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अलीगढ़ से कासगंज की तरफ रवाना हुई टीकाकरण जागरूकता रैली
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह के उपलक्ष्य में टाइम कैप्सूल गणतंत्र दिवस पर जमीन में दफन किया जाएगा। इस कैप्सूल में सन 1877 से लेकर 2020 तक के विश्वविद्यालय के इतिहास को समेटा गया है। कार्यक्रम गणतंत्र दिवस के अवसर पर सुबह 11 बजे किया जाएगा। कुलपति स्वयं इस कार्य को अंजाम देंगे। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
टाइम कैप्सूल को तैयार करने वाली कमेटी के प्रमुख और एएमयू के इतिहास के मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार ने बताया कि टाइम कैप्सूल को विक्टोरिया गेट के सामने पार्क में 30 फुट जमीन के अंदर दफनाया जाएगा। इस टाइम कैप्सूल को अगले 500 वर्ष के लिए तैयार किया गया है। इस अवधि तक इसको कोई नुकसान न पहुंचे, इसके निर्माण में ऐसे तत्वों का इस्तेमाल किया गया है। कैप्सूल की बाहरी परत का निर्माण एक खास किस्म की स्टील से किया गया है। इसके अलावा बाहरी परत पर कोटिंग भी की गई है।
कैप्सूल बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि 500 वर्ष बाद जब इसको खोला जाए, तब इसके डिकोड करने में किसी तरह की समस्या न आए। इसलिए कैप्सूल के अंदर जो भी सामग्री रखी गई है, वह प्रिंटेड अवस्था में है। इस कैप्सूल में सन 1877 से लेकर 2020 तक के विश्वविद्यालय के इतिहास को समेटा गया है।
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इसमें स्कूल की स्थापना से लेकर कॉलेज बनने और फिर विश्वविद्यालय बनने तक के सफर से लेकर वर्तमान 100 वर्ष होने तक के विषय में जिक्र किया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय की उपलब्धि, देश और दुनिया में योगदान, दुनियाभर में फैले विश्वविद्यालय के छात्र, संग्रहालय, शैक्षिक उपलब्धियां आदि का प्रमुख रूप से जिक्र किया गया है।
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टाइम कैप्सूल को तैयार करने वाली कमेटी के प्रमुख और एएमयू के इतिहास के मामलों के जानकार डॉ. राहत अबरार ने बताया कि टाइम कैप्सूल को विक्टोरिया गेट के सामने पार्क में 30 फुट जमीन के अंदर दफनाया जाएगा। इस टाइम कैप्सूल को अगले 500 वर्ष के लिए तैयार किया गया है। इस अवधि तक इसको कोई नुकसान न पहुंचे, इसके निर्माण में ऐसे तत्वों का इस्तेमाल किया गया है। कैप्सूल की बाहरी परत का निर्माण एक खास किस्म की स्टील से किया गया है। इसके अलावा बाहरी परत पर कोटिंग भी की गई है।
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कैप्सूल बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि 500 वर्ष बाद जब इसको खोला जाए, तब इसके डिकोड करने में किसी तरह की समस्या न आए। इसलिए कैप्सूल के अंदर जो भी सामग्री रखी गई है, वह प्रिंटेड अवस्था में है। इस कैप्सूल में सन 1877 से लेकर 2020 तक के विश्वविद्यालय के इतिहास को समेटा गया है।
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