{"_id":"692f49e574fde88730045362","slug":"three-years-simple-imprisonment-for-a-person-who-fraudulently-obtains-a-loan-from-a-bank-aligarh-news-c-2-1-ali1010-851475-2025-12-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: धोखाधड़ी कर बैंक से ऋण लेने वाले को तीन वर्ष का साधारण कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: धोखाधड़ी कर बैंक से ऋण लेने वाले को तीन वर्ष का साधारण कारावास
Wed, 03 Dec 2025 01:49 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, अलीगढ़
Updated Wed, 03 Dec 2025 01:49 AM IST
विज्ञापन
न्यायिक मजिस्ट्रेट गंधर्व पटेल की अदालत ने एक व्यक्ति को तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा दी है। साथ ही तीन हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है। उस पर आरोप है कि प्रधानमंत्री रोजगार योजना में वेल्डिंग की दुकान खोलने के नाम पर बैंक से 40 हजार रुपये का कर्ज लेकर उपकरण खरीद के फर्जी कागजात बैंक में जमा किए।
ग्राम कनौरा निवासी शशिपाल के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधक वीएस सारस्वत ने इगलास कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दर्ज रिपोर्ट में बताया था कि शशिपाल ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत वेल्डिंग की दुकान खोलने के लिए 40 हजार रुपये के ऋण का आवेदन किया था। ऋण स्वीकृति होने के उपरांत 26 मार्च वर्ष 2000 को उपकरण की खरीद के लिए बैंक से 22,199 रुपये प्राप्त कर लिए। इसके बाद उपकरणों की खरीद के जाली बाउचर बैंक में जमा किए।
फील्ड ऑफिसर के साथ जब उन्होंने स्थलीय निरीक्षण किया तो मौके पर न दुकान मिली और न एक भी उपकरण नहीं मिला। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद मुकदमे की 24 साल तक सुनवाई चली।
विज्ञापन
मंगलवार न्यायिक मजिस्ट्रेट गंधर्व पटेल की अदालत ने मामले में शशिपाल को दोषी मानते हुए तीन वर्ष के साधारण सजा और तीन हजार रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई।अदालत के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है। आरोपी पक्ष से अधिवक्ता अजयवीर सिंह और अभियोजन पक्ष से सरकारी वकील कार्तिक जैन ने तर्क और साक्ष्य पेश किए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता का कहना है कि इस आदेश के विरुद्ध अपील दायर करेंगे।
विज्ञापन
ग्राम कनौरा निवासी शशिपाल के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन शाखा प्रबंधक वीएस सारस्वत ने इगलास कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दर्ज रिपोर्ट में बताया था कि शशिपाल ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत वेल्डिंग की दुकान खोलने के लिए 40 हजार रुपये के ऋण का आवेदन किया था। ऋण स्वीकृति होने के उपरांत 26 मार्च वर्ष 2000 को उपकरण की खरीद के लिए बैंक से 22,199 रुपये प्राप्त कर लिए। इसके बाद उपकरणों की खरीद के जाली बाउचर बैंक में जमा किए।
विज्ञापन
फील्ड ऑफिसर के साथ जब उन्होंने स्थलीय निरीक्षण किया तो मौके पर न दुकान मिली और न एक भी उपकरण नहीं मिला। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कोतवाली पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद मुकदमे की 24 साल तक सुनवाई चली।
विज्ञापन
मंगलवार न्यायिक मजिस्ट्रेट गंधर्व पटेल की अदालत ने मामले में शशिपाल को दोषी मानते हुए तीन वर्ष के साधारण सजा और तीन हजार रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई।अदालत के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है। आरोपी पक्ष से अधिवक्ता अजयवीर सिंह और अभियोजन पक्ष से सरकारी वकील कार्तिक जैन ने तर्क और साक्ष्य पेश किए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता का कहना है कि इस आदेश के विरुद्ध अपील दायर करेंगे।