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भाई दूज आज, यमुना स्नान के लिए मथुरा जाएंगे श्रद्धालु
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आज (सोमवार) भाई दूज है। यमुना स्नान के लिए जिले से कई श्रद्धालु आज मथुरा-वृंदावन जाएंगे। यहां यमुना स्नान के बाद पूजा पाठ करेंगे और देवालयों के दर्शन कर वापस आएंगे। भाई दूज का टीका करने का पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06.44 से 08.15 के बीच अमृत का रहेगा। इसके बाद एक शुभ का मुहूर्त सुबह 09:30 से 10:45 के बीच रहेगा। इसमें भाई दूज का टीकाकरण करने से भाई बहनों के बीच अपार प्रेम सौहार्द का संयोग वर्ष भर बना रहेगा। इसके बाद दोपहर 01:25 से शाम 04:10 तक तीन अत्यंत ही शुभ मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) उपलब्ध रहेंगे। इनमें बहने अपने भाई के टीका कर सकती हैं। विश्वकर्मा व चित्रगुप्त पूजा के लिए सुबह साढ़े नौ से 10:45 तक शुभ के चौघड़िया मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि गोवर्धन पूजा के बाद अगली तिथि में यम द्वितीया, भाईदूज, चित्रगुप्त और विश्वकर्मा भगवान की पूजा का विधान है। इस दिन बहनें अपनी भाई की लंबी आयु, सुख-संपन्नता के लिए भाई का हाथ पकड़कर यमुना में स्नान करती हैं। वहीं यमराज के भय से बचने के लिए भाई अपनी बहनों के यहां भोजन करते हैं।
उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य देव की पत्नी की कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह प्यार करती थीं। वह भाई से बार-बार निवेदन करती थीं कि यमराज भाई उसके घर आकर भोजन करें, लेकिन यमराज अपने कार्यों में अति व्यस्त होने के कारण बहन की बात को टाल जाते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन के लिए बुलाया बहन के घर आते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीव को मुक्त कर दिया था। यमुना ने भाई का स्वागत सत्कार किया और भोजन कराया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने के लिए कहा। बहन ने भाई से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे घर भोजन करेंगे और इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाएगी। उसे आपका भय नहीं रहे। इस पर भाई यमराज ने बहन को मूल्यवान वचन देकर चले गए।
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सुबह साढ़े सात से नौ बजे तक न करें कोई शुभ कार्य
आज भाई दूज पर सुबह साढ़े सात से लेकर नौ बजे तक राहु काल रहेगा। पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि यह समय अति नेष्ट रहेगा। राहु काल में कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इसीलिए इस समय टीका करने से भी बचें।
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श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के अध्यक्ष पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि गोवर्धन पूजा के बाद अगली तिथि में यम द्वितीया, भाईदूज, चित्रगुप्त और विश्वकर्मा भगवान की पूजा का विधान है। इस दिन बहनें अपनी भाई की लंबी आयु, सुख-संपन्नता के लिए भाई का हाथ पकड़कर यमुना में स्नान करती हैं। वहीं यमराज के भय से बचने के लिए भाई अपनी बहनों के यहां भोजन करते हैं।
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उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य देव की पत्नी की कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ। यमुना अपने भाई यमराज से बहुत स्नेह प्यार करती थीं। वह भाई से बार-बार निवेदन करती थीं कि यमराज भाई उसके घर आकर भोजन करें, लेकिन यमराज अपने कार्यों में अति व्यस्त होने के कारण बहन की बात को टाल जाते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना ने अपने भाई यमराज को भोजन के लिए बुलाया बहन के घर आते समय यमराज ने नरक में निवास करने वाले जीव को मुक्त कर दिया था। यमुना ने भाई का स्वागत सत्कार किया और भोजन कराया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर मांगने के लिए कहा। बहन ने भाई से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे घर भोजन करेंगे और इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाएगी। उसे आपका भय नहीं रहे। इस पर भाई यमराज ने बहन को मूल्यवान वचन देकर चले गए।
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सुबह साढ़े सात से नौ बजे तक न करें कोई शुभ कार्य
आज भाई दूज पर सुबह साढ़े सात से लेकर नौ बजे तक राहु काल रहेगा। पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि यह समय अति नेष्ट रहेगा। राहु काल में कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। इसीलिए इस समय टीका करने से भी बचें।