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शिक्षक गायब, प्रभावित होने लगी पढ़ाई

Thu, 27 Jul 2017 08:22 PM IST
Updated Thu, 27 Jul 2017 08:22 PM IST
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शिक्षक गायब, प्रभावित होने लगी पढ़ाई
शिक्षक गायब, प्रभावित होने लगी पढ़ाई
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- परिषदीय विद्यालयों में दूसरे दिन ही दिखने लगा असर, ग्रामीण क्षेत्र में स्थिति ज्यादा बिगड़ी
- जिले में शिक्षा मित्र से सहायक अध्यापक बने 3233 शिक्षक, करीब छह सौ शिक्षा मित्र भी तैनात
- कई विद्यालय में दो या तीन शिक्षक, वहां शिक्षा मित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षक या शिक्षा मित्र हैं तैनात

अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
शिक्षा मित्र से सहायक अध्यापक बने ज्यादातर शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विद्यालयों में जाना बंद कर दिया है। इसकी वजह से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होने लगी है। इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों के अचानक विद्यालय जाना बंद कर देने से आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने का अंदेशा जताया जा रहा है, क्योंकि काफी विद्यालय ऐसे हैं, जहां यही शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक के रूप में तैनात थे। शहरी क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में स्थिति कुछ ठीक है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के काफी विद्यालयों में दो दिन से सन्नाटा पसरा हुआ है।
जिले के परिषदीय विद्यालयों में 13500 शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक बने 3233 शिक्षक भी शामिल हैं। इनके साथ तकरीबन सात सौ शिक्षा मित्र हैं, जो उस दौरान सहायक अध्यापक नहीं हो सके थे। इन शिक्षकों के वेतन पर हर माह करीब 63.50 करोड़ रुपये व्यय होते हैं। 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के पहले तक यह शिक्षक विद्यालयों में विद्यार्थियों को पढ़ाने जा रहे थे, लेकिन बुधवार और उसके बाद बृहस्पतिवार को ये शिक्षक विद्यालय नहीं गए। ग्रामीण क्षेत्र के फाफामऊ, सोरांव, हंडिया, करछना, मेजा, फूलपुर आदि में काफी विद्यालय ऐसे हैं जहां दो या तीन शिक्षक हैं और वहां या तो शिक्षा मित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षक हैं या शिक्षा मित्र। ऐसे में उनके न आने के कारण विद्यालय बंद हो गए हैं।
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्रामीण इलाकों से बच्चों को विद्यालय तक लाने के लिए काफी मशक्कत होती है। शिक्षकों को घर-घर भेजा जाता है। वहां अभिभावकों को विद्यालय में भोजन, यूनीफॉर्म, किताबें आदि मुफ्त मिलने वाली सुविधाओं के बारे में बताया जाता है। इसके बाद कहीं बच्चों की संख्या बढ़ती है। इस बीच शिक्षकों के न आने से विद्यालयों में बच्चों की संख्या कम होना तय है। विद्यालयों में पठन-पाठन आगे कैसे चलेगा, बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर इस बारे में कुछ भी नहीं बोलना चाहते।
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