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जेलों में बढ़ रही भीड़ पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
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जेलों में बढ़ रही भीड़ पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
0 पूछा क्यों नहीं बढ़ाई जा रही जेलों की संख्या, प्रमुख सचिव गृह से जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों को रखे जाने पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि नई जेलें क्यों नहीं बनाई जा रही हैं? 1950 के बाद से कितनी नई जेलें बनी हैं? मौजूदा समय में कुल कितनी जेलें हैं? और उनमें कितने लोग बंद हैं? कोर्ट ने जानना चाहा है कि आबादी बढ़ने के अनुपात में जेलें भी बढ़ाने की आवश्यकता है। क्या सरकार ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस मामले में 15 दिन में सरकार से योजना तलब की है।
सुशीला देवी और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए एजीए मुर्तजा अली ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश में 22 सेंट्रल जेलें हैं। इनमें क्षमता से कई गुना अधिक बंदी रखे जा रहे हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार सांसदों, विधायकों को बड़े-बड़े बंगले देती है। आवश्यकता से अधिक सरकारी वकील नियुक्त किए गए हैं। मगर कैदियों को जेलों की क्षमता के डेढ़ गुना अधिक संख्या में रखा गया है। कोर्ट ने कहा सरकार कैदियों की स्थिति को लेकर गंभीर नहीं है। इसकी वजह से बंदियों को जेल मैन्युअल के तहत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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जेलों में बढ़ रही भीड़ पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
0 पूछा क्यों नहीं बढ़ाई जा रही जेलों की संख्या, प्रमुख सचिव गृह से जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। प्रदेश की जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों को रखे जाने पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि नई जेलें क्यों नहीं बनाई जा रही हैं? 1950 के बाद से कितनी नई जेलें बनी हैं? मौजूदा समय में कुल कितनी जेलें हैं? और उनमें कितने लोग बंद हैं? कोर्ट ने जानना चाहा है कि आबादी बढ़ने के अनुपात में जेलें भी बढ़ाने की आवश्यकता है। क्या सरकार ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस मामले में 15 दिन में सरकार से योजना तलब की है।
सुशीला देवी और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए एजीए मुर्तजा अली ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश में 22 सेंट्रल जेलें हैं। इनमें क्षमता से कई गुना अधिक बंदी रखे जा रहे हैं। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि सरकार सांसदों, विधायकों को बड़े-बड़े बंगले देती है। आवश्यकता से अधिक सरकारी वकील नियुक्त किए गए हैं। मगर कैदियों को जेलों की क्षमता के डेढ़ गुना अधिक संख्या में रखा गया है। कोर्ट ने कहा सरकार कैदियों की स्थिति को लेकर गंभीर नहीं है। इसकी वजह से बंदियों को जेल मैन्युअल के तहत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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