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कोरोना से जंग: RT PCR रिपोर्ट 24 घंटे में देने को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी सरकार को भेजा नोटिस

Wed, 05 May 2021 05:59 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 05 May 2021 05:59 PM IST
सार

क लॉ स्टूडेंट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार से कोरोना रिपोर्ट देने के लिए 24 घंटे अधिकतम समय सीमा तय कराने की मांग की है। इसके लिए यदि आवश्यक हो तो सभी जिलों में टेस्टिंग सुविधाएं बढ़ाने का अनुरोध भी किया गया है...

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Allahabad High Court sent notice to UP government for giving corona RT PCR report in 24 hours
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

विस्तार

आरोप है कि उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में कोरोना रिपोर्ट (RT-PCR TEST) आने में चार-पांच दिन से लेकर एक हफ्ते तक का समय लग रहा है। इससे कोरोना मरीज समय पर अपना उचित इलाज शुरू नहीं कर पा रहे हैं और जिसके कारण उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो रही है। जांच रिपोर्ट आने तक वे अनजाने में ही अन्य लोगों को संक्रमित भी कर रहे हैं। एक लॉ स्टूडेंट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार से कोरोना रिपोर्ट देने के लिए 24 घंटे अधिकतम समय सीमा तय कराने की मांग की है। इसके लिए यदि आवश्यक हो तो सभी जिलों में टेस्टिंग सुविधाएं बढ़ाने का अनुरोध भी किया गया है।

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कोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने नोटिस जारी कर उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की सुनवाई इसी विषय पर दाखिल एक अन्य मामले के साथ गुरुवार को होगी।

विधि छात्र उत्सव मिश्रा ने एक पत्र के माध्यम से कोर्ट से अनुरोध किया कि उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में कोरोना की स्थिति खतरनाक होती जा रही है। कोरोना रिपोर्ट आने में देरी इस समस्या को और अधिक बढ़ा रही है। अगर रिपोर्ट समय से मिल जाए तो ऐसे रोगियों का सही समय पर इलाज शुरू हो सकेगा और उनकी जान बचाई जा सकेगी। साथ ही संक्रमण की स्थिति पता चल जाने के कारण ऐसे लोग अन्य लोगों को भी संक्रमित भी नहीं करेंगे।

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याचिका में कहा गया है कि कोरोना इलाज में उपयोग की जा रही रेमडेसिविर और स्टेरॉयड जैसी दवाओं की कालाबाजारी करते हुए जिन दवाइयों को पकड़ा जा रहा है, उन्हें नियमों में ढील देकर तुरंत जिले के जिलाधिकारियों को सौंपा जाए, ताकि इस आपातकाल में उन दवाओं का कोरोना मरीजों के इलाज में उपयोग किया जा सके। इन दवाओं के पुलिस कस्टडी में लंबी अवधि तक रखने पर इसी दौरान अन्य मरीजों को इसकी कमी के कारण भारी नुकसान होने की आशंका व्यक्त की गई है।

अधिकारी नहीं उठाते फोन

कोरोना के आपातकाल में भी यह शिकायत लगातार बनी हुई है कि सरकार द्वारा कोरोना मरीजों के इलाज के लिए जारी किये गये हेल्पलाइन नंबर हों या जिले के प्रमुख अधिकारियों के नंबर, जब लोग किसी सहायता के लिए इन पर फोन करते हैं तो इनके नंबर नहीं उठते। इस अवस्था में लोगों की उचित मदद नहीं हो पाती। याचिका में मांग की गई है कि इस आपातकाल में सभी हेल्पलाइन नंबर पर तत्काल सहायता देना अनिवार्य किया जाए, ताकि लोगों को सही समय पर उचित जानकारी देकर उनकी जान बचायी जा सके।

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