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कर्मचारी को परेशान करने वाले अफसर पर 50 हजार हर्जाना
Updated Sat, 04 Nov 2017 01:07 AM IST
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कर्मचारी को परेशान करने वाले अफसर पर 50 हजार हर्जाना
0 दूर संचार विभाग के पीड़ित कर्मचारी को समस्त लाभ देने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
दूर संचार विभाग इलाहाबाद के कर्मचारी को बेवजह परेशान करने और उसे फर्जी आरोपों में फंसाने के मामले में हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी पर 50 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारी को नोशनल प्रमोशन (मानद प्रोन्नति) और इंक्रीमेंट सहित सेवानिवृत्ति संबंधी सभी परिलाभ सात प्रतिशत की वार्षिक दर से भुगतान करने का निर्देश दिया है। कर्मचारी एन. राम की याचिका पर न्यायमूर्ति भारती सप्रू और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की पीठ ने यह आदेश दिया।
याची दूर संचार विभाग में अभियंता के पद तैनात था। उसका कहना है कि 1996 में याची अपने गृह नगर हजारीबाग गया था, जिसका उसने विभाग में एक एलटीसी बिल प्रस्तुत किया। लेखाधिकारी द्वारा बिल नहीं पास करने पर उसने उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी। इसी रंजिश में संबंधित अधिकारी ने उस पर फर्जी बिल दाखिल करने का आरोप लगाते हुए जांच बैठा दी। जांच में उसे दोषी करार देते हुए उसके इंक्रीमेंट और प्रमोशन रोक दिए गए। याची 2004 में रिटायर हो गया। उसने विभागीय फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और अपीलीय कोर्ट में चुनौती दी, मगर दोनों जगह से उसकी याचिकाएं खारिज हो गईं।
हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत का फैसला रद्द करते हुए कहा कि याची को जिन साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया गया है, वह साक्ष्य कानून में ग्राह्य ही नहीं है। उसे बेवजह परेशान किया गया इसलिए वह फरवरी 1998 से सीनियर सब डिविजनल इंजीनियर और 2002 से डिविजनल इंजीनियर के पद पर मानद प्रोन्नति पाने का हकदार है। उसके वेतन में पड़ने वाले अंतर का भुगतान उसी तिथि से सात प्रतिशत ब्याज के साथ दी जाए।
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0 दूर संचार विभाग के पीड़ित कर्मचारी को समस्त लाभ देने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
दूर संचार विभाग इलाहाबाद के कर्मचारी को बेवजह परेशान करने और उसे फर्जी आरोपों में फंसाने के मामले में हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारी पर 50 हजार रुपये हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारी को नोशनल प्रमोशन (मानद प्रोन्नति) और इंक्रीमेंट सहित सेवानिवृत्ति संबंधी सभी परिलाभ सात प्रतिशत की वार्षिक दर से भुगतान करने का निर्देश दिया है। कर्मचारी एन. राम की याचिका पर न्यायमूर्ति भारती सप्रू और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की पीठ ने यह आदेश दिया।
याची दूर संचार विभाग में अभियंता के पद तैनात था। उसका कहना है कि 1996 में याची अपने गृह नगर हजारीबाग गया था, जिसका उसने विभाग में एक एलटीसी बिल प्रस्तुत किया। लेखाधिकारी द्वारा बिल नहीं पास करने पर उसने उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी। इसी रंजिश में संबंधित अधिकारी ने उस पर फर्जी बिल दाखिल करने का आरोप लगाते हुए जांच बैठा दी। जांच में उसे दोषी करार देते हुए उसके इंक्रीमेंट और प्रमोशन रोक दिए गए। याची 2004 में रिटायर हो गया। उसने विभागीय फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण और अपीलीय कोर्ट में चुनौती दी, मगर दोनों जगह से उसकी याचिकाएं खारिज हो गईं।
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हाईकोर्ट ने अपीलीय अदालत का फैसला रद्द करते हुए कहा कि याची को जिन साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया गया है, वह साक्ष्य कानून में ग्राह्य ही नहीं है। उसे बेवजह परेशान किया गया इसलिए वह फरवरी 1998 से सीनियर सब डिविजनल इंजीनियर और 2002 से डिविजनल इंजीनियर के पद पर मानद प्रोन्नति पाने का हकदार है। उसके वेतन में पड़ने वाले अंतर का भुगतान उसी तिथि से सात प्रतिशत ब्याज के साथ दी जाए।
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