Prayagraj : प्रयाग संगीत समिति से 1.50 लाख कलाकार गायन, वादन व नृत्य की हासिल करेंगे तालीम
प्रयाग संगीत समिति के मौजूदा समय में देश के सभी राज्यों में तो केंद्र हैं ही, दुनिया के नौ देशों में भी संगीत की शिक्षा के केंद्र गुलजार हैं। इनमें से लंदन और कनाडा के केंद्र अब बंद हो चुके हैं। बावजूद इसके संगीत समिति का डंका विश्व पटल पर बज रहा है।
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दुनिया भर में संगीत की नई पौध तैयार करने वाली प्रयाग संगीत समिति से इस बार 1.50 लाख कलाकार गायन, वादन और नृत्य की तालीम हासिल करेंगे। इसमें सबसे अधिक गायन के विद्यार्थी पंजीकृत हैं। परीक्षाएं आगामी मई में होंगी। देश के इस सबसे बड़े संगीत संस्थान की स्थापना 1928 में साउथ मलाका परिसर में पं. विष्णु दिगंबर एकेडमी ऑफ म्यूजिक के रूप में हुई थी।
प्रयाग संगीत समिति के मौजूदा समय में देश के सभी राज्यों में तो केंद्र हैं ही, दुनिया के नौ देशों में भी संगीत की शिक्षा के केंद्र गुलजार हैं। इनमें से लंदन और कनाडा के केंद्र अब बंद हो चुके हैं। बावजूद इसके संगीत समिति का डंका विश्व पटल पर बज रहा है।
देश-दुनिया भर में संचालित केंद्रों में चालू शैक्षणिक सत्र में 1.50 लाख कलाकार पंजीकृत हैं। समिति के विदेशी केंद्रों में परीक्षाएं आगामी दिसंबर महीने में होंगी। इसके लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। जबकि, देश के केंद्रों में अध्ययनरत छात्रों की परीक्षा प्रयागराज में आगामी मई में होगी। फिलहाल इन केंद्रों से गायन, वादन और नृत्य में जूनियर डिप्लोमा, सीनियर डिप्लोमा के अलावा प्रभाकर और प्रवीण की डिग्रियां दी जा रही हैं।
प्रयागराज में पांच एकड़ में फैला है भवन
इस संगीत केंद्र का पहली बार विस्तार बाबू बैजनाथ सहाय ने 1984 में किया। तब अल्फ्रेड पार्क में करीब पांच एकड़ क्षेत्रफल में प्रयाग संगीत समिति के नए भवन का निर्माण कराया गया। संगीत समिति की इस दूसरी शाखा के निर्माण को पूरा कराने का श्रेय रामेश्वर सहाय को जाता है। संगीत समिति के सचिव अरुण कुमार बताते हैं कि मौजूदा समय लंदन और कनाडा की शाखाएं बंद चल रही हैं।
लंदन में बनारस घराने के तबला वादक राम सहाय के परिजन इसे चलाते थे। फिलहाल इन दोनों जगहों पर नए सिरे से केंद्र का संचालन कराने की दिशा में विचार किया जा रहा है। नेपाल, अमेरिका, सिंगापुर, मॉरीशस, स्पेन, मॉस्को और इंडोनेशिया में केंद्र संचालित हो रहे हैं। परीक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा समय 1850 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां निर्धारित समय पर परीक्षाएं कराई जाएंगी।
शोध छात्रों को संगीताचार्य की मिलती है उपाधि
प्रयाग संगीत समिति का पाठ्यक्रम आठ वर्षों का निर्धारित किया गया है। इस समिति की मानद निदेशक उमा दीक्षित बताती हैं कि जूनियर डिप्लोमा, सीनियर डिप्लोमा, संगीत प्रभाकर और संगीत प्रवीण में दाखिले लिए जाते हैं। यहां शोध कार्य करने की भी व्यवस्था है। शोध करने वाले छात्र-छात्राओं को संगीताचार्य की उपाधि दी जाती है।