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रिं गिंग बेल के निदेशकों की जमानत मंजूर
Updated Tue, 11 Jul 2017 08:07 PM IST
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रिंगिंग बेल के निदेशकों की जमानत मंजूर
0 सीबीआई जांच के आदेश के बाद पुलिस की चार्जशीट पर जेल में रखने को दी गई थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इंटरनेट पर लाइक क्लिक के जरिए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाली कंपनी रिंगिंग बेल के निदेशकों अनुराग गर्ग और संदेश वर्मा की जमानत हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने शर्त लगाई है कि आरोपियों को प्रत्येक सप्ताह संबंधित न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। वह देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे और अपने पासपोर्ट कोर्ट में जमा करेंगे। याचीगण को साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने की भी हिदायत दी गई है। अनुराग गर्ग और संदेश वर्मा की जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति अमर सिंह चौहान ने सुनवाई की।
दोनों निदेशकों के खिलाफ 12 फरवरी 2017 को नोएडा के सेक्टर 20 थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। दोनों पर आरोप है कि रिंगिंग बेल के नाम से कंपनी बनाकर लोगों को झूठे प्रलोभन दिए और ग्राहकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया है कि दो मई 2015 के आदेश से हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इसके तिथि के बाद पुलिस द्वारा की गई कोई भी जांच बेमतलब है। इस आदेश के बाद पुलिस की 15 मई 2017 को दाखिल की चार्जशीट भी अर्थहीन हो गई। पुलिस की चार्जशीट मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित है और चूंकि 18 मई को चार्जशीट दाखिल करने की 90 दिन की मियांद खत्म हो रही थी इसलिए पुलिस ने जल्दबाजी में 15 मई को इसे दाखिल कर दिया। कोर्ट ने जमानत देने का आधार पाते हुए दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनको रिहा करने का आदेश दिया है।
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0 सीबीआई जांच के आदेश के बाद पुलिस की चार्जशीट पर जेल में रखने को दी गई थी चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इंटरनेट पर लाइक क्लिक के जरिए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाली कंपनी रिंगिंग बेल के निदेशकों अनुराग गर्ग और संदेश वर्मा की जमानत हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने शर्त लगाई है कि आरोपियों को प्रत्येक सप्ताह संबंधित न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। वह देश छोड़कर बाहर नहीं जाएंगे और अपने पासपोर्ट कोर्ट में जमा करेंगे। याचीगण को साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने की भी हिदायत दी गई है। अनुराग गर्ग और संदेश वर्मा की जमानत अर्जी पर न्यायमूर्ति अमर सिंह चौहान ने सुनवाई की।
दोनों निदेशकों के खिलाफ 12 फरवरी 2017 को नोएडा के सेक्टर 20 थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। दोनों पर आरोप है कि रिंगिंग बेल के नाम से कंपनी बनाकर लोगों को झूठे प्रलोभन दिए और ग्राहकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया है कि दो मई 2015 के आदेश से हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इसके तिथि के बाद पुलिस द्वारा की गई कोई भी जांच बेमतलब है। इस आदेश के बाद पुलिस की 15 मई 2017 को दाखिल की चार्जशीट भी अर्थहीन हो गई। पुलिस की चार्जशीट मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित है और चूंकि 18 मई को चार्जशीट दाखिल करने की 90 दिन की मियांद खत्म हो रही थी इसलिए पुलिस ने जल्दबाजी में 15 मई को इसे दाखिल कर दिया। कोर्ट ने जमानत देने का आधार पाते हुए दोनों की जमानत अर्जी मंजूर करते हुए उनको रिहा करने का आदेश दिया है।
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