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क्या सरकार भी औरंगजेब की तरह काम करेगी : प्रो. इरफान
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प्रो. इरफान हबीब, इतिहासकार।
- फोटो : CITY OFFICE
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के एमेरिटस प्रोफेसर व प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि जिस तरह मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर गलत किया था, तो क्या उसी तरह अब सरकार भी गलत करेगी। काशी और मथुरा के मंदिर राजा वीर सिंह बुंदेला ने जहांगीर के शासनकाल में बनवाया था, जिन्हें बाद में औरंगजेब ने तोड़े थे। यह इतिहास में दर्ज है। उन्होंने ज्ञानवापी में शिवलिंग बताई जा रही संरचना पर भी सवाल उठाए।
प्रो. इरफान ने कहा कि ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है, लेकिन जो याचिका दाखिल की गई थी, उसमें इस बात का कोई जिक्र नहीं था। शिवलिंग बनाने का एक तरीका होता है। हर चीज को शिवलिंग नहीं बता सकते। अब शिवलिंग को मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब मंदिर तोड़े गए तो उसके पत्थर मस्जिदों में इस्तेमाल किए गए। बहुत सी मस्जिदों में हिंदू प्रतीकों के पत्थर प्रयोग किए गए थे। बहुत से मंदिरों में बौद्ध धर्म स्थल से जुड़े पत्थर मिल जाएंगे। राणा कुंभा द्वारा चित्तौड़ में बनवाई गई मीनार के एक पत्थर पर अरबी में ‘अल्लाह’ लिखा है, लेकिन उसे मस्जिद नहीं कह सकते। क्या इतने भर से मुसलमान कह सकते हैं कि यह मस्जिद है और हमें दे दी जाए।
प्रो. हबीब ने कहा कि वर्ष 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ी गई थी और इससे राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़े थे। उस जमाने में छिपकर काम नहीं होते थे। इतिहास में मंदिर तोड़ने की घटना दर्ज है। ज्ञानवापी प्रकरण पर उन्होंने कहा कि जब भी पुराने समय में मस्जिद या मंदिर बने तो उनमें बौद्ध विहारों के पत्थर मिले है, तो क्या मंदिरों को तोड़ दिया जाए। यह बेवकूफी भरी बातें हैं। ऐसी स्थिति में बहुत से मंदिर टूट जाएंगे।
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प्रो. इरफान ने कहा कि ज्ञानवापी में शिवलिंग मिलने की बात कही जा रही है, लेकिन जो याचिका दाखिल की गई थी, उसमें इस बात का कोई जिक्र नहीं था। शिवलिंग बनाने का एक तरीका होता है। हर चीज को शिवलिंग नहीं बता सकते। अब शिवलिंग को मुद्दा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब मंदिर तोड़े गए तो उसके पत्थर मस्जिदों में इस्तेमाल किए गए। बहुत सी मस्जिदों में हिंदू प्रतीकों के पत्थर प्रयोग किए गए थे। बहुत से मंदिरों में बौद्ध धर्म स्थल से जुड़े पत्थर मिल जाएंगे। राणा कुंभा द्वारा चित्तौड़ में बनवाई गई मीनार के एक पत्थर पर अरबी में ‘अल्लाह’ लिखा है, लेकिन उसे मस्जिद नहीं कह सकते। क्या इतने भर से मुसलमान कह सकते हैं कि यह मस्जिद है और हमें दे दी जाए।
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प्रो. हबीब ने कहा कि वर्ष 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ी गई थी और इससे राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ हो गया। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़े थे। उस जमाने में छिपकर काम नहीं होते थे। इतिहास में मंदिर तोड़ने की घटना दर्ज है। ज्ञानवापी प्रकरण पर उन्होंने कहा कि जब भी पुराने समय में मस्जिद या मंदिर बने तो उनमें बौद्ध विहारों के पत्थर मिले है, तो क्या मंदिरों को तोड़ दिया जाए। यह बेवकूफी भरी बातें हैं। ऐसी स्थिति में बहुत से मंदिर टूट जाएंगे।
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