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कृषि ऋण माफी योजना में 20 करोड़ रुपये का घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 29 Jul 2016 01:11 AM IST
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नाबार्ड
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कृषि ऋण माफी योजना के क्रियान्वयन में करीब 20 करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायत पर हाईकोर्ट ने मामले की जांच नाबार्ड (नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चर एंड रूलर डेवलपमेंट) चेयरमैन को सौंप दी है। आदेश दिया है कि इस योजना के जानकार अधिकारियों से सभी खातों की जांच कराकर रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
घोटाले की शिकायत प्रथमा बैंक की पिपली दाऊद, धवार्सी, चुचेलाकला, जैटोली, सकतू नगला, नन्हेरा, मनौता, रेहरा, अलीपुर चोवला, गजरौला और चकनवाला शाखाओं में है। इसे लेकर मुरादाबाद के चंद्रकांत शर्मा ने जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने लोन खातों की जांच का निर्देश दिया है।
याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार की कृषि ऋण माफी योजना 2008 में घोषित की गई। इसकी नोडल एजेंसी नाबार्ड है। प्रथमा बैंक के अधिकारियों ने रिश्वत लेकर अपात्र लोगों को ऋण माफी योजना का लाभ पहुंचाया। योजना की शर्तों का खुले आम उल्लंघन किया गया। खंडपीठ का कहना था कि अदालत बैंकिंग और आर्थिक मामलों की विशेषज्ञ नहीं है इसलिए इसकी जांच विशेषज्ञ अधिकारियों से कराई जाए। याची का कहना है कि प्रथमा बैंक की 263 शाखाओं में से 170 में घोटाला किया गया है। योजना के तहत पांच एकड़ तक की खेती पर पूर्ण ऋण माफ करना था जबकि इससे अधिक की खेती पर 25 प्रतिशत की माफी दी जानी थी। यह योजना उन किसानों पर लागू थी जिन्होंने मार्च 1997 से मार्च 2007 के बीच लोन लिया था।
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घोटाले की शिकायत प्रथमा बैंक की पिपली दाऊद, धवार्सी, चुचेलाकला, जैटोली, सकतू नगला, नन्हेरा, मनौता, रेहरा, अलीपुर चोवला, गजरौला और चकनवाला शाखाओं में है। इसे लेकर मुरादाबाद के चंद्रकांत शर्मा ने जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने लोन खातों की जांच का निर्देश दिया है।
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याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार की कृषि ऋण माफी योजना 2008 में घोषित की गई। इसकी नोडल एजेंसी नाबार्ड है। प्रथमा बैंक के अधिकारियों ने रिश्वत लेकर अपात्र लोगों को ऋण माफी योजना का लाभ पहुंचाया। योजना की शर्तों का खुले आम उल्लंघन किया गया। खंडपीठ का कहना था कि अदालत बैंकिंग और आर्थिक मामलों की विशेषज्ञ नहीं है इसलिए इसकी जांच विशेषज्ञ अधिकारियों से कराई जाए। याची का कहना है कि प्रथमा बैंक की 263 शाखाओं में से 170 में घोटाला किया गया है। योजना के तहत पांच एकड़ तक की खेती पर पूर्ण ऋण माफ करना था जबकि इससे अधिक की खेती पर 25 प्रतिशत की माफी दी जानी थी। यह योजना उन किसानों पर लागू थी जिन्होंने मार्च 1997 से मार्च 2007 के बीच लोन लिया था।
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