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पीढब् ल्यूडी का खाता सीज करने की चेतावनी
Updated Tue, 26 Sep 2017 09:27 PM IST
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पीडब्ल्यूडी का खाता सीज करने की चेतावनी
0 हाईकोर्ट ने ठेकेदार को भुगतान न करने पर जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि लोक निर्माण विभाग का खाता क्यों न सीज कर दिया जाए। कोर्ट के आदेश के बावजूद ठेकेदार को भुगतान नहीं करने पर अदालत ने नाराजगी देते हुए छह अक्तूबर को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। आजमगढ़ के ठेकेदार प्रवीण सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची का कहना है कि वह आजमगढ़ लोकनिर्माण विभाग में सी ग्रेड का ठेकेदार है। 2005 में उसे सरहदा से भीमभर तक सड़क बनाने का ठेका मिला था। उसने समय रहते काम पूरा कर लिया। बिल के भुगतान हेतु कागजात विभाग के सामने पेश किए। विभाग ने आधे पैसे का भुगतान कर दिया मगर आधा रोक दिया। उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने भुगतान करने आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के पालन में अधीक्षण अभियंता ने याची का दावा स्वीकार करते हुए 45 हजार 273 रुपये के भुगतान का हकदार माना मगर कहा कि इसका भुगतान अनुभाग 13 के संयुक्त सचिव के निर्देश के बिना नहीं हो सकता है। याची ने दुबारा कोर्ट में याचिका दाखिल की। याची के अधिवक्ता राजीव सिंह का कहना था कि जब बिल के भुगतान का दावा स्वीकार कर लिया तो विभाग के बड़े अधिकारी भुगतान रोक नहीं सकते हैं। याची ने अपना पैसा लगाकर निर्माण पूरा किया है उसे भुगतान पाने का हक है। इस कोर्ट ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है।
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0 हाईकोर्ट ने ठेकेदार को भुगतान न करने पर जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि लोक निर्माण विभाग का खाता क्यों न सीज कर दिया जाए। कोर्ट के आदेश के बावजूद ठेकेदार को भुगतान नहीं करने पर अदालत ने नाराजगी देते हुए छह अक्तूबर को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। आजमगढ़ के ठेकेदार प्रवीण सिंह की याचिका पर न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची का कहना है कि वह आजमगढ़ लोकनिर्माण विभाग में सी ग्रेड का ठेकेदार है। 2005 में उसे सरहदा से भीमभर तक सड़क बनाने का ठेका मिला था। उसने समय रहते काम पूरा कर लिया। बिल के भुगतान हेतु कागजात विभाग के सामने पेश किए। विभाग ने आधे पैसे का भुगतान कर दिया मगर आधा रोक दिया। उसने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। कोर्ट ने भुगतान करने आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के पालन में अधीक्षण अभियंता ने याची का दावा स्वीकार करते हुए 45 हजार 273 रुपये के भुगतान का हकदार माना मगर कहा कि इसका भुगतान अनुभाग 13 के संयुक्त सचिव के निर्देश के बिना नहीं हो सकता है। याची ने दुबारा कोर्ट में याचिका दाखिल की। याची के अधिवक्ता राजीव सिंह का कहना था कि जब बिल के भुगतान का दावा स्वीकार कर लिया तो विभाग के बड़े अधिकारी भुगतान रोक नहीं सकते हैं। याची ने अपना पैसा लगाकर निर्माण पूरा किया है उसे भुगतान पाने का हक है। इस कोर्ट ने अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया है।
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