुलिस ने मुझसे कोई बयान नहीं लिया। न ही किसी अभियुक्त का फोटो दिखाया और न ही मैंने किसी की पहचान की।

44 lakh acquitted of robbery and murder

44 lakh acquitted of robbery and murder- फोटो : CITY DESK

44 lakh acquitted of robbery and murder

44 lakh acquitted of robbery and murder- फोटो : CITY DESK

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