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धूल से घुट रहा दम, बढ़े मरीज
Updated Sat, 27 Oct 2018 02:02 AM IST
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धूल से घुट रहा दम, बढ़े मरीज
0 खोदी गईं सड़कों से उड़ती धूल पड़ रही सेहत पर भारी, फेफड़ा रोगियों की संख्या हुई डेढ़ गुना
0 सीओपीडी के मरीजों की भरमार, टीबी के पुराने रोगी हो रहे दमा का शिकार, पल्मोनरी वार्ड फुल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। शहर में धूल से लोगों का दम घुट रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में फेफड़ा रोगियों की संख्या डेढ़ गुनी बढ़ गई है। सड़कों पर धूल के गुबार से शहरी फेफड़े की बीमारी सीओपीडी (क्रॉनिक आप्सटैक्टिव लंग डिजीज) का शिकार हो रहे हैं। हालात इस कदर बेकाबू हैं कि फेफड़े की टीबी के पुराने रोगी दमा के शिकार हो रहे हैं। साफ है कि धूल शहरियों की सेहत पर भारी पड़ रही है।
स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के पल्मोनरी विभाग की ओपीडी में औसतन मरीजों की संख्या 100 के करीब होती थी। वर्तमान में यह संख्या हर दिन 140 से 150 के बीच पहुंच रही है। दो महीने में 7334 मरीजों में 3000 से अधिक मरीज नए और सीओपीडी से प्रभावित पाए गए। विभागाध्यक्ष समेत अन्य विशेषज्ञ मरीजों की सांस फूलने और लगातार खांसी की शिकायत से हैरत में हैं।
क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं
मेडिकल कॉलेज के पल्मोनरी विभाग के विशेषज्ञ बताते हैं कि सीओपीडी पीड़ितों में धूल के प्रभाव से क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और धूम्रपान (स्मोकिंग) करने वाले मरीजों में (इंफाइसीमा) होते हैं। इनमें वर्तमान में धूल से फेफड़े की बीमारी पालने वाले ज्यादा हैं। सांस फूलती है या खांसी आती है तो जान लें कि आप पर धूल का कुप्रभाव पड़ चुका है। यह संकेत खतरनाक हैं।
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लंबे समय तक सांस फूले या लगातार खांसी आए तो तुरंत जांच कराएं, निश्चित रूप से पीड़ित धूल से प्रभावित और सीओपीडी से पीड़ित है। ये लक्षण शरीर के अन्य हिस्सों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। ओपीडी में मरीजों की संख्या तो बढ़ी ही है, वार्ड भी फुल है।
- डॉ. तारिक महमूद, विभागाध्यक्ष फेफड़ा रोग विभाग एसआरएन अस्पताल
0 धूल का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। कई मामले ऐसे सामने आए हैं कि शुरूआती दौर की लापरवाही के कारण मरीजों को लंबा इलाज कराना पड़ रहा है। खांसी आने या सांस फूलने की शिकायत पर तुरंत जांच जरूरी है।
- डॉ. आशुतोष गुप्ता, फेफड़ा एवं छाती रोग विशेषज्ञ, तकनीकी सचिव एएमए
उखड़ी सड़कों पर नहीं हो रहा पानी का छिड़काव
शहर की उखड़ी सड़कों पर दिन हो रात, धूल के गुबार लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हैं। हर तरफ मिट्टी, गिट्टी के लगे ढेर और ढुलाई के कारण धूल का प्रभाव लोगों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। कहीं धूल का प्रकोप कम करने के लिए पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। नियमत: इस स्थिति में पानी का छिड़काव किए जाने का प्रावधान है, जिसके प्रति कार्यदायी संस्थाओं के अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं।
धूल प्रभावित ये इलाके बने डेंजर जोन
शहर के रामबाग, साउथमलाका, हीवेट रोड, लीडर रोड, नूरू ल्ला रोड, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज, लूकरगंज, राजरूपपुर, मुंडेरा, राजापुर, अल्लापुर, शिवकुटी, एमएनएनआईटी, अल्लापुर, सोहबतियाबाग, अलोपीबाग, दारागंज, बैरहना, सीएमपी क्रॉसिंग, महात्मा गांधी मार्ग, स्टैनली रोड आदि।
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0 खोदी गईं सड़कों से उड़ती धूल पड़ रही सेहत पर भारी, फेफड़ा रोगियों की संख्या हुई डेढ़ गुना
0 सीओपीडी के मरीजों की भरमार, टीबी के पुराने रोगी हो रहे दमा का शिकार, पल्मोनरी वार्ड फुल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। शहर में धूल से लोगों का दम घुट रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों की ओपीडी में फेफड़ा रोगियों की संख्या डेढ़ गुनी बढ़ गई है। सड़कों पर धूल के गुबार से शहरी फेफड़े की बीमारी सीओपीडी (क्रॉनिक आप्सटैक्टिव लंग डिजीज) का शिकार हो रहे हैं। हालात इस कदर बेकाबू हैं कि फेफड़े की टीबी के पुराने रोगी दमा के शिकार हो रहे हैं। साफ है कि धूल शहरियों की सेहत पर भारी पड़ रही है।
स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के पल्मोनरी विभाग की ओपीडी में औसतन मरीजों की संख्या 100 के करीब होती थी। वर्तमान में यह संख्या हर दिन 140 से 150 के बीच पहुंच रही है। दो महीने में 7334 मरीजों में 3000 से अधिक मरीज नए और सीओपीडी से प्रभावित पाए गए। विभागाध्यक्ष समेत अन्य विशेषज्ञ मरीजों की सांस फूलने और लगातार खांसी की शिकायत से हैरत में हैं।
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क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस से पीड़ित हैं
मेडिकल कॉलेज के पल्मोनरी विभाग के विशेषज्ञ बताते हैं कि सीओपीडी पीड़ितों में धूल के प्रभाव से क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और धूम्रपान (स्मोकिंग) करने वाले मरीजों में (इंफाइसीमा) होते हैं। इनमें वर्तमान में धूल से फेफड़े की बीमारी पालने वाले ज्यादा हैं। सांस फूलती है या खांसी आती है तो जान लें कि आप पर धूल का कुप्रभाव पड़ चुका है। यह संकेत खतरनाक हैं।
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लंबे समय तक सांस फूले या लगातार खांसी आए तो तुरंत जांच कराएं, निश्चित रूप से पीड़ित धूल से प्रभावित और सीओपीडी से पीड़ित है। ये लक्षण शरीर के अन्य हिस्सों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। ओपीडी में मरीजों की संख्या तो बढ़ी ही है, वार्ड भी फुल है।
- डॉ. तारिक महमूद, विभागाध्यक्ष फेफड़ा रोग विभाग एसआरएन अस्पताल
0 धूल का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। कई मामले ऐसे सामने आए हैं कि शुरूआती दौर की लापरवाही के कारण मरीजों को लंबा इलाज कराना पड़ रहा है। खांसी आने या सांस फूलने की शिकायत पर तुरंत जांच जरूरी है।
- डॉ. आशुतोष गुप्ता, फेफड़ा एवं छाती रोग विशेषज्ञ, तकनीकी सचिव एएमए
उखड़ी सड़कों पर नहीं हो रहा पानी का छिड़काव
शहर की उखड़ी सड़कों पर दिन हो रात, धूल के गुबार लोगों के लिए परेशानी का कारण बने हैं। हर तरफ मिट्टी, गिट्टी के लगे ढेर और ढुलाई के कारण धूल का प्रभाव लोगों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। कहीं धूल का प्रकोप कम करने के लिए पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। नियमत: इस स्थिति में पानी का छिड़काव किए जाने का प्रावधान है, जिसके प्रति कार्यदायी संस्थाओं के अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं।
धूल प्रभावित ये इलाके बने डेंजर जोन
शहर के रामबाग, साउथमलाका, हीवेट रोड, लीडर रोड, नूरू ल्ला रोड, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज, लूकरगंज, राजरूपपुर, मुंडेरा, राजापुर, अल्लापुर, शिवकुटी, एमएनएनआईटी, अल्लापुर, सोहबतियाबाग, अलोपीबाग, दारागंज, बैरहना, सीएमपी क्रॉसिंग, महात्मा गांधी मार्ग, स्टैनली रोड आदि।