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Prayagraj News: दो तालाबों की 23 बीघा जमीन सरकारी दस्तावेज से गायब
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सोरांव तहसील के पुखीपुर गांव में दो तालाबों की तकरीबन 23 बीघा जमीन को सरकारी दस्तावेज के खेल करके दूसरे के नाम आवंटित कर दिया गया। मामला सामने आने पर डीएम ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित करते हुए 15 दिन में रिपोर्ट तलब कर ली है।
मुख्य राजस्व अधिकारी के समक्ष जिला शासकीय अधिवक्ता की ओर से प्रमाण सहित जब दस्तावेज प्रस्तुत किए गए तो पता चला कि एक तालाब की तकरीबन नौ बीघा और दूसरे तालाब की लगभग 14 बीघा जमीन को चक आवंटन करके तालाब का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया। चकबंदी के दस्तावेज की शुरुआती जांच में यह पाया गया कि इससे सरकार को काफी क्षति हुई है।
उप संचालक चकबंदी संजय पांडेय ने बुधवार को डीएम मनीष कुमार वर्मा के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए तो उन्होंने 1359 फसली अभिलेखों से लेकर वर्तमान अभिलेखाें में हुई तालाब भूमि की क्षति की गहन जांच, स्थलीय सत्यापन और इसके लिए जिम्मेदारी तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों का दायित्व निर्धारित करते हुए उनकी सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
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डीएम ने मामले की जांच के लिए उप जिलाधिकारी सोरांव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, तहसीलदार सोरांव, चकबंदी अधिकारी सोरांव और सहायक चकबंदी अधिकारी सोरांव को शामिल किया गया है। डीएम ने जांच कमेटी को निर्देश दिए हैं कि तालाब की भूमि पर वर्तमान में काबिज या आवंटित काश्तकाराें को चिह्नित किया जाए।
उन्होंने यह निर्देश भी दिए हैं कि फसली अभिलेखों के आधार पर भूखंडों को पुन: तालाब के खाते में दर्ज किए जाने के लिए नियमानुसार विधिक कार्यवाही कराई जाए। साथ ही संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए 15 दिनों के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत की जाएगी। जांच आख्या के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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मुख्य राजस्व अधिकारी के समक्ष जिला शासकीय अधिवक्ता की ओर से प्रमाण सहित जब दस्तावेज प्रस्तुत किए गए तो पता चला कि एक तालाब की तकरीबन नौ बीघा और दूसरे तालाब की लगभग 14 बीघा जमीन को चक आवंटन करके तालाब का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया। चकबंदी के दस्तावेज की शुरुआती जांच में यह पाया गया कि इससे सरकार को काफी क्षति हुई है।
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उप संचालक चकबंदी संजय पांडेय ने बुधवार को डीएम मनीष कुमार वर्मा के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए तो उन्होंने 1359 फसली अभिलेखों से लेकर वर्तमान अभिलेखाें में हुई तालाब भूमि की क्षति की गहन जांच, स्थलीय सत्यापन और इसके लिए जिम्मेदारी तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों का दायित्व निर्धारित करते हुए उनकी सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
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डीएम ने मामले की जांच के लिए उप जिलाधिकारी सोरांव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। इसमें बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी, तहसीलदार सोरांव, चकबंदी अधिकारी सोरांव और सहायक चकबंदी अधिकारी सोरांव को शामिल किया गया है। डीएम ने जांच कमेटी को निर्देश दिए हैं कि तालाब की भूमि पर वर्तमान में काबिज या आवंटित काश्तकाराें को चिह्नित किया जाए।
उन्होंने यह निर्देश भी दिए हैं कि फसली अभिलेखों के आधार पर भूखंडों को पुन: तालाब के खाते में दर्ज किए जाने के लिए नियमानुसार विधिक कार्यवाही कराई जाए। साथ ही संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए 15 दिनों के भीतर जांच आख्या प्रस्तुत की जाएगी। जांच आख्या के आधार पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।