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चिंताजनक : गहरा सकता है आक्सीजन संकट
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तालानगरी स्थित राधिका एयर प्रोडक्ट के गोदाम में आक्सीजन सिलिंडर रिफिल करते कर्मचारी।
- फोटो : CITY OFFICE
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आशीष निगम, अलीगढ़।
कोरोना काल में मेडिकल आक्सीजन की मांग तेजी से बढ़ रही है। बुधवार को आक्सीजन की कमी के कारण एसजेडी मेमोरियल हास्पिटल में पांच कोरोना मरीजों की मौत हो गई थी। प्रशासन ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, जबकि सब जानते हैं कि आक्सीजन आपूर्ति में हुई देरी के कारण उक्त दर्दनाक घटना हुई है। अकेले एसजेडी हास्पिटल ही नहीं, जिले के लगभग सभी अस्पतालों में आक्सीजन का संकट होने वाला है। एक दो दिन में ये समस्या और विकराल हो सकती है, क्योंकि मांग के अनुरूप आक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो रही है।
गाजियाबाद, काशीपुर, ग्रेटर नोएडा और मथुरा से अलीगढ़ को आपूर्ति मिलती है, जो इस वक्त रुक गई है। वजह ये है कि दिल्ली और एनसीआर के अस्पतालों में आक्सीजन की जबरदस्त मांग होने से वहीं की खपत बमुश्किल पूरी हो रही है। बची हुई आक्सीजन आगरा, मथुरा को मिल रही है। इसके बाद अलीगढ़ का नंबर आता है। वर्तमान में आक्सीजन के उत्पादनकर्ता प्लांट से लेकर सिलिंडर भर कर देने वाले सभी उद्यमियों पर शासन प्रशासन का कड़ा पहरा है। ऐसे में प्रशासनिक निर्देशों के बाद ही गैस मिल रही है। जैसा निर्देश वैसी ही सप्लाई।
अलीगढ़ में संचालित तीन प्लांट केवल गैस मंगा कर आपूर्ति करते हैं, आक्सीजन बनाते नहीं है। छेरत रोड के एक प्लांट में आक्सीजन बनती है, लेकिन भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से यहां भी उत्पादन बहुत कम है। जिले में वर्तमान में छह टन मेडिकल, तीन टन कामर्शियल आक्सीजन की जरूरत है। नौ टन आक्सीजन मिले तो जिले का काम चल सकता है, लेकिन यहां पूरे सप्ताह छह टन की औसतन आपूर्ति हो रही है, जिससे किल्लत बढ़ रही है।
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लगभग एक सप्ताह बाद बुधवार की शाम को छह टन आक्सीजन राधिका एयर प्रोडक्ट तालानगरी को मिली थी, जिससे एसजेडी हास्पिटल और मिथराज हास्पिटल को आक्सीजन दी गई थी। इससे पहले भी एक सप्ताह में छह टन की ही आपूर्ति हुई थी। 15 दिन में अलीगढ़ को लगभग 12 टन गैस मिली। वर्तमान में सभी अस्पतालों में स्टाक खत्म होने की स्थिति में है। अब अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति नहीं मिली तो संकट और गहरा हो सकता है।
- आक्सीजन की मांग इन दिनों बहुत बढ़ गई है। हम सभी लोग प्रशासन के निर्देश पर आक्सीजन दे रहे हैं। शुक्रवार तक पूरा स्टाक खत्म हो जाएगा। ऐसे में अस्पतालों में और संकट हो सकता है। अलीगढ़ के किसी भी प्लांट को मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं मिल रही है। वर्ष 2013 के बाद ऐसा संकट कभी नहीं आया। उस वक्त आक्सीजन निर्माता प्लांटों में मरम्मत के कारण कमी हुई थी। इस बार मांग बहुत ज्यादा होने से संकट पैदा हुआ है। - रामेंद्र शर्मा, राधिका एयर प्रोडक्ट, तालानगरी।
नौ टन का भंडार चाहिए
पूरे प्रदेश में अस्पतालों में आक्सीजन संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी कोविड हास्पिटल में कम से कम 36 घंटे का आक्सीजन बैकअप रखने का निर्देश दिया है। अलीगढ़ में लगभग 9 टन का भंडारण हो तो अस्पतालों का 36 घंटे का काम चल सकता है क्योंकि यहां 24 घंटे में मेडिकल के लिए ही छह टन आक्सीजन चाहिए होती है, लेकिन भंडारण बमुश्किल दो टन का रह पा रहा है।
बिजली करंट न मारती तो आक्सीजन भंडार होता
वर्ष 2010 में अलीगढ़ में आक्सीजन उत्पादन का बड़ा प्लांट राधा एयर प्रोडक्ट, तालानगरी में लगा था। जिसकी उत्पादन क्षमता दस टन रोजाना थी। मगर, बिजली कटौती और ट्रिपिंग के कारण ये प्लांट अपना खर्च नहीं निकल सका और बंद करना पड़ गया।
लगभग 11 साल पहले एक करोड़ की लागत से बना ये प्लांट बिजली की किल्लत के कारण बंद करना पड़ा। यहां के मालिक रामेंद्र शर्मा ने बताया कि अब वही प्लांट ढाई करोड़ की लागत का है। अगर वो प्लांट चालू होता तो आज के मुश्किल हालात में अलीगढ़ आक्सीजन में आत्मनिर्भर होता।
- .77 क्यूबिक मीटर यानी एक किलोग्राम आक्सीजन गैस।
- 1000 किलोग्राम या एक टन में 770 क्यूबिक गैस होती है।
- एक टन गैस के लिए 110 लंबे वाले सिलिंडर लगेंगे।
- कामर्शियल 99 और मेडिकल आक्सीजन 93 फीसदी शुद्ध होती है।
- कामर्शियल के मुकाबले मेडिकल आक्सीजन दो रुपये महंगी होती है।
- सात क्यूबिक मीटर या नौ किलोग्राम गैस का सिलिंडर 250-300 रुपये का है।
मुंबई से आता आक्सीजन प्लांट
मुंबई स्थित सांघी आर्गनाइजेशन, सांघी आक्सीजन, केवीके आक्सीजन नाम की तीन कंपनियां ही आक्सीजन प्लांट उपलब्ध कराती है। वर्ष 2010 में जो आक्सीजन प्लांट एक करोड़ रुपये में लगता था आज उसकी कीमत लगभग ढाई करोड़ रुपये तक आ रही है।
बाहर से आ रही आक्सीजन
गोयल एमजी गैस प्राइवेट लिमिटेड गाजियाबाद, आइनोक्स एयर प्रोडक्ट मोदीनगर, इंडिया गैस काशीपुर, एयर लिक्विड रुड़की, एयर लिक्विड पानीपत कंपनी और मथुरा की यूनिवर्सल कंपनी आक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं।
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कोरोना काल में मेडिकल आक्सीजन की मांग तेजी से बढ़ रही है। बुधवार को आक्सीजन की कमी के कारण एसजेडी मेमोरियल हास्पिटल में पांच कोरोना मरीजों की मौत हो गई थी। प्रशासन ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, जबकि सब जानते हैं कि आक्सीजन आपूर्ति में हुई देरी के कारण उक्त दर्दनाक घटना हुई है। अकेले एसजेडी हास्पिटल ही नहीं, जिले के लगभग सभी अस्पतालों में आक्सीजन का संकट होने वाला है। एक दो दिन में ये समस्या और विकराल हो सकती है, क्योंकि मांग के अनुरूप आक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो रही है।
गाजियाबाद, काशीपुर, ग्रेटर नोएडा और मथुरा से अलीगढ़ को आपूर्ति मिलती है, जो इस वक्त रुक गई है। वजह ये है कि दिल्ली और एनसीआर के अस्पतालों में आक्सीजन की जबरदस्त मांग होने से वहीं की खपत बमुश्किल पूरी हो रही है। बची हुई आक्सीजन आगरा, मथुरा को मिल रही है। इसके बाद अलीगढ़ का नंबर आता है। वर्तमान में आक्सीजन के उत्पादनकर्ता प्लांट से लेकर सिलिंडर भर कर देने वाले सभी उद्यमियों पर शासन प्रशासन का कड़ा पहरा है। ऐसे में प्रशासनिक निर्देशों के बाद ही गैस मिल रही है। जैसा निर्देश वैसी ही सप्लाई।
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अलीगढ़ में संचालित तीन प्लांट केवल गैस मंगा कर आपूर्ति करते हैं, आक्सीजन बनाते नहीं है। छेरत रोड के एक प्लांट में आक्सीजन बनती है, लेकिन भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से यहां भी उत्पादन बहुत कम है। जिले में वर्तमान में छह टन मेडिकल, तीन टन कामर्शियल आक्सीजन की जरूरत है। नौ टन आक्सीजन मिले तो जिले का काम चल सकता है, लेकिन यहां पूरे सप्ताह छह टन की औसतन आपूर्ति हो रही है, जिससे किल्लत बढ़ रही है।
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लगभग एक सप्ताह बाद बुधवार की शाम को छह टन आक्सीजन राधिका एयर प्रोडक्ट तालानगरी को मिली थी, जिससे एसजेडी हास्पिटल और मिथराज हास्पिटल को आक्सीजन दी गई थी। इससे पहले भी एक सप्ताह में छह टन की ही आपूर्ति हुई थी। 15 दिन में अलीगढ़ को लगभग 12 टन गैस मिली। वर्तमान में सभी अस्पतालों में स्टाक खत्म होने की स्थिति में है। अब अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति नहीं मिली तो संकट और गहरा हो सकता है।
- आक्सीजन की मांग इन दिनों बहुत बढ़ गई है। हम सभी लोग प्रशासन के निर्देश पर आक्सीजन दे रहे हैं। शुक्रवार तक पूरा स्टाक खत्म हो जाएगा। ऐसे में अस्पतालों में और संकट हो सकता है। अलीगढ़ के किसी भी प्लांट को मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं मिल रही है। वर्ष 2013 के बाद ऐसा संकट कभी नहीं आया। उस वक्त आक्सीजन निर्माता प्लांटों में मरम्मत के कारण कमी हुई थी। इस बार मांग बहुत ज्यादा होने से संकट पैदा हुआ है। - रामेंद्र शर्मा, राधिका एयर प्रोडक्ट, तालानगरी।
नौ टन का भंडार चाहिए
पूरे प्रदेश में अस्पतालों में आक्सीजन संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी कोविड हास्पिटल में कम से कम 36 घंटे का आक्सीजन बैकअप रखने का निर्देश दिया है। अलीगढ़ में लगभग 9 टन का भंडारण हो तो अस्पतालों का 36 घंटे का काम चल सकता है क्योंकि यहां 24 घंटे में मेडिकल के लिए ही छह टन आक्सीजन चाहिए होती है, लेकिन भंडारण बमुश्किल दो टन का रह पा रहा है।
बिजली करंट न मारती तो आक्सीजन भंडार होता
वर्ष 2010 में अलीगढ़ में आक्सीजन उत्पादन का बड़ा प्लांट राधा एयर प्रोडक्ट, तालानगरी में लगा था। जिसकी उत्पादन क्षमता दस टन रोजाना थी। मगर, बिजली कटौती और ट्रिपिंग के कारण ये प्लांट अपना खर्च नहीं निकल सका और बंद करना पड़ गया।
लगभग 11 साल पहले एक करोड़ की लागत से बना ये प्लांट बिजली की किल्लत के कारण बंद करना पड़ा। यहां के मालिक रामेंद्र शर्मा ने बताया कि अब वही प्लांट ढाई करोड़ की लागत का है। अगर वो प्लांट चालू होता तो आज के मुश्किल हालात में अलीगढ़ आक्सीजन में आत्मनिर्भर होता।
- .77 क्यूबिक मीटर यानी एक किलोग्राम आक्सीजन गैस।
- 1000 किलोग्राम या एक टन में 770 क्यूबिक गैस होती है।
- एक टन गैस के लिए 110 लंबे वाले सिलिंडर लगेंगे।
- कामर्शियल 99 और मेडिकल आक्सीजन 93 फीसदी शुद्ध होती है।
- कामर्शियल के मुकाबले मेडिकल आक्सीजन दो रुपये महंगी होती है।
- सात क्यूबिक मीटर या नौ किलोग्राम गैस का सिलिंडर 250-300 रुपये का है।
मुंबई से आता आक्सीजन प्लांट
मुंबई स्थित सांघी आर्गनाइजेशन, सांघी आक्सीजन, केवीके आक्सीजन नाम की तीन कंपनियां ही आक्सीजन प्लांट उपलब्ध कराती है। वर्ष 2010 में जो आक्सीजन प्लांट एक करोड़ रुपये में लगता था आज उसकी कीमत लगभग ढाई करोड़ रुपये तक आ रही है।
बाहर से आ रही आक्सीजन
गोयल एमजी गैस प्राइवेट लिमिटेड गाजियाबाद, आइनोक्स एयर प्रोडक्ट मोदीनगर, इंडिया गैस काशीपुर, एयर लिक्विड रुड़की, एयर लिक्विड पानीपत कंपनी और मथुरा की यूनिवर्सल कंपनी आक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं।