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गैर राज्य के अभ्यर्थियों को भी आरक्षधणण का लाभ दें
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गैर राज्य के अभ्यर्थियों को अभियंता भर्ती में आरक्षण दे आयोग
0 सिंचाई विभाग में कनिष्ठ अभियंता भर्ती का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया है कि सिंचाई विभाग की 2015 की कनिष्ठ अभियंता भर्ती में गैर राज्यों के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दे। कोर्ट ने आयोग के सचिव को छह सप्ताह में इस आदेश का पालन करने के लिए कहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में पहले ही आदेश पारित कर चुका है। आयोग ने पालन नहीं किया तो अवमानना याचिका दाखिल की गई। बिहार और उत्तराखंड आदि राज्यों के अभ्यर्थियों वर्षा सैनी और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने सुनवाई की।
कोर्ट ने याचीगण से कहा है कि यदि इसके बाद भी आदेश का पालन नहीं होता है तो वह दुबारा अवमानना याचिका दाखिल कर सकते हैं। आयोग की कनिष्ठ अभियंता भर्ती में याचीगण सफल हुए। मगर उनको दूसरा राज्य का होने के कारण आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश के अनुसार सिर्फ उत्तर प्रदेश में निवास करने वाले अभ्यर्थियों को ही आरक्षण का लाभ दिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने शासनादेश के इस प्रावधान को रद्द कर दिया तथा गैर राज्यों के अभ्यर्थियों को भी आरक्षण का लाभ देने का निर्देश दिया। इस आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई।
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0 सिंचाई विभाग में कनिष्ठ अभियंता भर्ती का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया है कि सिंचाई विभाग की 2015 की कनिष्ठ अभियंता भर्ती में गैर राज्यों के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दे। कोर्ट ने आयोग के सचिव को छह सप्ताह में इस आदेश का पालन करने के लिए कहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में पहले ही आदेश पारित कर चुका है। आयोग ने पालन नहीं किया तो अवमानना याचिका दाखिल की गई। बिहार और उत्तराखंड आदि राज्यों के अभ्यर्थियों वर्षा सैनी और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने सुनवाई की।
कोर्ट ने याचीगण से कहा है कि यदि इसके बाद भी आदेश का पालन नहीं होता है तो वह दुबारा अवमानना याचिका दाखिल कर सकते हैं। आयोग की कनिष्ठ अभियंता भर्ती में याचीगण सफल हुए। मगर उनको दूसरा राज्य का होने के कारण आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के शासनादेश के अनुसार सिर्फ उत्तर प्रदेश में निवास करने वाले अभ्यर्थियों को ही आरक्षण का लाभ दिया गया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने शासनादेश के इस प्रावधान को रद्द कर दिया तथा गैर राज्यों के अभ्यर्थियों को भी आरक्षण का लाभ देने का निर्देश दिया। इस आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई।
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