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हर क्षेत्र में मजबूत पहचान बना रहीं महिलाएं : प्रो. शंभुनाथ
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एसवी कॉलेज में अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में बोलते प्रो. शंभुनाथ तिवारी। अमर उजाला
- फोटो : SAMVAD
एएमयू के हिंदी विभाग के प्रो. शंभुनाथ तिवारी ने कहा कि देश में महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। शिक्षा, राजनीति, विज्ञान और अंतरिक्ष तक उनका योगदान तेजी से बढ़ा है।
बुधवार को अमर उजाला अपराजिता के तहत एसवी कॉलेज में महिला अधिकार और राजनीतिक अधिकार विषय पर हुई संगोष्ठी में प्रो. तिवारी बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जमीन से अंतरिक्ष तक महिलाओं की उड़ान, लेकिन सोच में बदलाव अभी बाकी है। उन्हें अपनी क्षमता पहचाननी होगी। संसद में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जो बदलते भारत की तस्वीर को दर्शाती है। प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि छोटी उम्र में भी बड़े काम किए जा सकते हैं।
जैसे वैभव सूर्यवंशी, अष्टावक्र और मैथिली ठाकुर आदि शामिल हैं। नेपोलियन बोनापार्ट का प्रसिद्ध कथन भी यही दर्शाता है कि तुम मुझे एक अच्छी मां दो, मैं तुम्हें एक अच्छा राष्ट्र दूंगा। इसलिए छात्रों को अपनी शक्ति पहचान कर लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। प्रो. नीता ने कहा कि संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार जरूर दिए हैं, लेकिन वास्तविकता में अभी भी उन्हें वे सभी अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाए हैं, जिनकी वह हकदार हैं।
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समाज में महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव लाना बेहद जरूरी है। जब तक लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक सच्चे अर्थों में महिला सशक्तिकरण संभव नहीं हो पाएगा। महिलाओं को संविधान द्वारा मिले अधिकार अभी पूरी तरह जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाए हैं। इस अवसर पर प्रो. निर्मला, प्रो. नीरू, डॉ. अक्षय कुमार आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को अमर उजाला अपराजिता के तहत एसवी कॉलेज में महिला अधिकार और राजनीतिक अधिकार विषय पर हुई संगोष्ठी में प्रो. तिवारी बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जमीन से अंतरिक्ष तक महिलाओं की उड़ान, लेकिन सोच में बदलाव अभी बाकी है। उन्हें अपनी क्षमता पहचाननी होगी। संसद में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जो बदलते भारत की तस्वीर को दर्शाती है। प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि छोटी उम्र में भी बड़े काम किए जा सकते हैं।
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जैसे वैभव सूर्यवंशी, अष्टावक्र और मैथिली ठाकुर आदि शामिल हैं। नेपोलियन बोनापार्ट का प्रसिद्ध कथन भी यही दर्शाता है कि तुम मुझे एक अच्छी मां दो, मैं तुम्हें एक अच्छा राष्ट्र दूंगा। इसलिए छात्रों को अपनी शक्ति पहचान कर लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। प्रो. नीता ने कहा कि संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार जरूर दिए हैं, लेकिन वास्तविकता में अभी भी उन्हें वे सभी अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पाए हैं, जिनकी वह हकदार हैं।
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समाज में महिलाओं के प्रति सोच में बदलाव लाना बेहद जरूरी है। जब तक लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक सच्चे अर्थों में महिला सशक्तिकरण संभव नहीं हो पाएगा। महिलाओं को संविधान द्वारा मिले अधिकार अभी पूरी तरह जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाए हैं। इस अवसर पर प्रो. निर्मला, प्रो. नीरू, डॉ. अक्षय कुमार आदि मौजूद रहे।