{"_id":"5b71e96642c7925da26517c9","slug":"121534191974-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिछड़े जिलों में कार्यरत शिक्षिकाओं को अंतरजनदीय तबादले का हक नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिछड़े जिलों में कार्यरत शिक्षिकाओं को अंतरजनदीय तबादले का हक नहीं
Updated Tue, 14 Aug 2018 01:56 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछड़े जिलों की शिक्षिकाओं को अंतरजनपदीय तबादले का हक नहीं
0 हाईकोर्ट ने सैकड़ों याचिकाएं एक साथ सुनवाई के बाद खारिज कीं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने अति पिछडे़ जिलों में कार्यरत शिक्षिकाओं को भी अंतरजनपदीय तबादले का लाभ देने की मांग नामंजूर कर दी है। कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार की गाइड लाइन को सही करार देते हुए सैकड़ों याचिकाएं खारिज कर दी हैं। याचिकाओं में कहा गया था अन्य जिलों में कार्यरत शिक्षिकाओं की तरह ही पिछड़े जिलों में कार्यरत शिक्षिकाओं को भी अंतरजनपदीय तबादले की अनुमति दी जाए। ऐसा न करना उनके साथ भेदभाव होगा।
रूचि और सैकड़ों अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने सुनवाई की। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार अति पिछड़े जिलों सिद्धार्थ नगर, श्रावस्ती, बहराइच, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, चित्रकूट और बलरामपुर में कोई भी अध्यापक अंतरजनपदीय तबादले की मांग कर सकता है, मगर यहां कार्यरत शिक्षकों को बाहर के जिले में तबादले की अनुमति नहीं है। ऐसा इसलिए है कि इन जिलों में अध्यापकों की कमी है और अनिवार्य शिक्षा का कानून के तहत इनमें तबादला लेने की छूट दी गई है। सरकार ने इन आठ जिलों को अति पिछड़ा घोषित किया है। इसलिए इन जिलों में कार्यरत शिक्षक को बोर्ड की गाइड लाइन के अनुसार तबादले की मांग करने का अधिकार है। याचीगण को अंतरजनदीय तबादले की मांग का विधिक अधिकार नहीं है।
विज्ञापन
0 हाईकोर्ट ने सैकड़ों याचिकाएं एक साथ सुनवाई के बाद खारिज कीं
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने अति पिछडे़ जिलों में कार्यरत शिक्षिकाओं को भी अंतरजनपदीय तबादले का लाभ देने की मांग नामंजूर कर दी है। कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार की गाइड लाइन को सही करार देते हुए सैकड़ों याचिकाएं खारिज कर दी हैं। याचिकाओं में कहा गया था अन्य जिलों में कार्यरत शिक्षिकाओं की तरह ही पिछड़े जिलों में कार्यरत शिक्षिकाओं को भी अंतरजनपदीय तबादले की अनुमति दी जाए। ऐसा न करना उनके साथ भेदभाव होगा।
रूचि और सैकड़ों अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने सुनवाई की। सरकार की गाइड लाइन के अनुसार अति पिछड़े जिलों सिद्धार्थ नगर, श्रावस्ती, बहराइच, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, चित्रकूट और बलरामपुर में कोई भी अध्यापक अंतरजनपदीय तबादले की मांग कर सकता है, मगर यहां कार्यरत शिक्षकों को बाहर के जिले में तबादले की अनुमति नहीं है। ऐसा इसलिए है कि इन जिलों में अध्यापकों की कमी है और अनिवार्य शिक्षा का कानून के तहत इनमें तबादला लेने की छूट दी गई है। सरकार ने इन आठ जिलों को अति पिछड़ा घोषित किया है। इसलिए इन जिलों में कार्यरत शिक्षक को बोर्ड की गाइड लाइन के अनुसार तबादले की मांग करने का अधिकार है। याचीगण को अंतरजनदीय तबादले की मांग का विधिक अधिकार नहीं है।
विज्ञापन