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विश्वविद्यालयों के भारतीयकरण का विरोध अनुचित : नाईक
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 May 2016 01:36 AM IST
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वार्षिकोत्सव
- फोटो : रुपेश
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राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को कहा गया है कि दीक्षांत समारोह में गाउन एवं काली हैट के बजाय भारतीय परिवेश एवं रुचि के अनुसार परिधान बनाएं। कुछ लोग इसका यह कहकर विरोध कर रहे हैं कि विश्वविद्यालयों का भारतीयकरण हो रहा है। मैं पूछना चाहता हूं कि भारतीयकरण हो रहा है तो इसमें खराबी क्या है?
राज्यपाल मंगलवार को अतरौली के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के वार्षिक समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 11 छात्रों एवं 6 मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया। कॉलेज में उन्होेंने रामस्नेही पुस्तकालय एवं जगमोहन सभागार की शिला पट्टिका का अनावरण भी किया।
उन्होंने प्रदेश की उच्च शिक्षा की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि यूपी के 25 विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति हूं। इसमें लाखों छात्र एवं शिक्षक हैं। कुछ विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां पिछले चार साल से दीक्षांत समारोह का आयोजन ही नहीं किया गया। उच्च शिक्षा को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि आज 24 विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह हो चुके हैं। परीक्षा समय से नहीं होती, उसे भी नियत समय पर कराने का प्रयास चल रहा है।
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राज्यपाल ने यह कहकर लोगों का दिल जीतने का प्रयास किया कि मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में उत्तर भारतीय का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि मुंबई में 25-30 प्रतिशत लोग उत्तर भारतीय हैं। यहां भी लोग मेहनत करें तो उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बन जाएगा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विद्या मंदिर की शिक्षा व्यवस्था की जमकर तारीफ की और कहा कि संस्कार युक्त शिक्षा से ही देश को आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने एक शिक्षक की तरह छात्रों को दायित्व बोध कराया और स्वयं के 60 वर्ष की उम्र में कैंसर से पीड़ित होने का उदाहरण देकर यह समझाने का प्रयास किया कि इच्छाशक्ति हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों के व्यक्तित्व विकास पर भी जोर दिया।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के मौजूदा दौर में उन्होंने छात्रों को सफलता हासिल करने के लिए चार मंत्र ‘हमेशा मुस्कुराते रहो, कोई अच्छा काम करता है तो उसकी तारीफ करो, किसी की अवमानना न करो और हमेशा अच्छा से अच्छा करने का प्रयास करो’ दिये।
इससे पूर्व भाजपा विधान मंडल दल के नेता डॉ. सुरेश खन्ना ने कहा कि विद्या मंदिर के स्कूलों में शिक्षा के साथ संस्कार भी मिलते हैं। यह स्कूल रोल मॉडल की तरह है। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट का उदाहरण दिया और कहा कि जब रूजवेल्ट कक्षा 6 में थे तो उनके स्कूल के विद्यार्थियों को व्हाइट हाउस दिखाया गया और उस पर निबंध लिखने को कहा गया। रूजवेल्ट ने निबंध में लिखा कि आज मैने वह भवन देखा जिसमें मुझे जाना है।
बाद में वे राष्ट्रपति बनकर उस भवन में गए। आरएसएस के ब्रज क्षेत्र के प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश ने कहा कि भारत ही एक मात्र वह देश है जो विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है। कार्यकम की अध्यक्षता जगमोहन ने की। इससे पूर्व एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया, शशि सिंह, रवेंद्र पाल सिंह एवं स्कूृल प्रबंधन द्वारा राज्यपाल का स्वागत किया गया। इस दौरान मंडलायुक्त चंद्रकात, डीआईजी गोविंद अग्रवाल, डीएम राजमणि यादव और एसएसपी लव कुमार आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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राज्यपाल मंगलवार को अतरौली के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के वार्षिक समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 11 छात्रों एवं 6 मेधावी छात्राओं को सम्मानित किया। कॉलेज में उन्होेंने रामस्नेही पुस्तकालय एवं जगमोहन सभागार की शिला पट्टिका का अनावरण भी किया।
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उन्होंने प्रदेश की उच्च शिक्षा की दयनीय स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि यूपी के 25 विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति हूं। इसमें लाखों छात्र एवं शिक्षक हैं। कुछ विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां पिछले चार साल से दीक्षांत समारोह का आयोजन ही नहीं किया गया। उच्च शिक्षा को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि आज 24 विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह हो चुके हैं। परीक्षा समय से नहीं होती, उसे भी नियत समय पर कराने का प्रयास चल रहा है।
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राज्यपाल ने यह कहकर लोगों का दिल जीतने का प्रयास किया कि मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में उत्तर भारतीय का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि मुंबई में 25-30 प्रतिशत लोग उत्तर भारतीय हैं। यहां भी लोग मेहनत करें तो उत्तर प्रदेश उत्तम प्रदेश बन जाएगा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विद्या मंदिर की शिक्षा व्यवस्था की जमकर तारीफ की और कहा कि संस्कार युक्त शिक्षा से ही देश को आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने एक शिक्षक की तरह छात्रों को दायित्व बोध कराया और स्वयं के 60 वर्ष की उम्र में कैंसर से पीड़ित होने का उदाहरण देकर यह समझाने का प्रयास किया कि इच्छाशक्ति हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों के व्यक्तित्व विकास पर भी जोर दिया।
कड़ी प्रतिस्पर्धा के मौजूदा दौर में उन्होंने छात्रों को सफलता हासिल करने के लिए चार मंत्र ‘हमेशा मुस्कुराते रहो, कोई अच्छा काम करता है तो उसकी तारीफ करो, किसी की अवमानना न करो और हमेशा अच्छा से अच्छा करने का प्रयास करो’ दिये।
इससे पूर्व भाजपा विधान मंडल दल के नेता डॉ. सुरेश खन्ना ने कहा कि विद्या मंदिर के स्कूलों में शिक्षा के साथ संस्कार भी मिलते हैं। यह स्कूल रोल मॉडल की तरह है। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट का उदाहरण दिया और कहा कि जब रूजवेल्ट कक्षा 6 में थे तो उनके स्कूल के विद्यार्थियों को व्हाइट हाउस दिखाया गया और उस पर निबंध लिखने को कहा गया। रूजवेल्ट ने निबंध में लिखा कि आज मैने वह भवन देखा जिसमें मुझे जाना है।
बाद में वे राष्ट्रपति बनकर उस भवन में गए। आरएसएस के ब्रज क्षेत्र के प्रांत प्रचारक डॉ. हरीश ने कहा कि भारत ही एक मात्र वह देश है जो विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है। कार्यकम की अध्यक्षता जगमोहन ने की। इससे पूर्व एटा सांसद राजवीर सिंह राजू भैया, शशि सिंह, रवेंद्र पाल सिंह एवं स्कूृल प्रबंधन द्वारा राज्यपाल का स्वागत किया गया। इस दौरान मंडलायुक्त चंद्रकात, डीआईजी गोविंद अग्रवाल, डीएम राजमणि यादव और एसएसपी लव कुमार आदि अधिकारी मौजूद रहे।