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व्यसनों में व्यस्त हैं धर्माचार्य
अलीगढ़
Updated Mon, 23 Nov 2015 02:01 AM IST
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अलीगढ़ (ब्यूरो)। धर्माचार्य और पीठाधीश्वर धर्म के पथ से भटक गए हैं। संयम छोड़ स्वार्थ में डूब गए हैं। दान के पैसों से नशा और दूसरे व्यसन कर रहे हैं। बड़े अधिकारी उनकी तुष्टि में लगे हुए हैं। मानव कल्याण की न सोचकर वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं धर्मगुरु। यह कहना है जगतगुरु त्रिकाल भुवंता सरस्वती जी महाराज पीठाधीश्वर तीर्थ प्रयाग परी अखाड़ा का।
रविवार को बी दास कंपाउंड स्थित हिन्दू महासभा के कार्यालय पर मीडिया से मुखातिब स्वयंभू महिला शंकराचार्य त्रिकाल भुवंता ने कहा कि चारों शंकराचार्य, 13 अखाड़ों, महिला अखाड़ा और अन्य धर्माचार्यों को धर्म संसद में मानव कल्याण, भारत की धरोहर जैसे नदियाें, मंदिरों आदि की रक्षा और नारी सशक्तीकरण, शिक्षा, गरीबी मिटाने के लिए मिलकर प्रयास करने चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा।
महिला शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि कुंभ जैसे आयोजनों में धर्माचार्यों- शंकराचार्य व्यसन कर रहे हैं। दान में आने वाला करोड़ों रुपया नशा में खर्च हो जाता है। वे ऐसे-ऐेसे व्यसन कर रहे हैं कि आम आदमी करे तो प्रशासन उसे जेल में डाल दे लेकिन धर्माचार्यों के मामले में वह उल्टा मददगार होता है। उन्होंने कहा कि पुरुष प्रधान अखाड़ों में नारी के उत्पीड़न और नारी साध्वी की हालत के चलते परी अखाड़े की स्थापना की गई। उज्जैन कुंभ में महामंडलेश्वरों का चयन होगा।
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देहली गेट प्रकरण में कहा कि मुआवजा और सांत्वना इस घटना की भरपाई नहीं कर सकती। हां पीड़ित परिवार को दुख सहने का धैर्य धारण जरूर कराया जा सकता है। गौरव के परिजनों को सांत्वना देने पहुंची। पीड़ित के लिए अखलाक की तरह मुआवजा की मांग करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि बहुसंख्यक को यह सोचना चाहिए कि वह अल्पसंख्यकों को समझा क्यों नहीं पा रहा है।
उनका अल्पसंख्यकों पर प्रभाव क्यों नहीं है। न्याय पक्षपात रहित होना चाहिए। उन्होंने गंगा आदि नदियों को बचाने का भी आह्वान किया। इससे पूर्व हिन्दू महासभा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय को परी अखाड़ा की संयोजिका और राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया। इस दौरान बबिता गुप्ता, रश्मि अरोड़ा, अनीता गुप्ता, हेमलता आदि उपस्थित रहीं।
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रविवार को बी दास कंपाउंड स्थित हिन्दू महासभा के कार्यालय पर मीडिया से मुखातिब स्वयंभू महिला शंकराचार्य त्रिकाल भुवंता ने कहा कि चारों शंकराचार्य, 13 अखाड़ों, महिला अखाड़ा और अन्य धर्माचार्यों को धर्म संसद में मानव कल्याण, भारत की धरोहर जैसे नदियाें, मंदिरों आदि की रक्षा और नारी सशक्तीकरण, शिक्षा, गरीबी मिटाने के लिए मिलकर प्रयास करने चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा।
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महिला शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि कुंभ जैसे आयोजनों में धर्माचार्यों- शंकराचार्य व्यसन कर रहे हैं। दान में आने वाला करोड़ों रुपया नशा में खर्च हो जाता है। वे ऐसे-ऐेसे व्यसन कर रहे हैं कि आम आदमी करे तो प्रशासन उसे जेल में डाल दे लेकिन धर्माचार्यों के मामले में वह उल्टा मददगार होता है। उन्होंने कहा कि पुरुष प्रधान अखाड़ों में नारी के उत्पीड़न और नारी साध्वी की हालत के चलते परी अखाड़े की स्थापना की गई। उज्जैन कुंभ में महामंडलेश्वरों का चयन होगा।
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देहली गेट प्रकरण में कहा कि मुआवजा और सांत्वना इस घटना की भरपाई नहीं कर सकती। हां पीड़ित परिवार को दुख सहने का धैर्य धारण जरूर कराया जा सकता है। गौरव के परिजनों को सांत्वना देने पहुंची। पीड़ित के लिए अखलाक की तरह मुआवजा की मांग करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि बहुसंख्यक को यह सोचना चाहिए कि वह अल्पसंख्यकों को समझा क्यों नहीं पा रहा है।
उनका अल्पसंख्यकों पर प्रभाव क्यों नहीं है। न्याय पक्षपात रहित होना चाहिए। उन्होंने गंगा आदि नदियों को बचाने का भी आह्वान किया। इससे पूर्व हिन्दू महासभा की राष्ट्रीय सचिव डॉ. पूजा शकुन पांडेय को परी अखाड़ा की संयोजिका और राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया। इस दौरान बबिता गुप्ता, रश्मि अरोड़ा, अनीता गुप्ता, हेमलता आदि उपस्थित रहीं।