फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   मुक्त विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह से संबंधित खबरें

मुक्त विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह से संबंधित खबरें

Tue, 07 Nov 2017 08:58 PM IST
Updated Tue, 07 Nov 2017 08:58 PM IST
विज्ञापन
मुक्त विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह से संबंधित खबरें
रोज पढ़ाई, फिर एक घंटा चरखा कताई
विज्ञापन

0 मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में की गई घोषणा
0 15 हजार शिक्षार्थियों को उपाधि, 17 को मिला स्वर्ण पदक
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षार्थियों के लिए प्रतिदिन पढ़ाई के साथ एक घंटा चरखा की कताई अनिवार्य कर दी गई है। शिक्षा को समाज से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय ने एक चरखा लैब भी स्थापित किया है। यह घोषणा मंगलवार को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में की गई। इस दौरान 15 हजार शिक्षार्थियों को उपाधि प्राप्त की गई। साथ ही अपने विषयों में टॉपर रहे शिक्षार्थियों को 17 स्वर्ण पदक दिए गए। इससे पूर्व विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बाबा साहेब भोसले, संविधान विशेषज्ञ सुभाष सी कश्यप और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का उद्घाटन किया। मुख्य न्यायाधीश ने दीक्षांत भाषण दिया।
समारोह के दौरान सत्र दिसंबर 2016 और जून 2017 की परीक्षा में उत्तीर्ण 7800 छात्रों और 7200 छात्राओं को उपाधि दी गई। स्नातक वर्ग में 3409 पुरुष एवं 2437 महिला शिक्षार्थी, परास्नातक कार्यक्रम में 2629 पुरुष एवं 3773 महिला शिक्षार्थी, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा में 251 पुरुष एवं 122 महिला शिक्षार्थी, डिप्लोमा में 40 पुरुष एवं 83 महिला शिक्षार्थी, प्रमाणपत्र कार्यक्रम में 1406 पुरुष एवं 981 महिला शिक्षार्थी और पीएचडी में 17 पुरुष एवं 13 महिला शिक्षार्थी शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न विद्या शाखाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने कर सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियो को 17 स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। मेडल राज्यपाल ने प्रदान किए। पीएचडी करने वाले 30 छात्रों को दीक्षांत समारोह में शोध उपाधि प्रदान की गई।
विज्ञापन

कुलाधिपति (चांसलर) स्वर्ण पदक अंबेडकर नगर की छात्रा शिखा पांडेय को दिया गया। शिखा ने एमए संस्कृत की परीक्षा दिसंबर-2016 एवं जून-2017 में प्रथम प्रयास एवं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और समस्त विद्या शाखाओं की स्नातक एवं स्नातकोत्तर परीक्षाओं में उत्तीर्ण सभी शिक्षार्थियों में सर्वाधिक 82.56 अंक प्राप्त किए। इस मौके पर न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय, न्यायमूर्ति सुधीर नारायण, डॉ. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद, कमिश्नर आशीष गोयल, डीएम सुहास एलवाई आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. रामजी मिश्र ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

00
पाठ्यक्रम में शामिल होगी राज्यपाल की पुस्तक
- मुक्त विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रम में राज्यपाल की रचित पुस्तक ‘रचैवेति-चरैवेति’ को शामिल करेगा। यह घोषणा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एमपी दुबे ने की। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी अपलोड करा दिया गया है। इस पुरस्तक को एमए संस्कृत समेत सेमेस्टर सिस्टम में अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाएगा।
00
उपाधि के साथ भेजा जाएगा अतिथियों का उद्बोधन
- मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से 15 हजार शिक्षार्थियों को उपाधि उनके घर भेजी जाएगी। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने कुलपति से कहा कि सभी अतिथियों का उद्बोधन भी लिखित रूप से उपाधि के साथ शिक्षार्थियों तक पहुंचाया जाए ताकि जो इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, उन्हें भी इसका लाभ मिल सके।

तीन विभूतियों को मिली एलएलडी की उपाधि
- समारोह में मुख्य न्यायाधीश दिलीप बाबा साहेब भोसले, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और संविधान विशेषज्ञ एवं पद्म भूषण डॉ. सुभाष सी कश्यप को विश्वविद्यालय की ओर से एलएलडी की मानद उपाधि से विभूषित किया गया। हालांकि कार्यों में व्यस्तता के कारण न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूढ़ कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। राज्यपाल राम नाईक ने घोषणा कि वह और कुलपति प्रो. एमपी दुबे स्वयं 15 दिनों के भीतर दिल्ली जाएंगे और न्यायूमर्ति डीवाई चंद्रचूड़ को अपने हाथों से एलएलडी की उपाधि प्रदान करेंगे।
000
इनको मिले स्वर्ण पदक
परास्नातक शिक्षार्थी-शिखा पांडेय (एमए संस्कृत), सौरभ बोस (एमए समाजशास्त्र), स्वप्निल मिश्र (एमकॉम), अनुराग मिश्र (एमसीए), शिखा श्रीवास्तव (एमए शिक्षाशास्त्र) एवं शैलवी (एमएससी जैव रसायन)।
स्नातक शिक्षार्थी- सुरभि कनौजिया (बीएलआईएस), अजीत सिंह कुशवाहा (बीए), प्रगति सचदेवा (बीकॉम), पूजा यादव (बीएसए), दीपा यादव (बीएससी)।
दानदाता स्वर्ण पदक- स्वेच्छा तिवारी (एमबीए), क्षमा (बीए), कंचन यादव (राजनीति विज्ञान), सुधीर कुमार (प्रो. एमपी दुबे, कुलपति पर्यावरण/गांधी चिंतन एवं शांति अध्ययन उत्कृष्टता स्वर्ण पदक), निशांत सरन अवस्थी (प्रो. एमपी दुबे, कुलपति दिव्यांग मेधा स्वर्ण पदक)।
----------------------------------

बोले अतिथि
00
शॉर्टकट नहीं, क ठिन परिश्रम से मिलेगी सफलता: राज्यपाल
- राज्यपाल राम नाईक ने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों से कहा कि भविष्य में कड़ी स्पर्धा के लिए तैयार रहें। किसी तरह का शॉर्टकट न अपनाएं, क्योंकि सफलता केवल कठिन परिश्रम से ही मिलती है। उन्होंने इस बात पर खुशी जाहिर की कि उपाधि प्राप्त करने वालों में तकरीबन आधी संख्या महिला शिक्षार्थियों की है। राज्यपाल ने बताया कि 1954 में जब उन्होंने बीकॉम किया था तो क्लास में 150 विद्यार्थियों में केवल चार महिला विद्यार्थी थीं। महिलाएं अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं। देश बदल रहा है। महिला सेना में आ चुकी हैं और दो माह पहले ही रक्षा मंत्रालय की कमान एक महिला को सौंप दी गई। ये तमाम उदाहरण साबित करते हैं कि बेटियों को मौका मिले तो उन्हें आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता।
00
जीवन भी क्रिकेट का मैदान है: मुख्य न्यायाधीश
- दीक्षांत भाषण देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बाबा साहेब भोसले ने कहा कि जीवन भी क्रिकेट का मैदान है। फर्क इतना है कि असली मैदान पर एक बार क्लीन बोर्ड हुए तो मैदान पर दोबारा लौटने का मौका नहीं मिलता। अगर मैच में दूसरी इनिंग है तो एक मौका और मिलता है लेकिन जीवन के मैदान पर कई मौके मिलते हैं। यहां पीछे स्टम्प नहीं होता और न ही क्लीन बोर्ड होने का खतरा। डटकर बल्लेबाजी करें और मौका मिलते ही चौका-छक्का मार दें। शिक्षार्थियों से कहा कि सिर्फ सरकारी नौकरी को लक्ष्य न बनाएं, जीवन में कभी हताश न हों और परिस्थितियों से डटकर लड़ें, सफलता जरूर मिलेगी। कहा कि शिक्षार्थी यहां से डिग्री लेकर समाज में कदम रखने जा रह हैं। अपने परिवार, मुहल्ले, गांव, शहर, प्रदेश और देश के लिए कुछ ऐसा करें कि विश्वविद्यालय का नाम रोशन हो।
00
वयोवृद्ध विद्यार्थी बनकर भी युवा होने का एहसास: कश्यप
- संविधान विशेषज्ञ सुभाष सी कश्यप ने एलएलडी की मानद उपाधि पाकर कहा कि वह आज इस विश्वविद्यालय के सबसे वयोवृद्ध शिक्षार्थी बन गए हैं लेकिन इसके साथ ही उन्हें युवा होने का एहसास हो रहा है। कहा कि उन्होंने राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन से ही सीखा कि जीवन की सार्थकता सादगी, त्याग और सेवा में है। यहां से उपाधि लेकर अपना भविष्य बनाने के लिए आगे बढ़ रहे शिक्षार्थियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए। जीवन कुछ देने के लिए है, लेने के लिए नहीं। मूल्यों से समझौता कर सत्ता और सफलता पाना सच्चा सुख नहीं है लेकिन आज सत्ता और सफलता ही सर्वोच्च मूल्य हो गए हैं। उन्होंने मुक्त विश्वविद्यालय को चतुर्मुखी प्रगति के लिए बधाई दी।

0000000000
पिता किसान और बेटी को पढ़ाई में स्वर्ण
इलाहाबाद। चांसलर मेडल पाने वालीं शिखा पांडेय मूलत: दौलताबाद, पैकोली बाजार नेवादा अंबेडकर नगर की रहने वाली हैं। उनके पिता राजेश कुमार पांडेय किसान और मां सुनीता पांडेय ग्रहणी हैं। वह दो भाई और एक बहन हैं। बड़े भाई अहमदाबाद मेडिकल स्टोर में मैनेजर हैं और छोटा भाई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। शिखा आगे चलकर शिक्षिका बनना चाहती हैं और इसके लिए अब वह बीएड या बीटीसी करेंगी। गवर्नर के हाथ से मेडल कर पाकर शिखा बेहद खुश नजर आईं। बोलीं कि मुक्त विश्वविद्यालय में इसलिए प्रवेश लिया, क्योंकि यहां काफी सुविधाएं है और घर में रहकर पढ़ाई करने का मौका मिला। एमए संस्कृत में टॉपर शिखा ने संस्कृत विषय इसलिए चुना, क्योंकि वह ब्राह्मण हैं और उनके परिवार का संस्कृत से विशेष लगाव है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed