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खुफिया तंत्र देगा जमीन की रिपोर्ट
अलीगढ़/ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2016 01:48 AM IST
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अलीगढ़ में अवैध पशु कटान, गली-गली बने छोटे कट्टी घर, चर्बी गलाने वाले, काटे गये पशुओं की हड्डियों से दूसरे पदार्थ बनाने वालों सेे लेकर बड़ी बफैलो मीट एक्सपोर्ट यूनिट तक सब पर खुफिया गिरी शुरू हो गई है।
सरकारी विभागों के कर्मी, एसपीओ और स्थानीय पुलिस के सहयोग से इसकी रिपोर्ट एकत्र की जा रही है। कहां पर नियमों को ताक पर रख कर जबरदस्त वायु प्रदूषण फैलाया जा रहा है..? जिससे पूरा शहर परेशान है। खासतौर पर पुराने शहर में ऊपरकोट कोतवाली, देहलीगेट, जयगंज, सासनीगेट, बन्नादेवी और क्वार्सी थाने का इलाका इसकी जद में है, जहां सर्वाधिक अवैध पशु कटान हो रहा है। इन सभी इलाकों में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूजल दोहन के साथ गिरते जल स्तर पर की भी रिपोर्ट तैयार हो रही है।
दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में अलीगढ़ में मीट और चर्बी से हो रही दुर्गंध, वायु प्रदूषण, जमीन के अंदर और सिंचाई विभाग की नहरों में डाला जा रहा खूनी पानी, बिना अनुमति के रोजाना लाखों लीटर का भूजल दोहन आदि पर सुनवाई चल रही है। शीर्ष अदालत ने प्रदूषण के इन गंभीर मामलों पर जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है। जिस पर पांच विभागों की टीम काम कर रही है। अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होनी है।
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जिलाधिकारी डा. बलकार सिंह के निर्देश पर सख्त हुई प्रशासनिक मशीनरी अब हर स्तर पर निगरानी में जुट गई है। एडीएम सिटी अवधेश तिवारी ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट इसकी समीक्षा कर रिपोर्ट देंगे। उल्लेखनीय है कि अमर उजाला ने लगातार इस प्रकरण में मुहिम छेड़ रखी है। 25 जनवरी को एनजीटी ने इस प्रकरण में केस नंबर 38/2016 को स्वीकार किया था। एनजीटी ने अलीगढ़ सहित पूरे प्रदेश में संचालित सरकारी और निजी स्लाटर हाउस और मीट एक्सपोर्ट यूनिटों से संबंधित ब्योरा तलब किया है।
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सरकारी विभागों के कर्मी, एसपीओ और स्थानीय पुलिस के सहयोग से इसकी रिपोर्ट एकत्र की जा रही है। कहां पर नियमों को ताक पर रख कर जबरदस्त वायु प्रदूषण फैलाया जा रहा है..? जिससे पूरा शहर परेशान है। खासतौर पर पुराने शहर में ऊपरकोट कोतवाली, देहलीगेट, जयगंज, सासनीगेट, बन्नादेवी और क्वार्सी थाने का इलाका इसकी जद में है, जहां सर्वाधिक अवैध पशु कटान हो रहा है। इन सभी इलाकों में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूजल दोहन के साथ गिरते जल स्तर पर की भी रिपोर्ट तैयार हो रही है।
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दरअसल, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में अलीगढ़ में मीट और चर्बी से हो रही दुर्गंध, वायु प्रदूषण, जमीन के अंदर और सिंचाई विभाग की नहरों में डाला जा रहा खूनी पानी, बिना अनुमति के रोजाना लाखों लीटर का भूजल दोहन आदि पर सुनवाई चल रही है। शीर्ष अदालत ने प्रदूषण के इन गंभीर मामलों पर जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की है। जिस पर पांच विभागों की टीम काम कर रही है। अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होनी है।
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जिलाधिकारी डा. बलकार सिंह के निर्देश पर सख्त हुई प्रशासनिक मशीनरी अब हर स्तर पर निगरानी में जुट गई है। एडीएम सिटी अवधेश तिवारी ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट इसकी समीक्षा कर रिपोर्ट देंगे। उल्लेखनीय है कि अमर उजाला ने लगातार इस प्रकरण में मुहिम छेड़ रखी है। 25 जनवरी को एनजीटी ने इस प्रकरण में केस नंबर 38/2016 को स्वीकार किया था। एनजीटी ने अलीगढ़ सहित पूरे प्रदेश में संचालित सरकारी और निजी स्लाटर हाउस और मीट एक्सपोर्ट यूनिटों से संबंधित ब्योरा तलब किया है।