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प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपति के नुकसान वसूली पर रोक
Updated Sat, 08 Sep 2018 02:00 AM IST
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सरकारी संपत्ति के नुकसान की वसूली पर रोक
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने धरना प्रदर्शन के दौरान हुए सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान के मामले में वसूली कार्रवाई पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। आजमगढ़ के दयाराम चौहान की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता निर्विकल्प पांडेय का कहना था कि चार सितंबर 2017 को उसके बेटे का अपहरण हो गया। छह सितंबर को उसकी लाश बरामद हुई। अपहरण और हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई। बच्चे की मौत को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। जिसे लेकर एसपी ने तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजी और तीन लाख 94 हजार से अधिक के नुकसान का दावा किया गया। इस मामले में 11 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई। जिलाधिकारी ने 28 जुलाई 2018 को आदेश जारी करते हुए सभी लोगों से 35830 रुपये वसूल करने का नोटिस भेजा। इसके खिलाफ दाखिल याचिका में कहा गया कि वसूली की कार्यवाही शुरू करने से पूर्व याचीगण को उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। एकपक्षीय रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने कार्यवाही प्रारंभ कर दी। कोर्ट ने वसूली पर रोक लगाते हुए 14 सितंबर तक जवाब मांगा है।
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सरकारी संपत्ति के नुकसान की वसूली पर रोक
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने धरना प्रदर्शन के दौरान हुए सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान के मामले में वसूली कार्रवाई पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। आजमगढ़ के दयाराम चौहान की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ सुनवाई कर रही है।
याची के अधिवक्ता निर्विकल्प पांडेय का कहना था कि चार सितंबर 2017 को उसके बेटे का अपहरण हो गया। छह सितंबर को उसकी लाश बरामद हुई। अपहरण और हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई। बच्चे की मौत को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। जिसे लेकर एसपी ने तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजी और तीन लाख 94 हजार से अधिक के नुकसान का दावा किया गया। इस मामले में 11 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज की गई। जिलाधिकारी ने 28 जुलाई 2018 को आदेश जारी करते हुए सभी लोगों से 35830 रुपये वसूल करने का नोटिस भेजा। इसके खिलाफ दाखिल याचिका में कहा गया कि वसूली की कार्यवाही शुरू करने से पूर्व याचीगण को उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। एकपक्षीय रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने कार्यवाही प्रारंभ कर दी। कोर्ट ने वसूली पर रोक लगाते हुए 14 सितंबर तक जवाब मांगा है।
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