वेलकम टू अलीगढ़: 60 टन लोहे का भव्य प्रवेश द्वार, 200 किलो के ताले, 1.68 लाख एलईडी से होगा रोशन
प्रवेश द्वार पर 200 किलो के ताले रखे जाएंगे। इनकी लंबाई साढ़े आठ फीट और चौड़ाई डेढ़ फीट है। यह ताले मुरादाबाद से बनकर आए हैं। इसकी चाबी भी बहुत वजनी है। इनमें हाथ की कारीगरी के साथ मशीनों से भी काम किया गया है। इनमें देश की पुरातन संस्कृति के चिह्न भी दर्शाए गए हैं। यह ताले सुनहरे रंग में दिखेंगे।
विस्तार
अलीगढ़ के जीटी रोड पर महरावल कट के पास लगभग बनकर तैयार साठ टन लोहे का भव्य प्रवेश द्वार। इसके बीच में रखे दो विशाल ताले। एक तरफ सुंदर पार्क। जी हां, जीटी रोड पर महरावल कट के पास बन रहा शहर का भव्य प्रवेश द्वार लगभग बनकर तैयार है।
इस प्रवेश द्वार में अलीगढ़ की धार्मिक विरासत, सनातन संस्कृति और औद्योगिक पहचान को एक साथ एक स्थान पर संवारा गया है जिससे अलीगढ़ आने-जाने वाले देशी-विदेशी मेहमानों को यहां की समृद्ध झलक मिलेगी। इसके एक तरफ बनाए जा रहे पार्क में अब पौधे और लाइटों को लगाने का काम शुरू होने वाला है।
दिवाली से पहले इसका उद्घाटन कराने की तैयारी हो रही है, जो शहरवासियों के लिए शानदार तोहफा है। तीन करोड़ रुपये की लागत से नगर निगम इसका निर्माण कर रहा है। निर्माण कर रही कंपनी के संचालक शिवांग माहेश्वरी ने बताया कि इसका काम लगभग पूरा होने वाला है।
200 किलो के ताले
प्रवेश द्वार पर 200 किलो के ताले रखे जाएंगे। इनकी लंबाई साढ़े आठ फीट और चौड़ाई डेढ़ फीट है। यह ताले मुरादाबाद से बनकर आए हैं। इसकी चाबी भी बहुत वजनी है। इनमें हाथ की कारीगरी के साथ मशीनों से भी काम किया गया है। इनमें देश की पुरातन संस्कृति के चिह्न भी दर्शाए गए हैं। यह ताले सुनहरे रंग में दिखेंगे।
अलीगढ़ की पहचान दिखेगी
प्रवेश द्वार के एक ओर बन रहे पार्क में म्यूरल आर्ट से श्रीखेरेश्वर मंदिर, अलीगढ़ किला, अचल सरोवर और स्वामी हरिदास मंदिर को उकेरा गया है। यह आर्ट दिल्ली के कलाकारों ने बनाई है।
ताले की कहानी बताएगा स्टैच्यू
कुर्सी पर बैठा एक स्टैच्यू तालानगरी की शुरुआती कहानी बताता है। कैसे यहां पर ताला बनाने की शुरुआत हुई। इसके हाथ में एक ताला और चाबी भी है। इसके पास ही एक ग्लोब है। जिस पर ताला बनाया गया है। यह बताता है कि अलीगढ़ का ताला पूरी दुनिया में जाना जाता है।
द्वार पर लिखे गए श्लोक
द्वार के खंभों पर संस्कृत के श्लोक गीता और देवी भागवत की यादें ताजा कराते हैं। या देवी सर्व भूतेषु..। इसी तरह से यदा ही यदा ही धर्मस्य... को भी उकेरा गया है, जो सनातन संस्कृति को सामने रखते हैं।
ऊपर से भी दिखेगा वेलकम टू अलीगढ़
प्रवेश द्वार की ऊंचाई 26 और चौड़ाई 102 फीट है। इसके लिए रायपुर से लोहा और हापुड़ से एचपीएल शीट मंगवाई गई है, जो इस द्वार को सजाने के लिए प्रयोग की गई है। यह द्वार दशकों तक ऐसा ही रहेगा। एचपीएल शीट का प्रयोग कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर में भी किया गया है। ऊपर के पिलर लोगों का स्वागत करते हैं, जिनमें वेलकम टू अलीगढ़ लिखा दिखाई देता है। ड्रोन और हेलिकॉप्टर से भी लोग इसका नजारा देख सकेंगे।
1.68 लाख एलईडी लाइटें लगेंगी
इस द्वार को जगमग रखने के लिए 1.68 लाख एलईडी लाइटों का प्रयोग किया जाएगा। 60 बोलार्ड लाइटें भी लगाई जाएंगी, जो अलग रोशनी करेंगी। शाम होते ही यह द्वार दूर से ही अनायास लोगों को आकर्षित करेगा।