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पुरानी पेंशन मामले में जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत

Wed, 27 Feb 2019 08:42 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 27 Feb 2019 08:42 PM IST
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पुरानी पेंशन मामले में जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह की मोहलत
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पुरानी पेंशन मामले में तीन सप्ताह में जवाब देने का निर्देश
0 राज्य कर्मचारियों ने दो दिन का वेतन शहीदों को देने का हलफनामा दिया
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई 27 मार्च को होगी। कर्मचारी यूनियन राजकीय मुद्रणालय प्रयागराज के नेताओं की तरफ से हलफनामा दाखिल कर दो दिन का वेतन पुलवामा पीड़ितों के सहायतार्थ भेजे जाने का आश्वासन दिया। कर्मचारियों ने स्वत: प्रेरित जनहित याचिका में पक्षकार बनाने की अर्जी दी है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ कर रही है। इससे पहले कोर्ट ने हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाते हुए हड़ताली कर्मचारियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया था। कर्मचारी नेताओं से कोर्ट ने पूछा था कि क्या वह हड़ताल के दो दिनों का वेतन पुलवामा शहीदों के परिवारों को देने के लिए तैयार हैं। इसके जवाब में कर्मचारियों की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि वह वेतन देने को तैयार हैं। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता टीपी सिंह और राजवेंद्र सिंह ने कर्मचारी नेताओं की तरफ से पक्ष रखा। राज्य सरकार की तरफ से याचिका पर जवाब दाखिल करने का समय मांगा गया। जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए तीन सप्ताह का और समय दिया है।
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नई पेंशन योजना के विरोध और पुरानी पेंशन लागू करने की मांग में कर्मचारियों की हड़ताल से राजकीय मुद्रणालय में दो दिन तक कोई काम नहीं हुआ। इससे हाईकोर्ट के मुकदमों की सूची कॉज लिस्ट न छपने के कारण न्यायिक कार्य में बाधा आई। इस पर कोर्ट ने जनहित याचिका कायम कर कर्मचारी हड़ताल को अवैध करार दिया। कर्मचारियों ने हाईकोर्ट के सख्त रुख को देखते हुए हड़ताल खत्म कर दी।
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कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि कर्मचारियों की सहमति बगैर पुरानी पेंशन बंद कर नई पेंशन कैसे लागू की है। कर्मचारियों के वेतन का पैसा शेयर मार्केट में कैसे लगाया गया है। शेयर डूबने पर कर्मचारियों को न्यूनतम पेंशन क्यों तय नहीं की जा सकती। नई स्कीम अच्छी है तो नेताओं और अधिकारियों पर भी क्यों नही लागू करते। सरकार का कहना था केंद्र की योजना राज्य ने लागू की है। वह बदलाव नही कर सकती। कोर्ट ने पूछा कि जब बाध्यकारी नहीं था तो सरकार ने क्यों स्वीकार किया। कोर्ट के बजाए क्या सरकार को कर्मचारियों से बात कर विवाद नहीं सुलझा सकती। मामले की सुनवाई 27 मार्च को होगी।
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