{"_id":"630bc1a3f4761452e2081187","slug":"trust-in-unani-medicines-increased-during-the-corona-period-aligarh-news-ali2991312127","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल में बढ़ा यूनानी दवाओं पर भरोसा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल में बढ़ा यूनानी दवाओं पर भरोसा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना काल में लोगों का यूनानी दवाओं पर भरोसा बढ़ा है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के दवाखाना तिब्बिया कॉलेज के उत्पाद शर्बत नजला, मुफीद जोशांदा, खमीरा मरवारीद और दिमागीन की खपत में वर्ष 2019-20 के मुकाबले वर्ष 2020-21 में लगभग 30-40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। लोगों ने इन दवाओं का इस्तेमाल प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खूब किया। इसी के चलते पिछले दिनों ने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने पेयोडेंट हर्बल टूथपेस्ट लॉन्च किया है।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का दवाखाना तिब्बिया कॉलेज में जड़ी-बूटियों से यूनानी दवाएं बनाई जाती हैं। दवाखाना तिब्बिया कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में शर्बत नजला की खपत लगभग 84 हजार यूनिट रही थी, जबकि वर्ष 2020-21 में 20 फीसदी ज्यादा खपत हुई। वर्ष 2019-20 में मुफीद जोशांदा की खपत लगभग 95 हजार यूनिट हुई थी तो वर्ष 2020-21 में इसमें 40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2019-20 में खमीरा मरवारीद की खपत लगभग 2750 यूनिट हुई। वर्ष 2020-21 में 30-35 फीसदी ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह दिमागीन में करीब 35 फीसदी ज्यादा खपत वर्ष 2020-21 में दर्ज की गई थी। हालांकि, मार्च 2022 के बाद थोड़ी गिरावट आई है।
खारी बावली से आती हैं जड़ी-बूटियां
यूनानी और आयुर्वेदिक दवाएं जड़ी-बूटियों से तैयार होती हैं। यह जड़ी-बूटियां दिल्ली के खारी बावली से आती हैं, जो भारत में जड़ी-बूटियों के मामले में सबसे बड़ा बाजार है। कोरोना काल में आयुष मंत्रालय ने जोशांदा (काढ़ा) पीने की अनुमति दी थी।
विज्ञापन
कोरोना काल में शर्बत नजला, मुफीद जोशांदा, खमीरा मरवारीद और दिमागीन की मांग ज्यादा रही। इनसे शरीर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यूनानी दवाओं पर लोगों का भरोसा कायम है। पिछले दिनों ने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने पेयोडेंट हर्बल टूथपेस्ट लॉन्च किया है।
- तौफीक अहमद, कार्यवाहक जनरल मैनेजर, दवाखाना तिब्बिया कॉलेज
विज्ञापन
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का दवाखाना तिब्बिया कॉलेज में जड़ी-बूटियों से यूनानी दवाएं बनाई जाती हैं। दवाखाना तिब्बिया कॉलेज के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में शर्बत नजला की खपत लगभग 84 हजार यूनिट रही थी, जबकि वर्ष 2020-21 में 20 फीसदी ज्यादा खपत हुई। वर्ष 2019-20 में मुफीद जोशांदा की खपत लगभग 95 हजार यूनिट हुई थी तो वर्ष 2020-21 में इसमें 40 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2019-20 में खमीरा मरवारीद की खपत लगभग 2750 यूनिट हुई। वर्ष 2020-21 में 30-35 फीसदी ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह दिमागीन में करीब 35 फीसदी ज्यादा खपत वर्ष 2020-21 में दर्ज की गई थी। हालांकि, मार्च 2022 के बाद थोड़ी गिरावट आई है।
विज्ञापन
खारी बावली से आती हैं जड़ी-बूटियां
यूनानी और आयुर्वेदिक दवाएं जड़ी-बूटियों से तैयार होती हैं। यह जड़ी-बूटियां दिल्ली के खारी बावली से आती हैं, जो भारत में जड़ी-बूटियों के मामले में सबसे बड़ा बाजार है। कोरोना काल में आयुष मंत्रालय ने जोशांदा (काढ़ा) पीने की अनुमति दी थी।
विज्ञापन
कोरोना काल में शर्बत नजला, मुफीद जोशांदा, खमीरा मरवारीद और दिमागीन की मांग ज्यादा रही। इनसे शरीर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यूनानी दवाओं पर लोगों का भरोसा कायम है। पिछले दिनों ने कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने पेयोडेंट हर्बल टूथपेस्ट लॉन्च किया है।
- तौफीक अहमद, कार्यवाहक जनरल मैनेजर, दवाखाना तिब्बिया कॉलेज