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मिर्गी लाइलाज नहीं, आज मनाएंगे पर्पल डे
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मिर्गी लाइलाज नहीं, आज मनाएंगे पर्पल डे
0 विशेषज्ञों ने लिया जागरूकता का संकल्प
प्रयागराज। मिर्गी पीड़ितों का इलाज संभव है। विशेषज्ञों की सलाह पर किए जा रहे उपचार के प्रभावी लक्षण दिखते हैं। दवाएं बंद हो सकती हैं। जरा सी सावधानी बरतने वाले स्वस्थ रह सकते हैं। मिर्गी पीड़ितों की पहचान, जांच और प्रबंधन संग उपचार के लिए 26 मार्च को ‘मिर्गी पर्पल डे’के रूप में मनाया जाएगा। विशेषज्ञों ने इस दिन लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया गया है।
यह जानकारी कमला नेहरू अस्पताल में कार्यरत न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना ओझा ने दी। सोमवार को इलाहाबाद न्यूज रिपोर्टर्स क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि मिर्गी रोग से पीड़ितों, उनके परिवारीजनों और जनसामान्य को जागरूक करने के उद्देश्य से ‘मिर्गी पर्पल डे’ को राष्ट्रीय सशक्तिकरण दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन गुलाबी रंग के कपड़े पहनकर लोगों को इस रोग से बचाव और उपचार की जानकारी दी जाएगी।
डॉ. अर्चना ने बताया कि मिर्गी रोगियों के मामलों में लोग चिकित्सक के पास जाने से कतराते हैं। बदनामी के डर से पीड़ितों का मर्ज बढ़ता जाता है। उन्होंने बताया कि रोग के कारणों की जानकारी बहुत जरूरी है। इलाज बहुत आसान है। इसमें सबसे अधिक वह व्यक्ति प्रभावित होता है जिसे दौरे आते हैं। कतिपय कारणों से मरीज उन अस्पतालों तक संकोच में नहीं पहुंच पाता जहां, नि:शुल्क उपचार और दवा की व्यवस्था होती है। आंकड़ों के मुताबिक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज न कराने वालों की संख्या अधिक है।
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0 विशेषज्ञों ने लिया जागरूकता का संकल्प
प्रयागराज। मिर्गी पीड़ितों का इलाज संभव है। विशेषज्ञों की सलाह पर किए जा रहे उपचार के प्रभावी लक्षण दिखते हैं। दवाएं बंद हो सकती हैं। जरा सी सावधानी बरतने वाले स्वस्थ रह सकते हैं। मिर्गी पीड़ितों की पहचान, जांच और प्रबंधन संग उपचार के लिए 26 मार्च को ‘मिर्गी पर्पल डे’के रूप में मनाया जाएगा। विशेषज्ञों ने इस दिन लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया गया है।
यह जानकारी कमला नेहरू अस्पताल में कार्यरत न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना ओझा ने दी। सोमवार को इलाहाबाद न्यूज रिपोर्टर्स क्लब में पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने बताया कि मिर्गी रोग से पीड़ितों, उनके परिवारीजनों और जनसामान्य को जागरूक करने के उद्देश्य से ‘मिर्गी पर्पल डे’ को राष्ट्रीय सशक्तिकरण दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन गुलाबी रंग के कपड़े पहनकर लोगों को इस रोग से बचाव और उपचार की जानकारी दी जाएगी।
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डॉ. अर्चना ने बताया कि मिर्गी रोगियों के मामलों में लोग चिकित्सक के पास जाने से कतराते हैं। बदनामी के डर से पीड़ितों का मर्ज बढ़ता जाता है। उन्होंने बताया कि रोग के कारणों की जानकारी बहुत जरूरी है। इलाज बहुत आसान है। इसमें सबसे अधिक वह व्यक्ति प्रभावित होता है जिसे दौरे आते हैं। कतिपय कारणों से मरीज उन अस्पतालों तक संकोच में नहीं पहुंच पाता जहां, नि:शुल्क उपचार और दवा की व्यवस्था होती है। आंकड़ों के मुताबिक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज न कराने वालों की संख्या अधिक है।
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