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राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन पर रोक
Updated Thu, 27 Jul 2017 07:54 PM IST
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राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन पर रोक
0 हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन पर रोक लगा दी है। समायोजन करने संबंधी 29 जून 2017 के शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने शासनादेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा है। शासनादेश के तहत राजकीय विद्यालयों में कार्यरत 686 शिक्षकों का समायोजन किया जाना था।
शैलेंद्र कुमार सिंह सहित 107 अध्यापकों ने याचिका दाखिल कर समायोजन को चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने सुनवाई की। प्रदेश सरकार ने एक नीति के तहत राजकीय इंटरमीडिएट कालेजों के सरप्लस शिक्षकों का जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक के तौर पर समायोजन प्रारंभ किया। याचीगण का कहना था कि उनकी नियुक्ति प्रवक्ता के पद पर हुई है। जूनियर हाईस्कूल में पढ़ाने का उन्होंने प्रशिक्षण नहीं लिया है। बाल मनोविज्ञान और छोटे बच्चों को पढ़ाने की तकनीक की जानकारी उनको नहीं है, इसलिए जूनियर हाईस्कूल में समायोजन उचित नहीं है। क्योंकि वह अध्यापन की निर्धारित योग्यता नहीं रखते हैं। कोर्ट ने शासनादेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए जवाब तलब किया है।
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0 हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के समायोजन पर रोक लगा दी है। समायोजन करने संबंधी 29 जून 2017 के शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने शासनादेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा परिषद से जवाब मांगा है। शासनादेश के तहत राजकीय विद्यालयों में कार्यरत 686 शिक्षकों का समायोजन किया जाना था।
शैलेंद्र कुमार सिंह सहित 107 अध्यापकों ने याचिका दाखिल कर समायोजन को चुनौती दी है। याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने सुनवाई की। प्रदेश सरकार ने एक नीति के तहत राजकीय इंटरमीडिएट कालेजों के सरप्लस शिक्षकों का जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक के तौर पर समायोजन प्रारंभ किया। याचीगण का कहना था कि उनकी नियुक्ति प्रवक्ता के पद पर हुई है। जूनियर हाईस्कूल में पढ़ाने का उन्होंने प्रशिक्षण नहीं लिया है। बाल मनोविज्ञान और छोटे बच्चों को पढ़ाने की तकनीक की जानकारी उनको नहीं है, इसलिए जूनियर हाईस्कूल में समायोजन उचित नहीं है। क्योंकि वह अध्यापन की निर्धारित योग्यता नहीं रखते हैं। कोर्ट ने शासनादेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए जवाब तलब किया है।
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