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Prayagraj News: मेजा राजकीय महाविद्यालय में 31 छात्र लेकिन शिक्षक एक भी नहीं
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ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को सस्ती व गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त हो सके, इसके लिए प्रदेश सरकार ने कई नए राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना की है। इन्हीं में से एक है मेजा का राजकीय महाविद्यालय गुनई गहरपुर। करोड़ों की लागत से बनाए गए इस महाविद्यालय की स्थापना के दो साल बाद तक कुल 31 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक ही नहीं है। महाविद्यालय सिर्फ चार कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।
राज्य सरकार ने सत्र 2023-24 में महज छह विद्यार्थियों के नामांकन के साथ इस महाविद्यालय की शुरुआत की थी और इसके संचालन की जिम्मेदारी प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय को सौंपी थी। राज्य विवि को अपने स्राेतों से इसे संघटक महाविद्यालय के तौर पर चलाना था। विश्वविद्यालय ने महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को पढ़ाने के लिए पीएचडी के कुछ छात्रों को भेज दिया।
जब तक शिक्षकों की नियुक्ति होती, तब तक राज्य सरकार ने महाविद्यालय का संचालन अपने स्तर से कराने का निर्णय ले लिया और शिक्षकों की नियुक्ति भी कर दी लेकिन कुछ दिन बाद ही सरकार ने यह निर्णय वापस ले लिया और राज्य विश्वविद्यालय को ही पूर्व की भांति इसका संचालन करते रहने के लिए कह दिया। अब राज्य विश्वविद्यालय भी इस महाविद्यालय को चलाने के लिए तैयार नहीं है।
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छात्रों की संख्या बढ़कर सत्र 2025-26 में 31 हो गई है लेकिन महाविद्यालय में कोई शिक्षक नहीं है। ज्यादातर छात्र महाविद्यालय नहीं आ रहे हैं और जो आते हैं, वे दिनभर खाली बैठे रहते हैं। कक्षाएं भी खाली पड़ी रहती हैं और परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है। महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्राें के सपनों पर पानी फिर गया है। हेमवती नंदन बहुगुणा पीजी कॉलेज नैनी की प्राचार्या मंजू लता को इस महाविद्यालय का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। वह भी कभी-कभार ही महाविद्यालय आती हैं।
निर्माण के एक माह बाद ही लीक होने लगी पानी की टंकी
राजकीय महाविद्यालय के परिसर में बनाई गई पानी की टंकी निर्माण पूरा होने के एक माह बाद ही लीक होने लगी। उसमें पानी रहता ही नहीं है जिससे कॉलेज में पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है। अब टंकी का कनेक्शन भी काट दिया गया है। स्थानीय लोगों ने तहसील प्रशासन से टंकी निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
पूरे महाविद्यालय में दो लिपिक, एक स्वीपर व माली
महाविद्यालय में चार कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इनमें से दो लिपिक निखिल मिश्रा व निलेश त्रिपाठी हैं। वहीं स्वीपर लक्ष्मीशंकर यादव और माली दीनानाथ यादव हैं। लिपिक निलेश त्रिपाठी ने बताया कि एक वर्ष पहले नामांकन के लिए गांवों में प्रचार-प्रसार किया गया था लेकिन विद्यार्थियों ने नामांकन कराना उचित नहीं समझा। उन्होंने बताया कि अभिभावक कहते हैं कि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं है तो बच्चों को भेजने का क्या फायदा।
विज्ञान संकाय की प्रयोगशाला के उपकरण फांक रहे धूल
राजकीय महाविद्यालय के विज्ञान संकाय में बनी प्रयोगशाला में रखे उपकरण धूल फांक रहे हैं। प्रयोगशाला में इस कदर धूल है कि कुर्सियां तक बैठने लायक नहीं हैं। कई उपकरण रखे-रखे खराब हो गए हैं। लिपिक निलेश त्रिपाठी का कहना है कि महाविद्यालय की स्थापना के दौरान ही प्रयोगशाला तैयार की गई थी लेकिन शिक्षक न होने के कारण उपकरणों का प्रयोग नहीं किया जा सका जिसकी वजह से यह खराब हो गए हैं।
शिक्षकों की नियुक्ति न होने से ग्रामीणों में भी नाराजगी
अंतरी अमिलिया के राकेश पांडेय का कहना है कि राजकीय महाविद्यालय की स्थापना के वक्त ग्रामीणों में उम्मीद की किरण जगी थी। लगा कि अब गांव के विद्यार्थियों को घर के पास ही अच्छी और सस्ती शिक्षा मिल सकेगी लेकिन करोड़ों रुपये की लागत से बनवाया गया यह महाविद्यालय अब किसी काम का नहीं रह गया है। शिक्षकों की नियुक्ति न होने से छात्र-छात्राओं ने प्रवेश ही नहीं लिया। मेजा से जिला पंचायत सदस्य देशराज सिंह का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति न होने से सरकार की मंशा पर पानी फिर गया।
बीए, बीएसी, बीकॉम की 540 सीटें
महाविद्यालय में बीए, बीएससी व बीकॉम की कुल 540 सीटें हैं। इनमें बीए की 180, एससी की 240 व कॉमर्स की 120 सीटें शामिल हैं। दो साल बाद भी 540 सीटों के मुकाबले केवल 31 छात्र ही इस महाविद्यालय में पढ़ रहे हैं।
बोले कुलपति
महाविद्यालय के संचालन को लेकर स्थापना के समय से ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार को पत्र भेजकर आग्रह किया गया है कि महाविद्यालय का संचालन सरकार अपने स्तर से कराए। - प्रो. अखिलेश कुमार सिंह, कुलपति, राज्य विश्वविद्यालय
बोले अफसर
मेजा का गुनई गहरपुर राजकीय कॉलेज राज्य विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालय के रूप में संचालित किया जा रहा है। शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी राज्य विश्वविद्यालय के पास थी। प्रदेश में 23 राजकीय महाविद्यालय राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। शासन स्तर पर जल्द ही बैठक होने वाली है जिसमें इनके बेहतर संचालन को लेकर कोई निर्णय लिया जा सकता है। - प्रो. बीएल शर्मा, सहायक निदेशक, उच्च शिक्षा निदेशालय
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राज्य सरकार ने सत्र 2023-24 में महज छह विद्यार्थियों के नामांकन के साथ इस महाविद्यालय की शुरुआत की थी और इसके संचालन की जिम्मेदारी प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय को सौंपी थी। राज्य विवि को अपने स्राेतों से इसे संघटक महाविद्यालय के तौर पर चलाना था। विश्वविद्यालय ने महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को पढ़ाने के लिए पीएचडी के कुछ छात्रों को भेज दिया।
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जब तक शिक्षकों की नियुक्ति होती, तब तक राज्य सरकार ने महाविद्यालय का संचालन अपने स्तर से कराने का निर्णय ले लिया और शिक्षकों की नियुक्ति भी कर दी लेकिन कुछ दिन बाद ही सरकार ने यह निर्णय वापस ले लिया और राज्य विश्वविद्यालय को ही पूर्व की भांति इसका संचालन करते रहने के लिए कह दिया। अब राज्य विश्वविद्यालय भी इस महाविद्यालय को चलाने के लिए तैयार नहीं है।
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छात्रों की संख्या बढ़कर सत्र 2025-26 में 31 हो गई है लेकिन महाविद्यालय में कोई शिक्षक नहीं है। ज्यादातर छात्र महाविद्यालय नहीं आ रहे हैं और जो आते हैं, वे दिनभर खाली बैठे रहते हैं। कक्षाएं भी खाली पड़ी रहती हैं और परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है। महाविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्राें के सपनों पर पानी फिर गया है। हेमवती नंदन बहुगुणा पीजी कॉलेज नैनी की प्राचार्या मंजू लता को इस महाविद्यालय का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। वह भी कभी-कभार ही महाविद्यालय आती हैं।
निर्माण के एक माह बाद ही लीक होने लगी पानी की टंकी
राजकीय महाविद्यालय के परिसर में बनाई गई पानी की टंकी निर्माण पूरा होने के एक माह बाद ही लीक होने लगी। उसमें पानी रहता ही नहीं है जिससे कॉलेज में पानी की आपूर्ति ठप पड़ी है। अब टंकी का कनेक्शन भी काट दिया गया है। स्थानीय लोगों ने तहसील प्रशासन से टंकी निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायत की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
पूरे महाविद्यालय में दो लिपिक, एक स्वीपर व माली
महाविद्यालय में चार कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इनमें से दो लिपिक निखिल मिश्रा व निलेश त्रिपाठी हैं। वहीं स्वीपर लक्ष्मीशंकर यादव और माली दीनानाथ यादव हैं। लिपिक निलेश त्रिपाठी ने बताया कि एक वर्ष पहले नामांकन के लिए गांवों में प्रचार-प्रसार किया गया था लेकिन विद्यार्थियों ने नामांकन कराना उचित नहीं समझा। उन्होंने बताया कि अभिभावक कहते हैं कि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं है तो बच्चों को भेजने का क्या फायदा।
विज्ञान संकाय की प्रयोगशाला के उपकरण फांक रहे धूल
राजकीय महाविद्यालय के विज्ञान संकाय में बनी प्रयोगशाला में रखे उपकरण धूल फांक रहे हैं। प्रयोगशाला में इस कदर धूल है कि कुर्सियां तक बैठने लायक नहीं हैं। कई उपकरण रखे-रखे खराब हो गए हैं। लिपिक निलेश त्रिपाठी का कहना है कि महाविद्यालय की स्थापना के दौरान ही प्रयोगशाला तैयार की गई थी लेकिन शिक्षक न होने के कारण उपकरणों का प्रयोग नहीं किया जा सका जिसकी वजह से यह खराब हो गए हैं।
शिक्षकों की नियुक्ति न होने से ग्रामीणों में भी नाराजगी
अंतरी अमिलिया के राकेश पांडेय का कहना है कि राजकीय महाविद्यालय की स्थापना के वक्त ग्रामीणों में उम्मीद की किरण जगी थी। लगा कि अब गांव के विद्यार्थियों को घर के पास ही अच्छी और सस्ती शिक्षा मिल सकेगी लेकिन करोड़ों रुपये की लागत से बनवाया गया यह महाविद्यालय अब किसी काम का नहीं रह गया है। शिक्षकों की नियुक्ति न होने से छात्र-छात्राओं ने प्रवेश ही नहीं लिया। मेजा से जिला पंचायत सदस्य देशराज सिंह का कहना है कि शिक्षकों की नियुक्ति न होने से सरकार की मंशा पर पानी फिर गया।
बीए, बीएसी, बीकॉम की 540 सीटें
महाविद्यालय में बीए, बीएससी व बीकॉम की कुल 540 सीटें हैं। इनमें बीए की 180, एससी की 240 व कॉमर्स की 120 सीटें शामिल हैं। दो साल बाद भी 540 सीटों के मुकाबले केवल 31 छात्र ही इस महाविद्यालय में पढ़ रहे हैं।
बोले कुलपति
महाविद्यालय के संचालन को लेकर स्थापना के समय से ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राज्य सरकार को पत्र भेजकर आग्रह किया गया है कि महाविद्यालय का संचालन सरकार अपने स्तर से कराए। - प्रो. अखिलेश कुमार सिंह, कुलपति, राज्य विश्वविद्यालय
बोले अफसर
मेजा का गुनई गहरपुर राजकीय कॉलेज राज्य विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालय के रूप में संचालित किया जा रहा है। शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी राज्य विश्वविद्यालय के पास थी। प्रदेश में 23 राजकीय महाविद्यालय राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। शासन स्तर पर जल्द ही बैठक होने वाली है जिसमें इनके बेहतर संचालन को लेकर कोई निर्णय लिया जा सकता है। - प्रो. बीएल शर्मा, सहायक निदेशक, उच्च शिक्षा निदेशालय