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हाईकोर्ट के आदेश पर अधिवक्ता ने सोशल मीडिया पर दी प्रतिगिया
Updated Fri, 13 Jul 2018 10:49 PM IST
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चीफ जस्टिस के आदेश पर अधिवक्ता ने सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रिया
0 केके रॉय ने फेसबुक पर लिखा ‘कोई अदालत सच बोलने से नहीं रोक सकती’
इलाहाबाद। हाईकोर्ट के अधिवक्ता केके रॉय का एक फेसबुक पोस्ट इन दिनों चर्चा में है। इस पोस्ट में उन्होंने हाईकोर्ट के एक आदेश का जिक्र करते हुए तीखी टिप्पणियां की हैं। आम तौर ऐसा नहीं होता है जब अदालत के खुद के बारे में किसी आदेश पर कोई सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दे। अमूमन अधिवक्ता अपने बारे में हुए किसी आदेश पर सार्वजनिक मंच पर टिप्पणी नहीं करते हैं। मगर अधिवक्ता कमल कृष्ण रॉय (केके रॉय) ने चीफ जस्टिस के आदेश पर सोशल मीडिया पर खुल कर प्रतिक्रिया दी है। विधि छात्रों की एक जनहित याचिका पर के के रॉय को हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर हाजिर होने का निर्देश दिया है। इसकी प्रतिक्रिया में उन्होंने अपनी फेस बुक पोस्ट जो कुछ कहा है उसके कुछ अंश उन्हीं के शब्दों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।
के के राय हाजिर हों .
देश के विधिवेत्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की कमिटी ने प्रतिभा शाली युवाओ को वकालत की तरफ आकर्षित करने के लिये पंच वर्षीय कोर्स बनाया ।
इसमे पाँचो साल में आठ से दस जगह इंटर्नशिप करनी पड़ती है।
जज के साथ, लॉ फर्म में, मेडिएशन सेंटर, आदि।
शुरू में पहली साल मानवाधिकार ट्रेनिग जिसमे पीड़ित तक जाना, रिपोर्ट बनाना, जनहित याचिका तैयार करना और हाई कोर्ट में बहस करना ।
पिछले बारह साल से करीब एक हजार लॉ स्टूडेंट्स मेरे साथ ह्यूमन राइट्स लीगल नेटवर्क में काम कर चुके हैं।
कारपोरेट नौकरी की तरफ झुके इन छात्रों को वकालत की तरफ ले आना और कुछ को सामाजिक वकालत की तरफ ले जाना भी मेरा लक्ष्य है ।
पिछले 6 चीफ जस्टिस ने इन छात्रों की तारीफ की है, जस्टिस रफत आलम, जस्टिस गोखले, जस्टिस रेबेलो, जस्टिस शिव कीर्ति सिंह, जस्टिस डॉ डी वाई चंद्रचूड।
माननीय न्यायमूर्ति गण ने अपने निर्णय में इनकी मेहनत की प्रशंसा की है।
एक वरिष्ठ मा0 न्यायमूर्ति ने अपने आदेश में लिखा कि इन्ही जैसे छात्रों को पाकर ए पी जे अब्दुल कलाम में इंडिया 20 20 में भारत को महाशक्ति होने की घोषणा की।
इस बार कुल बीस यूनिवर्सिटी और संस्थानों के करीब 69 छात्रों ने तेजाब हमले पर, एफसीआई गोदाम में खुले में रखे गरीबो के गेहूं का बारिश में सड़ना,
प्राइमरी स्कूल की दुर्दशा पर, औरतों को नँगा घुमाने पर, इलाहाबाद में पेड़ कटाई पर, शहर को प्लास्टिक फ्री करने पर, पुलिस हिरासत में मौत पर, बरेली में नदी के जहरीले पानी से बगल के गांवों में फैले खतरनाक बीमारी, मृत्यु पर जनहित याचिकाएं की है।
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जन हित याचिका दरअसल कोर्ट्स की ही देन है।
पीआईएल हमेशा ही राज्य के खिलाफ ही होती है ।
मैं हाज़िर होऊंगा और बेखौफ अपनी बात कहूँगा ।
कोई अदालत मुझे सच बोलने से रोक नही सकती ।
(पोस्ट के कुछ विवादित अंश को हटाया गया है)
यह था मामला
दस जुलाई को शिद्रा अहमद और 11 अन्य छात्रों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कोरांव में काले हिरणों के संरक्षण का मामला उठाया था। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने विधि प्रथम वर्ष के छात्रों द्वारा बार-बार जनहित याचिकाएं दाखिल करने पर सवाल उठाया और पूछा कि उनका गाइड कौन है। छात्रों ने बताया कि अधिवक्ता केके रॉय ने उनको जनहित याचिका दाखिल करने के लिए प्रेरित किया है। इस कोर्ट ने पूछा कि केके रॉय इसी कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं तोे फिर याचिका पर बहस करने क्यों नहीं आते। अगली तारीख सात अगस्त को छात्रों से केके रॉय के साथ आने का आदेश दिया है।
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चीफ जस्टिस के आदेश पर अधिवक्ता ने सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रिया
0 केके रॉय ने फेसबुक पर लिखा ‘कोई अदालत सच बोलने से नहीं रोक सकती’
इलाहाबाद। हाईकोर्ट के अधिवक्ता केके रॉय का एक फेसबुक पोस्ट इन दिनों चर्चा में है। इस पोस्ट में उन्होंने हाईकोर्ट के एक आदेश का जिक्र करते हुए तीखी टिप्पणियां की हैं। आम तौर ऐसा नहीं होता है जब अदालत के खुद के बारे में किसी आदेश पर कोई सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दे। अमूमन अधिवक्ता अपने बारे में हुए किसी आदेश पर सार्वजनिक मंच पर टिप्पणी नहीं करते हैं। मगर अधिवक्ता कमल कृष्ण रॉय (केके रॉय) ने चीफ जस्टिस के आदेश पर सोशल मीडिया पर खुल कर प्रतिक्रिया दी है। विधि छात्रों की एक जनहित याचिका पर के के रॉय को हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर हाजिर होने का निर्देश दिया है। इसकी प्रतिक्रिया में उन्होंने अपनी फेस बुक पोस्ट जो कुछ कहा है उसके कुछ अंश उन्हीं के शब्दों में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।
के के राय हाजिर हों .
देश के विधिवेत्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की कमिटी ने प्रतिभा शाली युवाओ को वकालत की तरफ आकर्षित करने के लिये पंच वर्षीय कोर्स बनाया ।
इसमे पाँचो साल में आठ से दस जगह इंटर्नशिप करनी पड़ती है।
जज के साथ, लॉ फर्म में, मेडिएशन सेंटर, आदि।
शुरू में पहली साल मानवाधिकार ट्रेनिग जिसमे पीड़ित तक जाना, रिपोर्ट बनाना, जनहित याचिका तैयार करना और हाई कोर्ट में बहस करना ।
पिछले बारह साल से करीब एक हजार लॉ स्टूडेंट्स मेरे साथ ह्यूमन राइट्स लीगल नेटवर्क में काम कर चुके हैं।
कारपोरेट नौकरी की तरफ झुके इन छात्रों को वकालत की तरफ ले आना और कुछ को सामाजिक वकालत की तरफ ले जाना भी मेरा लक्ष्य है ।
पिछले 6 चीफ जस्टिस ने इन छात्रों की तारीफ की है, जस्टिस रफत आलम, जस्टिस गोखले, जस्टिस रेबेलो, जस्टिस शिव कीर्ति सिंह, जस्टिस डॉ डी वाई चंद्रचूड।
माननीय न्यायमूर्ति गण ने अपने निर्णय में इनकी मेहनत की प्रशंसा की है।
एक वरिष्ठ मा0 न्यायमूर्ति ने अपने आदेश में लिखा कि इन्ही जैसे छात्रों को पाकर ए पी जे अब्दुल कलाम में इंडिया 20 20 में भारत को महाशक्ति होने की घोषणा की।
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इस बार कुल बीस यूनिवर्सिटी और संस्थानों के करीब 69 छात्रों ने तेजाब हमले पर, एफसीआई गोदाम में खुले में रखे गरीबो के गेहूं का बारिश में सड़ना,
प्राइमरी स्कूल की दुर्दशा पर, औरतों को नँगा घुमाने पर, इलाहाबाद में पेड़ कटाई पर, शहर को प्लास्टिक फ्री करने पर, पुलिस हिरासत में मौत पर, बरेली में नदी के जहरीले पानी से बगल के गांवों में फैले खतरनाक बीमारी, मृत्यु पर जनहित याचिकाएं की है।
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पीआईएल हमेशा ही राज्य के खिलाफ ही होती है ।
मैं हाज़िर होऊंगा और बेखौफ अपनी बात कहूँगा ।
कोई अदालत मुझे सच बोलने से रोक नही सकती ।
(पोस्ट के कुछ विवादित अंश को हटाया गया है)
यह था मामला
दस जुलाई को शिद्रा अहमद और 11 अन्य छात्रों ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर कोरांव में काले हिरणों के संरक्षण का मामला उठाया था। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने विधि प्रथम वर्ष के छात्रों द्वारा बार-बार जनहित याचिकाएं दाखिल करने पर सवाल उठाया और पूछा कि उनका गाइड कौन है। छात्रों ने बताया कि अधिवक्ता केके रॉय ने उनको जनहित याचिका दाखिल करने के लिए प्रेरित किया है। इस कोर्ट ने पूछा कि केके रॉय इसी कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं तोे फिर याचिका पर बहस करने क्यों नहीं आते। अगली तारीख सात अगस्त को छात्रों से केके रॉय के साथ आने का आदेश दिया है।