{"_id":"5b997489867a552c9418a6cd","slug":"201536783497-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पायलट की मौत से नंदी केस पर क्या असर होगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पायलट की मौत से नंदी केस पर क्या असर होगा
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पायलट की मौत से क्या प्रभावित होगा नंदी केस
0 राजेश पायलट अदालत में कर चुका था जुर्म का इकबाल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। राजेश पायलट कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी पर हुए रिमोट बम से हमले की घटना का मुख्य अभियुक्त था। इस घटना को लेकर उसने अदालत के समक्ष अपने जुर्म का इकबाल कर लिया था। अदालत ने अभियुक्तों पर आरोप तय करते समय राजेश पायलट के उस जुर्म स्वीकारोक्ति वाले बयान का जिक्र भी किया है। अब जबकि पायलट की मृत्यु हो चुकी है, ऐसे में उसकी मौत से मुकदमे पर क्या प्रभाव पड़ेगा इस सवाल का जवाब अभी आना बाकी है।
आम तौर पर अभियुक्त द्वारा की गई जुर्म स्वीकारोक्ति उसके विरुद्ध एक साक्ष्य होती है। मगर पायलट के बयान का बाकी अभियुक्तों पर क्या असर रहेगा, इस पर अदालत को निर्णय लेना है। हालांकि जानकारों की राय इस सवाल पर भिन्न-भिन्न है। राजेश पायलट ने तत्कालीन स्पेशल जज गैंगस्टर के समक्ष मुकदमे का विचारण शुरू होते ही बयान दर्ज कराया था। नंदी हमला केस अभी साक्ष्य के स्तर पर है और इसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस मामले में विधायक विजय मिश्र और पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्र सहित 16 अभियुक्त हैं। राजेश पायलट भी मुख्य अभियुक्तों में एक था उस पर रिमोट बम प्लांट करने और विस्फोट करने का आरोप था।
अपनी बहस खुद करता था पायलट
इलाहाबाद। आम अभियुक्तों से अलग हटकर राजेश पायलट ने नंदी केस में कभी अपना वकील नहीं किया। वह मुकदमे की सारी बहस खुद ही करता था। यहां तक कि गवाहों से जिरह और प्रतिपरीक्षा भी अदालत की अनुमति लेकर खुद करता था। बताया जाता है कि राजेश पायलट को हिंदी और अंग्रेजी का बहुत अच्छा ज्ञान था तथा बहस में वह अंग्रेजी का भी बखूबी प्रयोग करता था। अदालत में दिए जाने वाले सभी प्रार्थनापत्रों को वह स्वयं लिखता था।
विज्ञापन
विज्ञापन
0 राजेश पायलट अदालत में कर चुका था जुर्म का इकबाल
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। राजेश पायलट कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी पर हुए रिमोट बम से हमले की घटना का मुख्य अभियुक्त था। इस घटना को लेकर उसने अदालत के समक्ष अपने जुर्म का इकबाल कर लिया था। अदालत ने अभियुक्तों पर आरोप तय करते समय राजेश पायलट के उस जुर्म स्वीकारोक्ति वाले बयान का जिक्र भी किया है। अब जबकि पायलट की मृत्यु हो चुकी है, ऐसे में उसकी मौत से मुकदमे पर क्या प्रभाव पड़ेगा इस सवाल का जवाब अभी आना बाकी है।
आम तौर पर अभियुक्त द्वारा की गई जुर्म स्वीकारोक्ति उसके विरुद्ध एक साक्ष्य होती है। मगर पायलट के बयान का बाकी अभियुक्तों पर क्या असर रहेगा, इस पर अदालत को निर्णय लेना है। हालांकि जानकारों की राय इस सवाल पर भिन्न-भिन्न है। राजेश पायलट ने तत्कालीन स्पेशल जज गैंगस्टर के समक्ष मुकदमे का विचारण शुरू होते ही बयान दर्ज कराया था। नंदी हमला केस अभी साक्ष्य के स्तर पर है और इसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस मामले में विधायक विजय मिश्र और पूर्व ब्लाक प्रमुख दिलीप मिश्र सहित 16 अभियुक्त हैं। राजेश पायलट भी मुख्य अभियुक्तों में एक था उस पर रिमोट बम प्लांट करने और विस्फोट करने का आरोप था।
विज्ञापन
अपनी बहस खुद करता था पायलट
इलाहाबाद। आम अभियुक्तों से अलग हटकर राजेश पायलट ने नंदी केस में कभी अपना वकील नहीं किया। वह मुकदमे की सारी बहस खुद ही करता था। यहां तक कि गवाहों से जिरह और प्रतिपरीक्षा भी अदालत की अनुमति लेकर खुद करता था। बताया जाता है कि राजेश पायलट को हिंदी और अंग्रेजी का बहुत अच्छा ज्ञान था तथा बहस में वह अंग्रेजी का भी बखूबी प्रयोग करता था। अदालत में दिए जाने वाले सभी प्रार्थनापत्रों को वह स्वयं लिखता था।
विज्ञापन