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एमिकस क्यूरी की नई सूची बनानेिकि निर्देश
Updated Tue, 20 Nov 2018 10:16 PM IST
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एमिकस क्यूरी की नई सूची बनाने का निर्देश
0 हाईकोर्ट ने आपराधिक मुकदमों के लिए अनुभवी वकीलों को न्याय मित्र बनाने का निर्देश दिया
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने महानिबंधक हाईकोर्ट को आपराधिक मुकदमों की प्रभावी पैरवी के लिए अनुभवी वकीलों को न्यायमित्र की सूची में शामिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दो सप्ताह में नई सूची बनाई जाए और इसमें आपराधिक मुकदमों के जानकार अनुभवी वकीलों को शामिल किया जाए। मौजूद एमिकस क्यूरी की सूची में आपराधिक मामलों के जानकार वकीलों की कमी है।
अवधेश कुमार दुबे की जेल अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश की खंडपीठ ने दिया। याची फतेहगढ़ जेल में बंद है। उस पर दुराचार और हत्या का आरोप है, जिसमें उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। याची ने जेल से ही अपील दाखिल की है। उसका पक्ष रखने के लिए कोर्ट ने न्यायमित्र नियुक्ति किया है। अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने महसूस किया है कि न्यायमित्रों की सूची में आपराधिक मामलों के जानकार अनुभवी वकीलों की कमी है। कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता अर्चना सिंह को न्यायमित्र नियुक्त किया है। इसी क्रम में अदालत ने न्यायमित्रों की नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि ऐसे मामलों में जहां जेल में बंद अभियुक्त की पैरवी करने वाला कोई नहीं है और वह स्वयं अपना अधिवक्ता नियुक्त करने में सक्षम नहीं है वहां अदालत के निर्देश पर न्यायमित्र नियुक्त किया जाता है जो अभियुक्त की ओर से मुकदमे की पैरवी करते हैं। हाईकोर्ट में ऐसे अधिवक्ताओं की सूची रहती है जिनको न्यायमित्र नियुक्त किया जाता है।
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एमिकस क्यूरी की नई सूची बनाने का निर्देश
0 हाईकोर्ट ने आपराधिक मुकदमों के लिए अनुभवी वकीलों को न्याय मित्र बनाने का निर्देश दिया
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने महानिबंधक हाईकोर्ट को आपराधिक मुकदमों की प्रभावी पैरवी के लिए अनुभवी वकीलों को न्यायमित्र की सूची में शामिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दो सप्ताह में नई सूची बनाई जाए और इसमें आपराधिक मुकदमों के जानकार अनुभवी वकीलों को शामिल किया जाए। मौजूद एमिकस क्यूरी की सूची में आपराधिक मामलों के जानकार वकीलों की कमी है।
अवधेश कुमार दुबे की जेल अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति ओमप्रकाश की खंडपीठ ने दिया। याची फतेहगढ़ जेल में बंद है। उस पर दुराचार और हत्या का आरोप है, जिसमें उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। याची ने जेल से ही अपील दाखिल की है। उसका पक्ष रखने के लिए कोर्ट ने न्यायमित्र नियुक्ति किया है। अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने महसूस किया है कि न्यायमित्रों की सूची में आपराधिक मामलों के जानकार अनुभवी वकीलों की कमी है। कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता अर्चना सिंह को न्यायमित्र नियुक्त किया है। इसी क्रम में अदालत ने न्यायमित्रों की नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया है।
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बता दें कि ऐसे मामलों में जहां जेल में बंद अभियुक्त की पैरवी करने वाला कोई नहीं है और वह स्वयं अपना अधिवक्ता नियुक्त करने में सक्षम नहीं है वहां अदालत के निर्देश पर न्यायमित्र नियुक्त किया जाता है जो अभियुक्त की ओर से मुकदमे की पैरवी करते हैं। हाईकोर्ट में ऐसे अधिवक्ताओं की सूची रहती है जिनको न्यायमित्र नियुक्त किया जाता है।
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